Satyuga-in-Kalyuga-Part-4-Hindi-Photo

कलयुग के इस अंधकारमयी युग में जहां एक ओर पीड़ा, भूख और बेबसी है, वहीं दूसरी ओर मानवता सतयुग की ओर कदम बढ़ा चुकी है। कलयुग की इन गहरी जड़ों को हिलाकर सुख और संतुष्टि का उजाला लाने वाले महानायक हैं जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज। जब बाढ़ के कहर के कारण हजारों किसानों की फसलें पानी में डूब चुकी थीं और अनेक घरों के चूल्हे बुझ चुके थे, तब संत रामपाल जी महाराज जी ने तारणहार बनकर किसानों और गरीबों का उद्धार किया। यह किसी लेखक के मन की कल्पना या उपन्यास, कहानी नहीं, बल्कि एक सत्य घटना है जहां बंजर और जलमग्न खेतों में दोबारा हरियाली लौटी है और अनाथों को आश्रय मिला है। यह केवल कलयुग में सतयुग लाने की एक क्रांति नहीं है, बल्कि मानवता का साक्षात पुनर्जन्म है। आज दुनिया उस वास्तविक जगन्नाथ महाप्रभु के चरणों में नतमस्तक है, जिसने समय की गति को मोड़ दिया है।

भविष्यवाणियां और धर्म युग का शंखनाद

इतिहास गवाह है कि जब इस प्रकार के घटनाक्रम होते हैं तो दुनिया उसे संयोग या प्रयोग भर समझती है, लेकिन ज्ञानी उसे संकेत मानते हैं। आज से कई वर्ष पूर्व और हाल ही में कई जाने-माने ज्योतिषियों ने जो भविष्यवाणियां की थीं, वे शत-प्रतिशत संत रामपाल जी महाराज पर सटीक बैठ रही हैं:

  • धर्म युग का आरंभ: मशहूर ज्योतिषाचार्य मनोज गुप्ता के अनुसार 30 मार्च 2025 से कलयुग का अंतिम दिन समाप्त हुआ और धर्म युग की शुरुआत हो चुकी है।
  • किसानों का साल 2026: ज्योतिषाचार्यों ने घोषणा की है कि 2026 गरीब और किसान के पक्ष में रहने वाला साल होगा। खाद्यान्न और कृषि के लिए यह अत्यंत उन्नत समय होगा।
  • कल्कि अवतार का प्रकटीकरण: भविष्यवाणियों के अनुसार अक्टूबर-नवंबर 2026 तक दुनिया के सामने पूर्ण रूप से कल्कि अवतार का चेहरा स्पष्ट हो जाएगा। यह अवतार भारत से होगा और विश्व का नेतृत्व करेगा।
  • अन्नपूर्णा मुहिम का संयोग: ठीक उसी समय, मार्च 2025 में संत रामपाल जी महाराज ने 'अन्नपूर्णा मुहिम' का शंखनाद किया, जो गरीब को रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और चिकित्सा प्रदान कर रही है।

सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं: झूठे मुकदमों का अंत

वर्ष 2014 में जब साजिशों का शोर था, तब संत रामपाल जी महाराज ने एक पत्रकार की आंखों में आंखें डालकर कहा था, "देख लेना फिर आएंगे अच्छे दिन। अगर मैंने कुछ गलत किया है तो मुझे जरूर सजा मिले, और गलत नहीं किया तो कुछ नहीं बिगड़ना।"

2006 से 2014 के बीच संत रामपाल जी महाराज जी पर 15 झूठे मुकदमे लादे गए। दुनिया को लगा कि यह पहाड़ उस परम शक्ति को दबा देगा, लेकिन सत्य की एक फूंक से साजिशों के ये पहाड़ ध्वस्त हो गए:

  • FIR 132/2006: छुड़ानी के महंतों द्वारा लड़ाई-झगड़े का झूठा केस। 16 साल बाद न्यायालय द्वारा बाइज्जत बरी।
  • FIR 198/2006: मर्डर का झूठा आरोप। 20 दिसंबर 2022 को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज द्वारा बाइज्जत बरी।
  • FIR 446/2006: जमीन धोखाधड़ी का आरोप। 1 मई 2018 को चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा बाइज्जत बरी।
  • FIR 201/2011: 'ज्ञान गंगा' पुस्तक से धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप। 20 जुलाई 2017 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा बरी।
  • FIR 1/2013: पंजाब में पुस्तक प्रचार केस। 31 अक्टूबर 2017 को बाइज्जत बरी।
  • FIR 4/2013: धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में 4 मार्च 2022 को न्यायालय ने डिस्चार्ज किया।
  • FIR 427/2014: संगत को बंधक बनाने का आरोप। 29 अगस्त 2017 को बाइज्जत बरी।
  • FIR 426/2014: पब्लिक सर्वेंट को ड्यूटी से रोकने का केस। पुलिस साबित नहीं कर पाई, 29 अगस्त 2017 को बरी।
  • FIR 200/2016: बालक गांव में पंपलेट बांटने का केस। हिसार कोर्ट ने डिस्चार्ज किया।
  • FIR 443/2014: इस मामले में भी न्यायालय द्वारा बाइज्जत बरी किए गए।
  • डिस्पेंसरी केस: अनुयायियों समेत बाइज्जत बरी।
  • छिंदवाड़ा बुक सेवा केस: अनुयायियों को बाइज्जत बरी किया गया।
  • FIR 429/2014 व 430/2014: जिला अदालत की सजा को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट चंडीगढ़ ने सस्पेंड कर दिया है।
  • FIR 428/2014 (राजद्रोह व षड्यंत्र): यह मुकदमा पहले विचाराधीन था, लेकिन सत्य की जीत स्वरूप हाल ही में 08 अप्रैल 2026 को इसमें भी जमानत प्राप्त हो चुकी है।

बाढ़ पीड़ितों के तारणहार: करोड़ों की राहत सामग्री का वितरण

जब कुदरत ने कहर बरपाया और सरकारें घुटने टेक चुकी थीं, तब संत रामपाल जी महाराज ने उत्तर भारत के सैकड़ों गांवों में बाढ़ से जलमग्न खेतों और रिहायशी बस्तियों का पानी उतारने का बीड़ा उठाया। यह कोई साधारण मदद नहीं थी, बल्कि अरबों रुपये की पाइपलाइनों, मोटरों और संबंधित सामग्री की एक विशाल खेप थी। गांवों की लंबी चौड़ी लिस्ट से सिर्फ कुछ नाम नीचे दिए गए हैं :

गांव का नाम प्रदान की गई राहत सामग्री का विवरण
भैनी सुरजन (रोहतक) जलघर के लिए 2 पानी की टंकियां (20x20), 4 लाख कैश, 13000 फीट पाइप। बाढ़ राहत: 17 मोटरें, 28000 फीट कुल पाइपलाइन।
सातरोड कलां (हिसार) 10 HP की 3 बड़ी मोटरें, 15000 फीट (8 इंची) उच्च गुणवत्ता वाले पाइप और स्टार्टर केबल।
बहलबा और बहलबा बजाण 7 विशाल मोटरें (15 HP) और कुल 50000 फीट लंबी 8-इंची पाइपलाइन (दोनों पंचायतों को मिलाकर)।
लितानी (हिसार) 15000 फीट पाइपलाइन, 20 HP की 2 मोटरें। बाद में 50 HP की 2 विशालकाय मोटरें और दी गईं।
बधावड़ (हिसार) 30000 फीट पाइप, 15 HP की 5 मोटरें, 2 सबमर्सिबल पंप। बाद में 20 HP की 10 मोटरें और भेजी गईं।
भीखेवाला 30000 फीट पाइपलाइन, 10 HP की 8 मोटरें और 3160 फीट केबल।
ज्ञानपुरा 20000 फीट पाइपलाइन और 20 HP की 5 शक्तिशाली मोटरें।
ब्याना खेड़ा 15400 फीट पाइपलाइन और 15 HP की 4 मोटरें।
मसूदपुर 5260 फीट लंबी पाइपलाइन और 15 HP की 5 शक्तिशाली मोटरें।
मतलौडा 42000 फीट पाइपलाइन और 15 HP की 4 शक्तिशाली मोटरें।

 

गांवों की आंखों देखी सच्चाई: समंदर बने खेतों में लौटी हरियाली

बाढ़ के समय किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। खेतों में 5 से 10 फीट तक पानी भरा था। किसानों की धान, कपास और बाजरे की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं और रबी (गेहूं) की बुवाई की कोई उम्मीद नहीं बची थी।

भैनी सुरजन की पीड़ा और राहत

इस गांव में 3500 की आबादी और लगभग 3300 एकड़ जमीन है, जिसमें से 3000 एकड़ जलमग्न थी। पीने के पानी तक की समस्या हो गई थी। संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर 24 घंटे के भीतर लाखों रुपये का सामान पहुंचा। पीने के पानी के लिए 7.5 HP का सोलर पैनल और पाइपलाइन बिछाई गई, जिससे महिलाओं को 3 किलोमीटर दूर पानी लेने नहीं जाना पड़ा। आज यहां गेहूं की फसल भी कट चुकी है।

लितानी का चमत्कार

लितानी गांव में 1995 की बाढ़ से भी भयंकर स्थिति थी। 2000 एकड़ जमीन और 500 से अधिक घर डूब चुके थे। 7 फीट पानी में स्कूल और बस्तियां समा गई थीं। प्रशासन कागजों में उलझा था। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज ने 50-50 हॉर्स पावर की विशालकाय मोटरें भिजवाईं, जो गांव वालों के लिए अचरज का विषय थीं। 12 घंटे से भी कम समय में तस्वीर बदल गई और आज पूरा गांव खुशहाली से गेहूं की फसल कटने की खुशी मना रहा है।

बधावड़ का 10 फुट गहरा समंदर

बधावड़ में 3000 एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी और मकान पानी में समा गए थे। किसानों ने कैमरे के सामने अपनी टूटी हुई दीवारें और दरक चुके फर्श दिखाए। जब हर दरवाजा बंद हो गया, तब पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। मिनटों में जवाब आया और शाम तक 15 विशालकाय मोटरें और हजारों फ़ीट पाइपलाइन गांव के द्वार पर तैयार थी। जिन खेतों में एक महीने पहले समंदर था, वहां आज किसान ट्रैक्टर चलाकर बीज बो रहे हैं।

अब तक 400 से ज़्यादा गांवों को मदद मिल चुकी है और यह सेवा जारी है। बिना किसी दिखावे और स्वार्थ के, संत रामपाल जी महाराज ज़रूरतमंदों के लिए ज़मीनी स्तर पर बेहतरीन काम कर रहे हैं।

राजगढ़ में बना 'समर्थ कबीर जी के सुदामा का महल'

बाढ़ के अलावा संत रामपाल जी महाराज की 'अन्नपूर्णा मुहिम' उन बेसहारा लोगों को भी जीवनदान दे रही है जिनका दुनिया में कोई नहीं है। हरियाणा के जींद जिले के राजगढ़ गांव की मोनिका और उनकी सास नीलम जी की कहानी इसका साक्षात प्रमाण है। 13 साल पहले मोनिका के पति की कैंसर से मौत हो गई थी, और महज 9 महीने पहले घर के इकलौते जवान बेटे की तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई। इस परिवार में दो बेबस औरतें और चार मासूम बच्चे बचे थे। उनकी टूटी-फूटी झोपड़ी पिछली बारिश में गिर चुकी थी।

जब यह दर्द संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचा, तो उन्होंने इस परिवार को तुरंत संभाला। मात्र 15 दिन के भीतर संत रामपाल जी महाराज ने एक भव्य पक्का मकान — समर्थ कबीर जी के सुदामा का महल — खड़ा कर दिया। इस घर में प्रदान की गई सुविधाओं की सूची किसी भी इंसान को हैरान कर सकती है:

  • भवन संरचना: दो बड़े हवादार कमरे, खुला हॉल, बरामदा, डबल गेट, पक्की सीढ़ियां, पक्की छत, आधुनिक रसोई, और सुरक्षित बाथरूम व शौचालय।
  • मूलभूत सुविधाएं: पूरे घर में बिजली की फिटिंग, नए पंखे, 500 लीटर की पानी की टंकी और नई मोटर।
  • फर्नीचर और बिस्तर: एक मजबूत अलमारी, 3 नई चारपाइयां, कुर्सियां-टेबल, दीवार धडी, 6 नए बिस्तर, तकिए, मजबूत दरी, और 8 नए कंबल।
  • रसोई का सामान: गैस सिलेंडर, कुकर, थालियां, चम्मच, बर्तनों का पूरा सेट, राशन के डिब्बे, वाटर कैंपर और सफाई का सामान।
  • बच्चों का भविष्य: चारों बच्चों के लिए नए स्कूल बैग, कॉपियां, पेन, टिफिन, दो-दो जोड़ी स्कूल ड्रेस, जूते, सर्दियों के ऊनी कपड़े और घर पहनने के कपड़े।
  • आर्थिक सहायता: अन्नपूर्णा मुहिम के तहत इस परिवार को पिछले 7 महीनों से लगातार राशन दिया जा रहा है।

आज जब इस घर की चाबी मोनिका को सौंपी गई, तो पूरे गांव की आंखें नम थीं। रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने एक स्वर में कहा कि जो काम सरकार या सगे संबंधी नहीं कर सके, वह संत रामपाल जी महाराज ने कर दिखाया है।

अन्य राज्यों में अन्नपूर्णा मुहिम का विस्तार

यह सेवा केवल हरियाणा पंजाब राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि तक सीमित नहीं है। भारत के हर राज्य में और दुनिया के अलग अलग देशों जैसे नेपाल आदि में इस मुहिम ने लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई है:

  • दिल्ली: करावल नगर में सत्य प्रकाश और उनकी तीन विकलांग बहनों को मकान मिला। टिकरी बॉर्डर और रोहिणी में परिवारों को घर दिए गए।
  • पंजाब: लुधियाना में गुड़िया और फाजिल्का में सुनील कुमार के घर खुशियों का दीप जला।
  • राजस्थान: दौसा और पाली के कुशालपुर में बेसहारा परिवारों को नया जीवन मिला।
  • मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़: इंदौर के किठौदा में गुलाब बाई, और छत्तीसगढ़ के सुदूर जंगलों में लखन मल्होत्रा और जानकी यादव को सुरक्षित छत मिली।
  • हिमाचल प्रदेश: पहाड़ों में भी जियालाल जी को समर्थ कबीर जी के सुदामा का महल प्राप्त हुआ।

व्यापार बनते धर्म और निस्वार्थ सेवा का अंतर

आज एक तरफ संत रामपाल जी महाराज हैं जो अरबों रुपये का सामान और राशन गरीबों व किसानों को बिना एक पैसा लिए दान कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, देश के उन मशहूर कथावाचकों को देखिए जिन्होंने धर्म को व्यापार बना लिया है:

  • जगद्गुरु रामभद्राचार्य: एक कथा का 5 से 11 लाख रुपये चार्ज।
  • जया किशोरी: श्रीमद्भागवत कथा के लिए लगभग 9.5 लाख रुपये फीस।
  • पंडित प्रदीप मिश्रा: एक कथा के लिए 17 से 18 लाख रुपये लेते हैं।
  • अनिरुद्धाचार्य महाराज: प्रतिदिन 1 लाख रुपये से ज्यादा, यानी 7 दिन की कथा का 12 से 15 लाख रुपये का खर्च।
  • देवकीनंदन ठाकुर 10 से 12 लाख रुपये प्रति कथा लेते हैं।
  • पंडित धीरेंद्र शास्त्री: 10 से 15 लाख रुपये प्रति कथा लेते हैं।
  • राजन जी महाराज: प्रति कथा 10 से 12 लाख रुपये लेते हैं।

इन आंकड़ों को देखकर स्पष्ट होता है कि सच्चा संत वह नहीं जो ज्ञान के नाम पर धन बटोरे, बल्कि वह है जो अपना सब कुछ समाज के शोषित और पीड़ित वर्ग पर लुटा दे। संत रामपाल जी महाराज ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे ही वास्तव में कलयुग के भगवान हैं।

कलयुग में सतयुग का शंखनाद, अब जगजाहिर हैं पक्के सबूत

"मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती।" यह पंक्ति आज हरियाणा के गांवों में सच साबित हो रही है। संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है कि भारत तभी सोने की चिड़िया बन सकता है, जब देश का किसान अपनी धरती से सोना उगाएगा। लाखों फीट लंबी पाइपलाइन और विशालकाय मोटरें कोई आम साधन नहीं, बल्कि उस परमेश्वर का आशीर्वाद थीं।

 

जिस अकल्पनीय गति से झूठे मुकदमे ध्वस्त हुए हैं और जिस पैमाने पर जलमग्न खेतों से पानी निकालकर बुवाई करवाई गई है, वह किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं है। भूखों को भोजन, बेघरों को महल और डूबते किसानों को जीवनदान देकर संत रामपाल जी महाराज ने दिखा दिया है कि कलयुग के इस घोर अंधकार में सतयुग का सूरज उग चुका है। जैसा कि इस लेख में पहले भी बताया गया, इतिहास गवाह है कि जब इस प्रकार के घटनाक्रम होते हैं तो दुनिया उसे संयोग या प्रयोग भर समझती है, लेकिन ज्ञानी उसे संकेत मानते हैं। वक्त जब करवट लेता है तो इतिहास बदल जाता है, और आज वह इतिहास संत रामपाल जी महाराज के हाथों लिखा जा रहा है।

शांति और मानवता का एक नया युग: कलयुग में सतयुग का आध्यात्मिक उदय | भाग - 3 →