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शरीर के कमलों की यथार्थ जानकारी

कबीर सागर में अध्याय ‘‘कबीर बानी‘‘ पृष्ठ 111 पर शरीर के कमलों की यथार्थ जानकारी है जो इस प्रकार हैः- 1) प्रथम मूल कमल है, देव गणेश है। चार पंखुड़ी का कमल है। 2) दूसरा स्वाद कमल है, देवता ब्रह्मा-सावित्राी हैं। छः पंखुड़ी का कमल है। 3) तीसरा नाभि कमल है, लक्ष्मी-विष्णु देवता हैं। आठ पंखुड़ी का कमल है। 4) चैथा हृदय कमल है, पार्वती-शिव देवता हैं। 12 पंखुड़ी का कमल है। 5) पाँचवां कंठ कमल है, अविद्या (दुर्गा) देवता है। 16

Jan 18, 2018

कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है

कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है।।टेक।। काम क्रोध मद लोभ बिसारो, शील सँतोष क्षमा सत धारो। मद मांस मिथ्या तजि डारो, हो ज्ञान घोडै असवार, भरम से न्यारा है।1। धोती नेती बस्ती पाओ, आसन पदम जुगतसे लाओ। कुम्भक कर रेचक करवाओ, पहिले मूल सुधार कारज हो सारा है।2। मूल कँवल दल चतूर बखानो, किलियम जाप लाल रंग मानो। देव गनेश तहँ रोपा थानो, रिद्धि सिद्धि चँवर ढुलारा है।3। स्वाद चक्र षटदल विस्तारो, ब्रह्म सावित्री रूप निहारो। उलटि

Jan 16, 2018

चार युगों का वर्णन

चार युग हैं। 1) सत्ययुग 2) त्रेतायुग 3) द्वापर युग 4) कलयुग। 1) सत्ययुग का वर्णन:- सत्ययुग की अवधि 17 लाख 28 हजार वर्ष है। मनुष्य की आयु प्रारम्भ में दस लाख वर्ष होती है। अन्त में एक लाख वर्ष होती है। मनुष्य की ऊँचाई 21 हाथ यानि लगभग 100 से 150 फुट होती है। {उस समय मनुष्य के हाथ (कोहनी से बड़ी ऊंगली के अंत तक) की लंबाई लगभग 5 फुट होती है।} मेरा नाम सत सुकृत होता है। {वर्तमान में कलयुग में मनुष्य के एक हाथ की लंबाई

Jan 4, 2018

Narcotic-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

One of the cardinal teachings of Jagat Guru Rampal Ji is renunciation of intoxicants which some other gurus also profess. The biggest difference however is that when one takes "naam" (initiation) from Jagat Guru Rampal Ji, they get the grace of Satguru Rampal Ji and the power of the true naam to adhere to it and thus get deaddicted straightaway.

Dec 25, 2017

क्या पाण्डव सदा स्वर्ग में ही रहेंगे?

धर्मदास जी ने कबीर परमेश्वर जी के चरण पकड़ कर अति विनम्र होकर आधीन भाव से प्रश्न किया। प्रश्नः- हे बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर जी! क्या पाण्डव अब सदा स्वर्ग में ही रहेगें? कबीर परमेश्वर जी का उत्तरः- नहीं धर्मदास! जो पुण्य युधिष्ठर ने उनको प्रदान किए हैं। उन पुण्यों का तथा स्वयं किए यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य जब स्वर्ग में समाप्त हो जाएगा तब सर्व पुनः नरक में डाले जाऐंगे। युद्ध में किए पाप कर्म तथा उस जीवन में

Dec 23, 2017

दास की परिभाषा

एक समय सुल्तान एक संत के आश्रम में गया। वहाँ कुछ दिन संत जी के विशेष आग्रह से रूका । संत का नाम हुकम दास था। बारह शिष्य उनके साथ आश्रम में रहते थे। सबके नाम के पीछे दास लगा था। फकीर दास, आनन्द दास, कर्म दास, धर्मदास। उनका व्यवहार दास वाला नहीं था। उनके गुरू एक को सेवा के लिए कहते तो वह कहता कि धर्मदास की बारी है, उसको कहो, धर्मदास कहता कि आनन्द दास का नम्बर है। उनका व्यवहार देखकर सुल्तानी ने कहा किः- दासा भाव नेड़ै

Dec 20, 2017

राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ

नल तथा नील को शरण में लेना त्रोतायुग में स्वयंभु कविर्देव(कबीर परमेश्वर) रूपान्तर करके मुनिन्द्र ऋषि के नाम से आए हुए थे। एक दिन अनल अर्थात् नल तथा अनील अर्थात् नील ने मुनिन्द्र साहेब का सत्संग सुना। दोनों भक्त आपस में मौसी के पुत्रा थे। माता-पिता का देहान्त हो चुका था। नल तथा नील दोनों शारीरिक व मानसिक रोग से अत्यधिक पीड़ित थे। सर्व ऋषियों व सन्तों से कष्ट निवारण की प्रार्थना कर चुके थे। सर्व ऋषियों व सन्तों ने

Dec 19, 2017

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