पवित्र वेदों में पूर्ण परमात्मा की अवधारणा (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद)

वेदों का सारांश

परमात्मा सहशरीर है। निराकार नहीं है। 

परमात्मा शाश्वत स्थान यानि सचखण्ड, सतलोक में रहता है।  

परमात्मा का नाम कविर (कबीर) देव है। जिनको अन्य भाषाओ में कबीर साहिब, हक्का कबीर, सत कबीर, अल्लाह हु अकबर, कबीरन, कबीरा, खबीरा, नामो से जाना जाता है। 


परमात्मा अपने भगतों की आयु बढ़ा सकता है । 

परमात्मा अपने भगतों के पाप नष्ट कर सकता है ।