जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का 4 मई 2026 का यह संदेश समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का पुंज है। इसमें उन्होंने भक्त समाज के अनुकरणीय आचरण को ‘कलयुग में सतयुग की शुरुआत’ बताते हुए नाम-दीक्षा, मोक्ष और सामाजिक सुधारों पर विशेष प्रकाश डाला है। यह संदेश विश्व को सच्चे सतगुरु की शरण ग्रहण कर आत्म-कल्याण और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है।
सतगुरु देव की जय! परमेश्वर कबीर जी की प्यारी संगत को विश्व की सारी संगत को दास का आशीर्वाद। परमात्मा आपको मोक्ष दे, सुखी रखे, काल कष्ट से रक्षा करें।
बच्चों, दास को बड़ा हर्ष हुआ, बड़ी खुशी हुई। सभी सतलोक आश्रमों में देश तथा विदेश में बढ़-चढ़कर भक्त आए, बेटा बेटी आए। हमारे और जगत के लोगों का उत्साह भी देखने योग्य था। आपके शिष्टाचार से, आपके अनुशासन से, आपके व्यवहार से दुनिया अचंभित है कि यह लोग कौन से लोक से आए हैं।
इनका ऐसा आचरण है कि जहाँ लाखों की संख्या में संगत होती है, वहाँ एक कीड़ी की भी आवाज़ नहीं आती। अपने आप कोई किसी को यह नहीं कह रहा तू पानी ला दे इनके लिए, स्वयं कोशिश करते हैं; ऑटोमेटिक सिस्टम से चल रहा है सारा काम। तो बच्चों, आपने कलयुग में सतयुग की शुरुआत कर दी है।
तो बच्चों, आप ‘कलयुग में सतयुग की शुरुआत भाग 6: विश्व में शांति तथा आपसी भाईचारा कैसे स्थापित होगा’, यह वीडियो देखिए। यह मात्र एक वीडियो नहीं, बल्कि एक जीवंत ग्रंथ है। दास पहले से कहता आ रहा था कि आप सामान्य आत्मा नहीं हो। आप बहुत ही गजब की आत्मा हो और आज यह स्पष्ट भी हो गया।
जैसे भविष्य मालिका नाम की जो एक पुस्तक है, उसको बहुत ही सटीक मानते हैं। उसने यहाँ तक बता रखा है - जैसा कि वह भविष्यवक्ता की वाणी पढ़ते हैं जो वहाँ के जानकार और प्रचारक हैं - कि उन्होंने जो 600 वर्ष पहले कहा था, वह आज सारा पूरा हो रहा है। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि पुरुष से पुरुष विवाह करेगा, स्त्री से स्त्री विवाह करेगी और बगैर शादी किए ही स्त्री पुरुष साथ रहा करेंगे।
तो वह आज हो रहा है। उस समय जो परिवर्तन बताया गया था, वैसी सटीक भविष्यवाणियाँ जिन्होंने की थीं, उन्होंने फिर अपनी जीवनी भी बताई है। जिन्होंने अपनी और औरों की जीवनी बताई है, जो इतनी सटीक थी, तो उन्होंने अपने बारे में जो भी बताया है, वह भी उतना ही सटीक है।
एक ने बताया कि मैं पहले सतयुग में कृपा जला नामक ऋषि था, फिर मैं नील बना, फिर सुदामा हुआ और अब मैं अच्युतानंद हूँ। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय, जब स्वयं सोलह महाकलाओं वाले प्रभु इस धरा पर अवतरित होंगे - अपने विशेष भक्त की काया सृजन करके और उसका स्वरूप बनाकर वे इस धरती पर होंगे - उस समय हम फिर जन्म लेंगे और तब हमारा मोक्ष होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय जो भी उनकी शरण में आ जाएगा, उन सबकी मुक्ति होगी।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
दूसरे ने कहा कि मैं सतयुग में मार्कंडेय ऋषि था। दास आपको कथा सुनाया करता था और दास ने आपको पहले ही बताया था, क्योंकि दास इस अध्यात्म का टीचर मास्टर है, पीएचडी स्कॉलर समझ लो। उसी समय दास कहा करता था कि मार्कण्डेय ऋषि इस बात पर फूल रहा है कि वह ब्रह्मलोक ब्रह्म की साधना करता है। इसलिए इंद्र को कहता है कि इंद्र तू इंद्र की गद्दी छोड़ दे, आजा तुझे ब्रह्मलोक की सैर करा दूं यानी वह विधि बता दूं जिससे तू ब्रह्मलोक चला जाएगा। मार्कण्डेय ऋषि ब्रह्म साधना करके ब्रह्मलोक में गया और वह फिर क्या बना? वो कहता है मैं सतयुग में मार्कण्डेय ऋषि था, त्रेता में हनुमान बना। दास ने आपको क्लियर कर रखा है कि ओम नाम के जाप से ब्रह्मलोक प्राप्ति होती है, तप से सिद्धियां बन जाती है। तो वह सिद्धियां प्राप्त कर ली इसने। ओम नाम की कमाई उसमें महा स्वर्ग ब्रह्मलोक में नष्ट कर दी। और फिर बना हनुमान। बता फिर पत्थर उठाए पहाड़ उठाए जग में महिमा हुई पर मोक्ष नहीं हुआ। ओए होए होए, उसके बाद वह द्वापर में कुछ और हुआ और फिर अब यह हुआ उन पांचों में से एक।
अब बच्चों आप हिसाब लगाओ आप उन आत्माओं में से हो जिनका आज जन्म हुआ है और जिन्होंने मार्कण्डेय ऋषि से भी सुप्रीम साधना कर रखी है।
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संत गरीब दास जी महाराज ने कहा है:
नारद मुनि से केते वरणों, जो उधरे सो सतगुरु शरणों।
नारद मुनि की क्या महिमा गाऊं, इनकी कोई गिनती नहीं है। पर जिनका भी उद्धार हुआ है, वह कबीर परमात्मा की शरण में आकर ही हुआ है।
कबीर, लख बर सूरा जूझ ही, लख बर सावंत देह।
लख बर यति जहान में, तब सतगुरु शरणा लेह।।
सतगुरु की वाणी सुनिए! आप वह आत्माएं हैं जो समन जैसी हैं - जिसने परमात्मा के लिए अपना बेटा भी काट दिया, लेकिन फिर भी सेवा में कोई न कोई त्रुटि बनी रही, कहीं चूक-चाकरी रह गई और पार नहीं हुए। अब वह पीक टाइम आ गया है बच्चों! अब आपको शिक्षित किया गया है और ऐसा इतिहास समय-समय पर आपके सामने रूबरू कर दिया है कि अब आप इतने दृढ़ हो गए हो कि यह भूल दोबारा कर ही नहीं सकते। अब मर सकते हो, पर डिगोगे नहीं। अब मोक्ष प्राप्ति होगी और गारंटेड होगी, भगवान जहाज भर-भर के ले जाएगा।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
और जब तक पृथ्वी पर रहोगे, जिसके अंदर कतई समर्पित भाव हो गया, भगवान उसे हाथों पर रखेगा। जैसे मां अपने छोटे बच्चे को छाती से लगाकर रखती है, वैसे ही कबीर भगवान तुम्हें रखेगा।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
दास आपको बार-बार कहता रहा था कि भाई, मुझे तुम जेल में ना समझियो, यह गलती ना करना। थोड़ा टाइम दो, मुझे इन्हें मनाने आने दो। और तुमने भी इस दास की बातों पर विश्वास किया और दास को अपने साथ समझा, तो आज हम सफल हुए।
इसमें किसी व्यक्ति का दोष नहीं होता कि उसने ये कर दिया या उसने हमारे ऊपर गलत मुकदमे बना दिए।
हम तो वो कहते हैं कि चोर को नहीं, चोर की मां को पकड़ो। एक लड़का चोरी करने लगा तो राजा के पास ले गए। राजा बोला कि चोर को छोड़ो और इसकी मां को बुलाओ। मां से कहा गया कि जब यह पहली बार चोरी करके लाया था, अगर तभी तूने इसे धमका दिया होता और लाभ ना बताया होता तो यह चोरी नहीं करता। माँ ने कहा कि मैंने उसे चोरी करने से कभी मना नहीं किया, उल्टे मैं तो खुश हुआ करती थी। सजा उस मां को दी गई।
तो यहाँ हमारी असली लड़ाई कबीर साहब और इस काल की है। ये नीचे के लोग तो खामखां बीच में आकर अपना कर्म बिगाड़ते हैं।
अब जैसे कहते हैं कि श्री रामचंद्र जी को वनवास कैकई ने दिलवा दिया। पर कैकई ने क्यों दिलवा दिया? क्योंकि नारद ने श्राप दिया था और वह होना ही था। इसमें कैकई क्या करे? वह चोर की माँ तो नारद था। खुद बकवाद करी; पहले तो बाल ब्रह्मचारी बन गया और तपस्या करने गया कि मैंने इंद्रियां जीत ली हैं। कबीर साहब उसकी यह मिट्टी पलीद करने के लिए आए ताकि उसका अहंकार टूटे। फिर वह सजा राम को भुगतनी पड़ी। नारद ने जब विष्णु का रूप धारण करके स्वयंवर होते देखा, तो वह शादी करने पहुँच गया क्योंकि लड़की सुंदर थी। वह तो अपनी ओर से भगवान विष्णु ही बना था, पर जब बात नहीं बनी तो उसने श्राप दे दिया। भगवान तो उसकी जान बचाना चाहते थे, पर इसे अहंकार हो गया था।
तो कहने का भाव यह है कि यह सब नारद के कारण हुआ। वैसे ही यह सब काल ने हमारे साथ कर रखा था और परमात्मा हमारी परीक्षा ले रहा था। कहते हैं कि
मोला बैठा मोरचे, और देखे जन की भड़।
परमात्मा ऊपर बैठा हमारे हर कार्य पर नज़र रखता है कि यह कितना शूरवीर है और इसे मेरे मार्ग पर कितना विश्वास है। आपने विश्वास रखा, तो आज सफल हो गए। आपका तो उद्धार होगा ही होगा, अब तो सारे संसार का उद्धार होगा।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
अब जगत को पता लग गया है कि ये इंसान बुरे नहीं थे, इन्हें बुरा बताया गया था। आज दुनिया ने हमें परख कर देख लिया है और आपकी इंसानियत देख ली है। जब आप सम्मान समारोहों में जाते थे, तो उन महान आत्माओं ने कहा कि ये वही इंसान हैं। छह-सात घंटे तक समारोह चले और आप लोग वहाँ खूब जाते थे, पर किसी ने छह घंटे तक बीड़ी तक नहीं सुलगाई।
आपके आचरण को देखकर ये कतई गदगद हैं और कहते हैं कि सारा संसार ऐसा ही होना चाहिए।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
ऐसा शिष्टाचार तो शायद फौज में भी न हो, जितना हमारे भक्तों में है। दुनिया ने देखा कि बिना कमांडर के सेना लड़ी; बिना कमांडर के फौज लड़ती देखी।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
कमांडर जेल में और सेना डंडा-ढूंढा उठाए प्रचार-प्रसार और आश्रम बनाने में लगी रही।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
हमारी लड़ाई अज्ञान से है, इंसान से नहीं। अज्ञान से और गलत परंपराओं से हमारी जंग है। जैसे यह दहेज है; दहेज वह कुप्रथा है जैसी पहले सती प्रथा थी। सती प्रथा में तो कोई-कोई मरा करती - यानी जब कोई विधवा हुई तो उसे साथ जला दिया करते - लेकिन इस दहेज प्रथा में तो पता नहीं कितनी बेटियाँ गर्भ में ही मार दी जाती हैं। जलाने की बात तो छोड़ो, यह उससे भी बुरा है।
तो बच्चों, आपने मेरा साथ दिया। मेरे बेटे-बेटियों, तुमने दास के दर्द को समझा और उसे सफल किया। तुमने सच्चाई को ठीक से जान लिया और कसम खा ली कि हम कभी भी दहेज-युक्त नहीं, बल्कि दहेज-मुक्त शादी करेंगे। युवा वर्ग से ही आगे चलकर सब बदलाव आता है।
दूसरी बात शराब और नशा है; मेरे बच्चे, छोटे-छोटे और जवान बच्चे कैसे छैल-छबीले बना दिए। आज दुनिया में आग लगी पड़ी है, इंसान खाली रह ही नहीं सकता; घर-घर में नशे चल रहे हैं। कोई बीड़ी पीता है तो कोई हुक्का, लेकिन नशा तो आत्मा का सबसे खतरनाक पाप बताया गया है। आज इसका प्रचलन आम हो रहा है, तो यह भी खत्म होगा।
तो दास को बड़ी खुशी है कि सभी आश्रमों में बड़े शांतिपूर्वक सत्संग हुए। बिल्कुल प्यार से, ओए होए! और भक्त ऐसे आए जैसे देवता घूम रहे हों। छोटे-छोटे बच्चों को देखो, ओए होए! कोई भागा फिर रहा है, कोई प्लेट उठा रहा है, कोई गिलास ला रहा है। किसी की ड्यूटी यहाँ है, किसी की वहाँ। कोई झाड़ू लगा रहा है बिना बताए। तो ये देवता आ रहे हैं, यह भगवान का वह स्टॉक है जो सतलोक में सुरक्षित रखा था, ये सारे अब आपके घरों में जन्म ले रहे हैं।
असंख्य जीव पार होंगे, परमात्मा ने ऐसा बोल रखा है। बच्चों, अपने धर्म-कर्म पर डटे रहना।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय
द्वार धनी के पड़ा रहे, धक्के धनी के खावे।
सौ काल झकझोर ही, पर द्वार छोड़ नहीं जावे॥
अब देखो, ये जो जगत के लोग हैं, ये तो एक ही बार में समझ गए। तुम्हें खुद को सुधारने और समझाने में तो शायद बहुत टाइम लग गया होगा, पर ये सीधे समझ गए कि भाई इंसान हैं तो ये हैं, और भक्ति है तो यह है। अब ये धीरे-धीरे परमात्मा की शरण लेंगे। देखो, हमने किसी से कुछ लेना नहीं है। इनको भी समझ में आ गया है कि हम लालची नहीं हैं। हम तो बस कल्याण के लिए बार-बार कहते हैं कि दीक्षा लो, क्योंकि बिना नाम के बात बनेगी नहीं।
संत गरीब दास जी कहते हैं:
बिन उपदेश अचंभ है, क्यों जीवित हैं प्राण।
भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नहीं पाषाण॥
मुझे आश्चर्य है कि जिन्होंने नाम नहीं ले रखा, वे किस आस पर जी रहे हैं? वे इंसान नहीं, पत्थर हैं जो भगवान के बिना रह रहे हैं।
आज सारे ठाठ हैं, चौधर है - कोई एमएलए है, कोई एमपी, मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री है। कोई सरपंच है, चेयरमैन है या बड़ा सेठ है। पर एक मिनट में मृत्यु हो जाए, तो फिर उसी गली में कुत्ता बनकर घूम रहा होगा। इन्हें यह कहानी पता ही नहीं है। लेकिन अब विश्वास होगा, क्योंकि दास कह रहा है और मैं कोई बहकाने वाला नहीं हूँ। कोई पैसे नहीं मांगता आपसे।
पहले ही नकली संतों ने जनता की मिट्टी पलीद कर रखी है। झाड़े लगा दिए, फूँक मार दी, कह दिया ‘भूत काट दिया’। बस इतने में ही लोग खुश हो गए। पर यहाँ तो “एक साधे सब सधे” वाला काम है। यहाँ भूत भी बिना निकाले भाग जाते हैं और मोक्ष तो घर में भरकर आता है। मौत टल जाती है और सारे सुख मिलने लगते हैं।
अब मेरा सारे विश्व के मानवों से निवेदन है - आँखें खोलो, समय थोड़ा है। एक पल में पता नहीं क्या हो जाएगा। आओ, हमसे दीक्षा लो और अपने परिवार का कल्याण करा लो। पता नहीं कब बिजली गिर जाए। भगवान की भक्ति इसलिए करते हैं ताकि आने वाली आपदाएं और संकट टल जाएं। मर्यादा में रहोगे तो अकाल मृत्यु नहीं होगी। ऐसे लाखों इतिहास दिखा दूंगा जहाँ बच्चों का एक्सीडेंट हुआ और भगवान ने उन्हें उठाकर सुरक्षित रख दिया - ओए होए होए! पूरे परिवार का पेट भर दिया। भक्ति इसलिए की जाती है ताकि संकट टलें, घर में बरकत हो और अंत में मोक्ष हो।
अब कुछ पत्रकार पूछते हैं कि भाई, हम देखते हैं कि आपके बच्चे और आपकी संगत, जिनके पास 20-30 या 50 लाख की गाड़ियां हैं, वे फॉर्चूनर और स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियों में जाकर गरीबों के मकान बनाने में मजदूरी करते हैं? मैंने बोला भाई, उनको यहाँ ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें समझ आ गया है कि लाठ साहब बनने से काम नहीं चलेगा, ‘दास’ बनना पड़ेगा।
हम यही चाहते हैं कि संसार समझ जाए। अपने लिए तो कुत्ते भी करते हैं, वे भी खोजकर खा लेते हैं। बाज और कौआ भी अपने बच्चों के लिए दूसरे के अंडे उठा लाते हैं। अगर आदमी भी सिर्फ अपने लिए ही करे, तो फिर कुत्ते, गधे और इंसान में क्या अंतर रह गया? दुनिया तो अपने लिए करती ही है, तुम परमार्थ करके देखो।
है काम आदमी का, औरों के काम आना।
जीना तो है उसी का, जिसने यह राज जाना॥
तुमने यह राज जान लिया है और इसे प्रैक्टिकल करके भी दिखा दिया है।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय