12. बे-औलादो! सावधान | जीने की राह


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जिन पुण्यात्माओं को संतान नहीं होती तो आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव से उनकी तड़फ संतान प्राप्ति की बनी रहती है। उसके लिए हरसंभव प्रयत्न करते हैं। फिर भी कोई लेन-देन वाला (संतान) नहीं मिलता है तो आजीवन संतान प्राप्ति न होने के दुःख को झेलते हैं। विशेषकर स्त्राी की संतान उत्पन्न करने की इच्छा प्रबल होती है। वह अपने को बांझ कहलवाना नहीं चाहती। भले ही जाँच करके डाॅक्टर बता देते हैं कि आप में बांझ के कोई लक्षण नहीं हैं। विधाता की लीला है। परंतु तत्वज्ञानहीन स्त्राी इसी तड़फ में मर जाती है। भक्ति न करने के कारण उसका अगला जन्म कुतिया का होता है। फिर जम के दूत उसे कहते हैं कि बहन जी! अब संतान पैदा करके सारी कसर निकाल ले। एक ब्यांत में आठ-आठ जामैगी (जन्म देगी)। फिर अगला जन्म तेरा सूअरी का होगा। एक बार में बारह संतान को जन्म देगी और सात-आठ ब्यांत करेगी, संतान की सारी भूख मिटा लिए। 

हे पुण्यात्मा पाठक भाईयो/बहनो! अध्यात्म ज्ञान को समझो। मानव जीवन को सफल बनाओ। जीने की राह समारो (निर्बाध बनाओ) यानि पूर्ण गुरू से दीक्षा लेकर भक्ति करके कल्याण करवाओ।