कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है

कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है

कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है।।टेक।। काम क्रोध मद लोभ बिसारो, शील सँतोष क्षमा सत धारो। मद मांस मिथ्या तजि डारो, हो ज्ञान घोडै असवार, भरम से न्यारा है।1। धोती नेती बस्ती पाओ, आसन पदम जुगतसे लाओ। कुम्भक कर रेचक करवाओ, पहिले मूल सुधार कारज हो सारा है।2। मूल कँवल दल चतूर बखानो, किलियम जाप लाल रंग मानो। देव गनेश तहँ रोपा थानो, रिद्धि सिद्धि चँवर [...] Read more

चार युगों का वर्णन

चार युगों का वर्णन

चार युग हैं। - 1) सत्ययुग 2) त्रेतायुग 3) द्वापर युग 4) कलयुग। 1) सत्ययुग का वर्णन:- सत्ययुग की अवधि 17 लाख 28 हजार वर्ष है। मनुष्य की आयु प्रारम्भ में दस लाख वर्ष होती है। अन्त में एक लाख वर्ष होती है। मनुष्य की ऊँचाई 21 हाथ यानि लगभग 100 से 150 फुट होती है। {उस समय मनुष्य के हाथ (कोहनी से बड़ी ऊंगली के अंत तक) की लंबाई लगभग 5 फुट होती है।} मेरा [...] Read more

Narcotic-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

Narcotic-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

One of the cardinal teachings of Jagat Guru Rampal Ji is renunciation of intoxicants which some other gurus also profess. The biggest difference however is that when one takes "naam" (initiation) from Jagat Guru Rampal Ji, they get the grace of Satguru Rampal Ji and the power of the true naam to adhere to it and thus get deaddicted straightaway. [...] Read more

क्या पाण्डव सदा स्वर्ग में ही रहेंगे?

क्या पाण्डव सदा स्वर्ग में ही रहेंगे?

धर्मदास जी ने कबीर परमेश्वर जी के चरण पकड़ कर अति विनम्र होकर आधीन भाव से प्रश्न किया। प्रश्नः- हे बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर जी! क्या पाण्डव अब सदा स्वर्ग में ही रहेगें? कबीर परमेश्वर जी का उत्तरः- नहीं धर्मदास! जो पुण्य युधिष्ठर ने उनको प्रदान किए हैं। उन पुण्यों का तथा स्वयं किए यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य जब स्वर्ग में समाप्त हो जाएगा तब [...] Read more

दास की परिभाषा

दास की परिभाषा

एक समय सुल्तान एक संत के आश्रम में गया। वहाँ कुछ दिन संत जी के विशेष आग्रह से रूका । संत का नाम हुकम दास था। बारह शिष्य उनके साथ आश्रम में रहते थे। सबके नाम के पीछे दास लगा था। फकीर दास, आनन्द दास, कर्म दास, धर्मदास। उनका व्यवहार दास वाला नहीं था। उनके गुरू एक को सेवा के लिए कहते तो वह कहता कि धर्मदास की बारी है, उसको कहो, धर्मदास कहता कि आनन्द [...] Read more

राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ

राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ

नल तथा नील को शरण में लेना त्रोतायुग में स्वयंभु कविर्देव(कबीर परमेश्वर) रूपान्तर करके मुनिन्द्र ऋषि के नाम से आए हुए थे। एक दिन अनल अर्थात् नल तथा अनील अर्थात् नील ने मुनिन्द्र साहेब का सत्संग सुना। दोनों भक्त आपस में मौसी के पुत्रा थे। माता-पिता का देहान्त हो चुका था। नल तथा नील दोनों शारीरिक व मानसिक रोग से अत्यधिक पीड़ित थे। सर्व ऋषियों व [...] Read more

सांसारिक चीं-चूं में ही भक्ति करनी पड़ेगी

सांसारिक चीं-चूं में ही भक्ति करनी पड़ेगी

एक थानेदार घोड़ी पर सवार होकर अपने क्षेत्रा में किसी कार्यवश जा रहा था। ज्येष्ठ (श्रनदम) का महीना, दिन के एक बजे की गर्मी। हरियाणा प्रान्त। एक किसान रहट से फसल की सिंचाई कर रहा था। बैलों द्वारा कोल्हू की तरह रहट को चलाया जाता था। बाल्टियों की लड़ी (ब्ींपद) जो पूली (चक्री) के ऊपर चलतीथी जिससे कूंए से पानी निकलकर खेत में जाने वाली नाली में गिरता था। [...] Read more

तम्बाकू से गधे-घोड़े भी घृणा करते हैं

तम्बाकू से गधे-घोड़े भी घृणा करते  हैं

एक दिन संत गरीबदास जी (गाँव-छुड़ानी, जिला-झज्जर वाले) किसी कार्यवश घोड़े पर सवार होकर जींद जिले में किसी गाँव में जा रहे थे। मार्ग में गाँव मालखेड़ी (जिला जींद) के खेत थे। उन खेतों में से घोड़े पर बैठकर जा रहे थे। गेहूँ की फसल खेतों में खड़ी थी। घोड़ा रास्ता छोड़कर गेहूँ की फसल के बीचों-बीच चलने लगा। खेतों में फसल के रखवाले थे। वे लाठी-डण्डे लेकर दौड़े और [...] Read more

Rig Ved - God is in Form

Rig Ved - God is in Form

Rig Ved Mandal 1, Sukt 31, Mantra 17 परमात्मा साकार है और बह राजा के समान दर्शनीय है ! और उसका नाम कविर्देव है! वेदों में परमात्मा साकार है मनुष्य सदृश्य है और सतलोक में तेजोमय शरीर में विद्यमान है।

भक्ति मार्ग पर यात्रा

भक्ति मार्ग पर यात्रा

जब तक आध्यात्मिक ज्ञान नहीं, तब तक तो जीव माया के नशे में अपना उद्देश्य भूल चुका था और जैसा ऊपर बताया है कि शराबी नशे में ज्येष्ठ महीने की गर्मी में दिन के दोपहर के समय धूप में पड़ा-पड़ा पसीने व रेत में सना भी कह रहा होता है कि मौज हो रही है। परंतु नशा उतरने के पश्चात् उसे पता चलता है कि तू तो जंगल में पड़ा है, घर तो अभी दूर है। कबीर जी ने कहा है [...] Read more

केदारनाथ मंदिर भारत में तथा पशुपति मंदिर नेपाल में कैसे बना?

केदारनाथ मंदिर भारत में तथा पशुपति मंदिर नेपाल में कैसे बना?

(केदार का अर्थ दलदल है) महाभारत में कथा है कि पाँचों पाण्डव (युद्धिष्ठर, अर्जुन, भीम, नकुल व सहदेव) जीवन के अंतिम समय में हिमालय पर्वत पर तप कर रहे थे। एक दिन सदाशिव यानि काल ब्रह्म ने दुधारू भैंस का रूप बनाया और उस क्षेत्रा में घूमने लगा। भीम दूध प्राप्ति के उद्देश्य से उसे पकड़ने के लिए दौड़ा तो भैंस पृथ्वी में समाने लगी। भीम ने भैंस का पिछला भाग [...] Read more

गुरू बिन मोक्ष नही

गुरू बिन मोक्ष नही

प्रश्न:- क्या गुरू के बिना भक्ति नहीं कर सकते? उत्तर:- भक्ति कर सकते हैं, परन्तु व्यर्थ प्रयत्न रहेगा। प्रश्न:- कारण बताऐं? उत्तर:- परमात्मा का विधान है जो सूक्ष्मवेद में कहा है कबीर, गुरू बिन माला फेरते, गुरू बिन देते दान। गुरू बिन दोंनो निष्फल है, पूछो वेद पुराण।। कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हों भी गुरू कीन्ह। तीन लोक के वे धनी, गुरू आगे [...] Read more

अंध श्रद्धा भक्ति - खतरा-ए-जान | Andh Shradha Bhakti

अंध श्रद्धा भक्ति - खतरा-ए-जान | Andh Shradha Bhakti

अंध श्रद्धा का अर्थ है बिना विचार-विवेक के किसी भी प्रभु में आस्था करके उसे प्राप्ति की तड़फ में पूजा में लीन हो जाना। फिर अपनी साधना से हटकर शास्त्रा प्रमाणित भक्ति को भी स्वीकार न करना। दूसरे शब्दों में प्रभु भक्ति में अंधविश्वास को ही आधार मानना। जो ज्ञान शास्त्रों के अनुसार नहीं होता, उसको सुन-सुनाकर उसी के आधार से साधना करते रहना। वह साधना जो [...] Read more

Astrophysics From Vedas

Astrophysics From Vedas

Origin of Universe, formation of Stars, Planets & Galaxies from the Vedas The realm of astrophysics explores the origin of the universe by applying the principles of physics, and so far remains in its infancy and with their current abysmal knowledge base is unlikely to ever get an answer to the universal question on how the universe was [...] Read more

Dowry-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

Dowry-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

Jagat Guru Rampal Ji has always been against the practice of dowry. His disciples are not allowed to accept or give dowry. His teachings are eradicating this social evil from the Indian society. It is mandatory for His disciple to follow this rule amongst many others. One who doesn't follow these rules, ceases to be His disciple.

Free Download Jeene Ki Raah Book in PDF, The Way of Living

Free Download Jeene Ki Raah Book in PDF, The Way of Living

Today, our world is going through such a huge turmoil given the widespread pandemic, mother nature in its most ferocious form, and acts of violence undertaken in the name of religion. All these have led to a situation of chaos and fear amongst the people with such an enormously high death toll. Those whom people called friends are no longer [...] Read more

There is No mention of Prophet Muhammad in Vedas

There is No mention of Prophet Muhammad in Vedas

Is Mohammad (Muhammad) mentioned in the Vedas? Zakir Naik claims that the Vedas talk about Prophet Muhammad. Zakir Naik is lying. FACT: There is no mention of Prophet Muhammad in the Vedas. This word "Muhammad" or "Mohammad" is not mentioned in the Vedas. In Atharva Ved, Kand 20, Sukt 127, Verse 1,2, there is a word called "Narshansa". Further it [...] Read more

Na Tasya Pratima Asti | न तस्य प्रतिमा अस्ति

Na Tasya Pratima Asti | न तस्य प्रतिमा अस्ति

Response to Dr Zakir Naik by Sant Rampal Ji on Yajur Ved 32.3 - न तस्य प्रतिमा अस्ति - Na Tasya Pratima Asti. Zakir Naik uses this verse from Yajur Ved 32.3 to stake a claim that the Vedas also say that the God is formless. Sant Rampal Ji refutes this claim of Zakir Naik and proves that God is in form. Vedas clearly say that God is in form.

Bhagavad Purana - Kalki Avatar & Prophet Muhammad

Bhagavad Purana - Kalki Avatar & Prophet Muhammad

Zakir Naik has wrongly understood the Bhagavad Purana. He is wrongly portraying Prophet Mohammad as the Kalki Avatar where as the truth is that Kalki Avatar will appear after millions of years (from 2013). Zakir Naik is just manipulating the facts to fit them to Prophet Mohammad and wrongly quoting Bhagavad Purana. Sant Rampal Ji Maharaj has [...] Read more

Bhavishya Purana - Prophet Mohammad | Malecha मलेच्छ

Bhavishya Purana - Prophet Mohammad | Malecha मलेच्छ

The Truth about Mohammad Malecha from Bhavishya Purana by Supreme Spiritual Leader Saint Rampal Ji Maharaj. What is the meaning of Malecha? The actual meaning of "Malecha" is: Low, Mean, Ignoble, Abject, Despicable. Bhavishya Purana addresses Prophet Mohammad as a Malecha. Malecha is a word of Hindi / Sanskrit origin and only means "Neech" (नीच) [...] Read more

Is worship of Brahma, Vishnu, Shiva, Durga, Ganesh forbidden by Satguru Rampal Ji?

Is worship of Brahma, Vishnu, Shiva, Durga, Ganesh forbidden by Satguru Rampal Ji?

How to Worship to attain Moksh / Liberation There is a misconception amongst the masses that Jagat Guru Rampal Ji Maharaj prohibits the worship of Brahma, Vishnu, Shiv, Durga etc. Garib Das Ji Maharaj says "गरीब, तीनो देवा दिल में बसे, ब्रह्मा विष्णु महेश प्रथम इनकी वंदना फिर सुन सतगुरु उपदेश" The line above by Garib Das Ji talks about doing [...] Read more

Can God forgive our Sinful Deeds

Can God forgive our Sinful Deeds

क्या परमात्मा कर्म काट सकता है और पाप नष्ट कर सकता है? The general consensus amongst saints and rishis is that God cannot forgive our sins. All of them believe that we have to bear the hardships in life which are due to consequences of sins we have either done in the previous lives or the current life. They believe that is the only way to expend [...] Read more

Why and How is consuming tobacco a hindrance in achieving God?

Why and How is consuming tobacco a hindrance in achieving God?

Consumption of tobacco has been described as the most sinful act and the biggest hindrance in achieving God. Even offering tobacco to someone is highly sinful. Those who worship but also consume tobacco or alcohol can never attain God. Possibly this is why tobacco is forbidden in Sikhism and is not cosumed by Sikhs. Part 1: God's Punishment for [...] Read more

उत्तम (Uttam) & अनुत्तम (Anuttam)

उत्तम (Uttam) & अनुत्तम (Anuttam)

The straightforward meaning of अनुत्तम (Anuttam) is the "opposite of उत्तम (Uttam)". उत्तम (Uttam) means GOOD and अनुत्तम (Anuttam) means BAD. Those unknowledgeable saints who do not have any knowledge of creation of nature and those who consider Shri Krishan Ji to be the Supreme God have caused a catastrophe by translating this word "अनुत्तम [...] Read more

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