हमारी लड़ाई अज्ञानता के विरुद्ध है। हमारी जीत हुई है और जन-कल्याण ही हमारा परम कर्तव्य है।
बच्चों!
ये सब खेल हमारे किए।
हमसे मिले सो निश्चय जिए।
कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है और भाई, पूर्ण परमात्मा का मार्ग बिल्कुल सीधा है—
तन-मन-शीश ईश अपने पे,
तन-मन-शीश ईश अपने पे,
पहलम चोट चढ़ावे,
जब कोई राम भगत गति पावे होजी॥
तो बच्चों, बस इतना ही है। हमने तो उसी दिन सब कुछ परमात्मा को सौंप दिया था। जब शीश ही उन्हें अर्पण कर दिया, तो फिर भय कैसा? अब सारा संसार तुम्हारे साथ होगा और पूरी दुनिया तुम्हारी ओर देखेगी। हमने कभी किसी का अहित नहीं चाहा और न कभी चाहेंगे। अंतिम सांस तक सबका भला ही करेंगे, क्योंकि नेकी का परिणाम सदा नेक ही होता है।
आज हम एक लंबी लड़ाई जीतकर लौटे हैं।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज की जय!
मुझे प्रसन्नता है कि मेरे बच्चों में पहले से भी कहीं अधिक उत्साह और हर्ष है।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज की जय!
कहा गया है—
माता भक्त जने या दाता या शूर,
ना तो रह ले बांझड़ी क्यों व्यर्थ गंवावे नूर॥
तुम्हारी माताओं ने तुम्हें इन तीनों गुणों (भक्ति, दान और वीरता) के साथ जन्म दिया है।
बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज की जय!