1. इंग्लैण्ड के ज्योतिषी ‘कीरो’ ने सन् 1925 में लिखी पुस्तक में भविष्यवाणी की है, बीसवीं सदी अर्थात् सन् 2000 ई. के उत्तरार्द्ध में (सन् 1950 के पश्चात् उत्पन्न सन्त) ही विश्व में ‘एक नई सभ्यता’ लाएगा जो सम्पूर्ण विश्व में फैल जावेगी। भारत का वह एक व्यक्ति सारे संसार में ज्ञानक्रांति ला देगा।
2. भविष्यवक्ता ‘‘श्री वेजीलेटिन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में, विश्व में आपसी प्रेम का अभाव, मानवता का Ðास, माया संग्रह की दौड़, लूट व राज नेताओं का अन्यायी हो जाना आदि-2 बहुत से उत्पात देखने को मिलेगें। परन्तु भारत से उत्पन्न हुई शांति भ्रातृत्व भाव पर आधारित नई सभ्यता, संसार में-देश, प्रांत और जाति की सीमायें तोड़कर विश्वभर में अमन व चैन उत्पन्न करेगी।
3. अमेरिका की महिला भविष्यवक्ता ‘‘जीन डिक्सन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अंत से पहले विश्व में एक घोर हाहाकार तथा मानवता का संहार होगा। वैचारिक युद्ध के बाद आध्यात्मिकता पर आधारित एक नई सभ्यता सम्भवतः भारत के ग्रामीण परिवार के व्यक्ति के नेतृत्व में जमेगी और संसार से युद्ध को सदा-सदा के लिए विदा कर देगी।
4. अमेरिका के ‘‘श्री एण्डरसन’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21वीं सदी के प्रथम दशक में विश्व में असभ्यता का नंगा तांडव होगा। इस बीच भारत के एक देहात का एक धार्मिक व्यक्ति, एक मानव, एक भाषा और झण्डा की रूपरेखा का संविधान बनाकर संसार को सदाचार, उदारता, मानवीय सेवा व प्यार का सबक देगा। यह मसीहा सन् 1999 तक विश्व में आगे आने वाले हजारों वर्षों के लिए धर्म व सुख-शांति भर देगा।
5. हॉलैण्ड के भविष्यदृष्टा ‘‘श्री गेरार्ड क्राइसे’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले या 21 वीं सदी के प्रथम दशक में भयंकर युद्ध के कारण कई देशों का अस्तित्व ही मिट जावेगा। परन्तु भारत का एक महापुरूष सम्पूर्ण विश्व को मानवता के एक सूत्र में बांध देगा व हिंसा, फूट-दुराचार, कपट आदि संसार से सदा के लिए मिटा देगा।
6. अमेरिका के भविष्वक्ता ‘‘श्री चाल्र्स क्लार्क’’ के अनुसार 20 वीं सदी के अन्त से पहले एक देश विज्ञान की उन्नति में सब देशों को पछाड़ देगा परन्तु भारत की प्रतिष्ठा विशेषकर इसके धर्म और दर्शन से होगी, जिसे पूरा विश्व अपना लेगा, यह धार्मिक क्रांति 21 वीं सदी के प्रथम दशक में सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करेगी और मानव को आध्यात्मिकता पर विवश कर देगी।
7. हंगरी की महिला ज्योतिषी ‘‘बोरिस्का’’ के अनुसार सन् 2000 ई. से पहले-पहले उग्र परिस्थितियों हत्या और लूटमार के बीच ही मानवीय सद्गुणों का विकास एक भारतीय फरिश्ते के द्वारा भौतिकवाद से सफल संघर्ष के फलस्वरूप
होगा, जो चिरस्थाई रहेगा, इस आध्यात्मिक व्यक्ति के बड़ी संख्या में छोटे-छोटे लोग ही अनुयायी बनकर भौतिकवाद को आध्यात्मिकता में बदल देगें।
8. फ्रांस के डाॅ. जूलर्वन के अनुसार सन् 1990 के बाद योरोपीय देश भारत की धार्मिक सभ्यता की ओर तेजी से झूकेंगे। सन् 2000 तक विश्व की आबादी 640 करोड़ के आस-पास होगी। भारत से उठी ज्ञान की धार्मिक क्रांति नास्तिकता का
नाश करके आँधी तूफान की तरह सम्पूर्ण विश्व को ढक लेगी। उस भारतीय महान आध्यात्मिक व्यक्ति के अनुयाई देखते-देखते एक संस्था के रूप में ‘आत्मशक्ति’ से सम्पूर्ण विश्व पर प्रभाव जमा लेंगे।
9. फ्रांस के ‘‘नास्त्रोदमस’’ के अनुसार विश्व भर में सैनिक क्रांतियों के बाद थोड़े से ही अच्छे लोग संसार को अच्छा बनाऐंगे। जिनका महान् धर्मनिष्ठ विश्वविख्यात नेता 20 वीं सदी के अन्त और 21 वीं सदी की शुरूआत में किसी पूर्वी देश से जन्म लेकर भ्रातृवृत्ति व सौजन्यता द्वारा सारे विश्व को एकता के सूत्र में बांध देगा। (नास्त्रोदमस शतक 1 श्लोक 50 में प्रमाणित कर रहा है) तीन ओर से सागर से घिरे द्वीप में उस महान संत का जन्म होगा। उस समय तत्व ज्ञान के अभाव से अज्ञान अंधेरा होगा। नैतिकता का पतन होकर, हाहाकार मचा होगा। वह शायरन (धार्मिक नेता) गुरुवर अर्थात् गुरुजी को वर (श्रेष्ठ) मान कर अपनी साधना करेगा तथा करवाएगा। वह धार्मिक नेता (तत्वदर्शी सन्त) अपने धर्म बल अर्थात् भक्ति की शक्ति से तथा तत्वज्ञान द्वारा सर्व राष्ट्रों को नतमस्तक करेगा। एशिया में उसे रोकना अर्थात् उस के प्रचार में बाधा करना पागलपन होगा। (शतक 1 श्लोक 50) (सेंचुरी-प्ए कन्ना-50)
10. इजरायल के प्रो. हरार के अनुसार भारत देश का एक दिव्य महापुरूष मानवतावादी विचारों से सन् 2000 ई. से पहले-पहले आध्यात्मिक क्रांति की जड़े मजबूत कर लेगा व सारे विश्व को उनके विचार सुनने को बाध्य होना पड़ेगा। भारत के अधिकतर राज्यों में राष्ट्रपति शासन होगा, पर बाद में नेतृत्व धर्मनिष्ठ वीर लोगों पर होगा। जो एक धार्मिक संगठन के आश्रित होगें।
11. नार्वे के श्री आनन्दाचार्य की भविष्यवाणी के अनुसार, सन् 1998 के बाद एक शक्तिशाली धार्मिक संस्था भारत में प्रकाश में आवेगी, जिसके स्वामी एक गृहस्थ व्यक्ति की आचार संहिता का पालन सम्पूर्ण विश्व करेगा। धीरे-धीरे भारत औद्योगिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से विश्व का नेतृत्व करेगा और उसका विज्ञान (आध्यात्मिक तत्वज्ञान) ही पूरे विश्व को मान्य होगा। उपरोक्त भविष्यवाणियों के अनुसार ही आज विश्व में घटनाएँ घट रही हैं। युग परिवर्तन प्रकृति का अटल सिद्धांत है। वैदिक दर्शन के अनुसार चार युगों- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग की व्यवस्था है। जब पृथ्वी पर पापियों का एक छत्रा साम्राज्य हो जाता है तब भगवान पृथ्वी पर मानव रूप में प्रकट होता है।
मानवता के इस पूर्ण विकास का काम अनादि काल से भारत ही करता आया है। इसी पुण्यभूमि पर अवतारों का अवतरण अनादि काल से होता आ रहा है।
लेकिन कैसी विडम्बना है कि ऋषि-मुनियों महापुरूषों व अवतारों के जीवन काल में उस समय के शासन व्यवस्था व जनता ने उनकी दिव्य बातों व आदर्शों पर ध्यान नहीं दिया और उनके अन्तर्ध्यान होने पर दूगने उत्साह से उनकी पूजा शुरू कर पूजने लग गये। यह भी एक विडम्बना कि हम जीवंत और समय रहते उनकी नहीं मानते अपितु उनका विरोध व अपमान ही करते रहे हैं। कुछ स्वार्थी तत्व जनता को भ्रमित करके परम सन्त को बदनाम करके बाधक बनते हैं। यह उक्ति हर युग में चरितार्थ होती आई है, और आज भी हो रही है।
जो महापुरूष हजारों कष्टों को सहन कर अपनी तपस्या व सत्य पर अडिग रहता है उनकी बात असत्य नहीं हो सकती। सत्य पर अडिग रहते हुए ईसा मसीह ने अपने शरीर में कीलों की भयंकर पीड़ा को झेला, सुकरात ने जहर का प्याला पिया, श्री राम तथा श्री कृष्ण जी को भी यातनाओं का शिकार होना पड़ा।
ईसा मसीह ने कहा था कि- ‘‘पृथ्वी और आकाश टल सकते हैं, सूर्य का अटल सिद्धांत है उदय-अस्त, वो भी निरस्त हो सकता है, लेकिन मेरी बातें कभी झूठी नहीं हो सकती है।’’
सज्जनों ! यदि आज के करोड़ों मानव उस परमतत्व के ज्ञाता सन्त को ढूंढकर, स्वीकार कर, उनके बताए पथानुसार, अपनी जीवन शैली को सुधार लेंगे तो पूरे विश्व में सद्भावना, आपसी भाई-चारा, दया तथा सद्भक्ति का वातावर्ण हो जाएगा। वर्तमान का मानव बुद्धिजीवी है इसलिए उस सन्त के विचारों को अवश्य स्वीकार करेगा तथा धन्य होगा। वह सन्त है जगत् गुरु तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज। कृप्या पढ़ें सन्त रामपाल जी महाराज की संक्षिप्त जीवनी जो सर्व भविष्यवाणियों पर खरी उतर रही है।
कबीर सागर की भविष्यवाणी स्पष्ट रूप से कलयुग की एक विशिष्ट अवधि बीत जाने के बाद एक महापुरुष (परमात्मा के एक अंश) के आगमन का उल्लेख करती है। यह विशिष्ट पृष्ठ संख्याओं और छंदों (वाणियों) के साथ प्रमाणित है।
शास्त्र प्रमाण:
ग्रंथ: कबीर सागर (अध्याय: स्वसंवेद बोध और कबीर वाणी)
पृष्ठ संदर्भ: पृष्ठ 121, पृष्ठ 171 और पृष्ठ 137।
भविष्यवाणी के छंद (वाणी):
कबीर सागर में कहा गया है:
"चौथा युग जब कलियुग आई, तब हम अपना अंश पठाई।
काल फंद छूटे नर लोई, सकल सृष्टि परवानिक होई।
घर-घर देखो बोध विचारा, सत्यनाम सब ठौर उचारा।
पचपन सौ पांचा (5505), तब यह वचन मेरा होगा सांचा।
कलियुग बीत जाए जब एता, सब जीव परम पुरुष पद चेता।"
अनुवाद:
जब चौथा युग, यानी कलयुग आएगा,
तब मैं अपने अंश (प्रतिनिधि) को भेजूंगा।
मनुष्य काल के जाल से मुक्त होंगे,
पूरी सृष्टि मेरे अंश (भेजे हुए संत) से नाम दीक्षा लेगी।
देखो, घर-घर में आध्यात्मिक ज्ञान की चर्चा होगी,
हर जगह 'सत्यनाम' का उच्चारण किया जाएगा।
पाँच हजार पाँच सौ पाँच (5505 वर्ष),
तब मेरा यह वचन सत्य सिद्ध होगा।
जब कलयुग का इतना समय बीत जाएगा,
तब सभी जीव परमात्मा (परम पुरुष) के धाम/पद के प्रति सचेत हो जाएंगे।
विशिष्ट समय सीमा (5505 वर्ष):
सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण उस छंद में निहित है जो इस आगमन के सटीक वर्ष को परिभाषित करता है:
(अर्थात: जब कलयुग के 5,505 वर्ष बीत जाएंगे, तब मेरा यह वचन सत्य होगा।)
"कलियुग बीत जाए जब एता, सब जीव परम पुरुष पद चेता।"
(अर्थात: जब कलयुग का इतना समय बीत जाएगा, तब सभी आत्माएं परमात्मा के प्रति जागरूक हो जाएंगी।)
कलयुग की आयु के संबंध में ऐतिहासिक और गणितीय गणनाएं यह संकेत देती हैं कि 5,505 वर्ष सन 1997 में पूरे हो चुके हैं। यह वही समय है जब संत रामपाल जी महाराज को स्वयं परमात्मा मिले थे और सारनाम प्रदान करने का आदेश दिया था, जिससे यह भविष्यवाणी पूर्ण होती है कि इस विशिष्ट समय सीमा के पार होते ही मुक्तिदाता का उदय होगा।
डॉ. देव, युगों की अवधि पर ग्रहणों (eclipses) के प्रभाव के आधार पर एक गणितीय और खगोलीय प्रमाण प्रदान करते हैं, जो शास्त्रों में उल्लिखित "5,500 वर्ष" की समय सीमा की पुष्टि करता है।
डॉ. देव कलयुग में घटित होने वाले कुल ग्रहणों की संख्या और समय पर उनके प्रभाव के संबंध में कबीर साहेब की वाणी का संदर्भ देते हैं।
कुल ग्रहण: कलयुग के लिए कुल 3,412 सूर्य और चंद्र ग्रहण निर्धारित हैं।
एक ग्रहण का प्रभाव: प्रत्येक ग्रहण युग की आयु को 125 वर्ष कम कर देता है।
गणना:
3,412 (ग्रहण) × 125 (वर्ष) = 426,500 वर्ष।
कलयुग की कुल मानक अवधि 432,000 वर्ष है। जब कम हुए वर्षों को घटाया जाता है (432,000 - 426,500), तो शेष सक्रिय अवधि 5,500 वर्ष बचती है।
यह वैज्ञानिक गणना शास्त्र के कथन: "5500 पांचा" (जब 5500 वर्ष बीत जाएं) के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। डॉ. देव निष्कर्ष निकालते हैं कि वह समय आ गया है, और कल्कि अवतार पहले से ही उपस्थित हैं।
कल्कि अवतार की व्याख्या:
डॉ. देव अवतार के प्रतीकात्मक वर्णन को स्पष्ट करते हैं:
तलवार: यह कोई भौतिक हथियार नहीं है, बल्कि यह ज्ञान की तलवार और सच्चे आध्यात्मिक ग्रंथ (स्वसंवेद) का प्रतीक है।
घोड़ा: यह धर्म या चार वेदों (घोड़े के चार पैरों द्वारा प्रतीकात्मक) का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका अर्थ है कि अवतार आत्माओं को जगाने के लिए शास्त्र सम्मत ज्ञान का प्रयोग करेगा।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. मनोज कुमार गुप्ता युग परिवर्तन और अवतार की पहचान के संबंध में विशिष्ट तिथियां और विशेषताएं बताते हैं।
"धर्म युग" का आरंभ:
डॉ. गुप्ता घोषणा करते हैं कि संक्रमण (बदलाव) पहले ही हो चुका है।
विशिष्ट तिथि: 30 मार्च 2025, कलयुग के अंधकारमय चरण का अंतिम दिन था।
वर्तमान स्थिति: वैज्ञानिक और ज्योतिषीय रूप से "धर्म युग" शुरू हो चुका है। इस तिथि के बाद से, विश्व स्तर पर तेजी से बदलाव होंगे, और अधर्म अब खुद को बनाए रखने में सक्षम नहीं होगा।
पहचान का प्रमाण (वेशभूषा नहीं, कर्म):
डॉ. गुप्ता का कहना है कि दुनिया अवतार (कल्कि) को पारंपरिक वेशभूषा जैसे मुकुट, धोती या भौतिक सफेद घोड़े से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और समाधानों से पहचानेगी।
साधारण वेशभूषा: अवतार हमारे बीच एक साधारण इंसान के रूप में रह रहे हैं।
अद्वितीय समाधान: उनके पास दुनिया की समस्याओं का ऐसा समाधान है जो पृथ्वी पर किसी अन्य मनुष्य के पास नहीं है। वैश्विक संकटों को हल करने का उनका दृष्टिकोण और तरीका अद्वितीय है।
मान्यता: जिस प्रकार भगवान राम और भगवान कृष्ण को उनके अपने-अपने युगों में केवल उनकी उपस्थिति के बजाय उनके कर्मों से पहचाना गया था, वैसे ही वर्तमान अवतार की पहचान धर्म की स्थापना के लिए उनके कार्यों से होगी।
सम्बन्ध: यह भविष्यवाणी सीधे तौर पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा शुरू किए गए विशाल सामाजिक सुधार और "अन्नपूर्णा मुहिम" (रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान। हर गरीब को देगा कबीर भगवान।।) की ओर इशारा करती है, जो 21 मार्च 2025 से शुरू हुई (मार्च 2025 की अनुमानित समय सीमा के आसपास बड़े पैमाने पर बढ़ी)।
भविष्यवाणी: डॉ. गुप्ता का कहना है कि 2026 वह वर्ष होगा जब दुनिया आखिरकार कल्कि अवतार को पहचानेगी। दुनिया के सामने कल्कि का परिचय 2026 में होगा। यह निश्चित है। 2025 की नवरात्रि (सितंबर के आसपास शुरू) और 2026 की नवरात्रि के बीच एक बड़ा बदलाव आएगा। इस अवधि में दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन देखेगी, जिससे पुरानी व्यवस्थाएं ढह जाएंगी और एक नए "धर्म युग" की स्थापना होगी।
विशिष्ट समय: उन्होंने उल्लेख किया कि अक्टूबर-नवंबर 2026 तक, वह चेहरा/व्यक्तित्व जो भारत और दुनिया का नेतृत्व करेगा, सभी के सामने स्पष्ट रूप से प्रकट हो जाएगा।
"विनाश" के साथ "सृजन": उनका कहना है कि जहाँ विनाश होगा, वहीं कल्कि अवतार के नेतृत्व में एक नया सृजन (निर्माण) भी होगा, जो भारत से उदय होगा।
अवतार की प्रकृति: वे स्पष्ट करते हैं कि कल्कि अवतार पिछले अवतारों (जैसे राम या कृष्ण) से भिन्न हैं क्योंकि आज की समस्या वैश्विक है (मानव मन पर कलयुग का प्रभाव), न कि केवल स्थानीय या पारिवारिक। इसलिए, समाधान और अवतार का कार्य भी वैश्विक होगा।
पहचान: अवतार पारंपरिक संकेतों से नहीं, बल्कि विश्व की समस्याओं के उनके अद्वितीय समाधान और उनके ज्ञान से पहचाने जाएंगे, जिसका मुकाबला कोई और नहीं कर सकता।
डॉ. गुप्ता 8 सितंबर, 2025 से शुरू होने वाले एक दुर्लभ ग्रह संयोग की ओर इशारा करते हैं, जिसमें 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण और "पंचक" के भीतर सोमवार को श्राद्ध पक्ष की शुरुआत शामिल है। उनका दावा है कि यह एक भारी बदलाव का संकेत है।
सम्बन्ध: संत रामपाल जी महाराज का जन्मदिन (8 सितंबर, 1951) यह सुझाव देता है कि यह ग्रह संयोग एक दैवीय संकेत है जो उनकी ओर इशारा कर रहा है।
भविष्यवाणी: अवतार (कल्कि) भारत से उदय होगा, और भारत अर्थव्यवस्था या जनसंख्या के माध्यम से नहीं, बल्कि इस अवतार के आध्यात्मिक नेतृत्व के माध्यम से "विश्व गुरु" बनेगा। (कल्कि भारत से उदय होंगे... और जब सनातन सत्य का उदय होगा, तो पूरी दुनिया सनातनमय हो जाएगी।)
संत रामपाल जी से सम्बन्ध: ये भविष्यवाणियाँ संत रामपाल जी महाराज के साथ पूरी तरह से मेल खाती हैं, यह पुष्टि करती हैं कि उनके कार्य (जैसे कि बड़े पैमाने पर बाढ़ राहत और 2025 में शुरू हुई अन्नपूर्णा मुहिम) उन "कर्मों" के विवरण में फिट बैठते हैं जिनके द्वारा अवतार को पहचाना जाना था।
संत रविदास जी की एक भविष्यवाणी:
भारत में अवतारी होगा
जो अति विस्मयकारी होगा
ज्ञानी और विज्ञानी होगा
वह अद्भुत सेनानी होगा
जीते जी कई बार मरेगा
छद्म वेश में वह विचरेगा
भारत में अवतारी होगा (अर्थ: अवतार का जन्म भारत में होगा।)
जो अति विस्मयकारी होगा (अर्थ: वह अत्यंत आश्चर्यजनक होगा; कोई ऐसा व्यक्ति जिसके साधारण स्वरूप को देखकर लोगों को उम्मीद नहीं होगी कि उसके पास इतना गहरा आध्यात्मिक ज्ञान होगा।)
ज्ञानी और विज्ञानी होगा (अर्थ: वह आध्यात्मिक ज्ञान का ज्ञाता (ज्ञानी) और वैज्ञानिक/व्यावहारिक तर्क वाला (विज्ञानी) दोनों होगा। वह अंधविश्वास को खारिज करते हुए वैज्ञानिक तर्क के साथ आध्यात्मिकता की व्याख्या करेगा।)
वह अद्भुत सेनानी होगा (अर्थ: वह एक अद्वितीय योद्धा होगा; जरूरी नहीं कि हथियारों के साथ, बल्कि विचारों और अधिकारों का एक "परम योद्धा", जो अन्याय और पाखंड के खिलाफ खड़ा होगा।)
जीते जी कई बार मरेगा (अर्थ: वह जीवित रहते हुए कई बार "मरेगा"। इसका तात्पर्य अत्यधिक संघर्ष, अपमान, झूठे आरोपों या सामाजिक बहिष्कार का सामना करने से है, जो एक संत के लिए "जीते जी मरने" के समान होता है।)
छद्म वेश में वह विचरेगा (अर्थ: वह एक छद्म वेश में विचरण करेगा। इसका अर्थ है कि उसकी असली पहचान एक सामान्य या साधारण स्वरूप के पीछे छिपी होगी, शायद एक कैदी या आम आदमी के रूप में भी, ताकि दुष्ट लोग उसे आसानी से न पहचान सकें।)
भारत में अवतार:
भविष्यवाणी: "भारत में अवतारी होगा।"
लक्षण: वह "ज्ञानी और विज्ञानी" होगा। वह तर्क और विज्ञान के साथ आध्यात्मिकता की व्याख्या करेगा, और अंधविश्वास को अस्वीकार करेगा।
"जीते जी कई बार मरेगा": भविष्यवाणी में कहा गया है कि अवतार "जीते जी कई बार मरेगा"। यह मृत्यु शारीरिक मृत्यु नहीं है, बल्कि अत्यधिक कठिनाई, सामाजिक बहिष्कार और झूठे आरोपों (जैसे 2006 का करौंथा कांड और 2014 की बरवाला घटना जो संत रामपाल जी महाराज के साथ हुई थी) का सामना करना है, जो एक संत के लिए "जीवित मृत्यु" के समान है।
छद्म वेश: वह "छद्म वेश" में रहेगा, जिसका अर्थ है कि वह किसी रूढ़िवादी देवता या राजा की तरह नहीं दिखेगा, बल्कि एक साधारण आम आदमी (या कैदी) के रूप में रहेगा जैसे कि वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज रह रहे हैं, जिससे दुष्टों के लिए उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाएगा।
पंडित काशीनाथ मिश्र की घोषणा: भारत भूमि पर 33 करोड़ देवताओं का आगमन
भविष्य मालिका के प्रख्यात विश्लेषक और ओड़िया ग्रंथों के हिंदी अनुवादक पंडित काशीनाथ मिश्र ने एक विशेष वीडियो में कई गोपनीय तथ्यों का खुलासा किया है। उनके अनुसार, श्री अच्युतानंद महाराज जी की भविष्यवाणियाँ अब प्रत्यक्ष रूप से धरातल पर साकार हो रही हैं।
दैवी आत्माओं का अवतरण: पंडित जी का स्पष्ट दावा है कि वर्तमान में स्वर्ग में इंद्र का पद खाली है, क्योंकि इंद्र सहित 33 करोड़ देवता मानव रूप में पृथ्वी पर जन्म ले चुके हैं।
भौगोलिक वितरण और भारत की प्रमुखता: इन दैवी शक्तियों में से 90% का जन्म भारत की पवित्र भूमि पर हुआ है, जबकि शेष 10% विश्व के अन्य भागों में हैं।
ध्रुव और अन्य सिद्ध आत्माएँ: महान आत्मा ध्रुव ने भी वर्तमान में मानव शरीर धारण किया है। पंडित जी के अनुसार, जब भगवान (कल्कि) स्वयं प्रकट होते हैं, तो संपूर्ण दिव्य सेना और सिद्ध आत्माएँ उनके साथ सतयुग की स्थापना हेतु अवतरित होती हैं।
नरेंद्र मोदी: भारत के अंतिम प्रधानमंत्री और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था का अंत
पंडित काशीनाथ मिश्र ने भारत की भविष्य की राजनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण भविष्यवाणी की है, जो वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूर्ण परिवर्तन का संकेत देती है।
उनके अनुसार, शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि नरेंद्र मोदी भारत के अंतिम प्रधानमंत्री होंगे। वे अंतिम ‘सारथी’ सिद्ध होंगे, जो देश को सतयुग की दहलीज तक पहुँचाएंगे। उनके बाद प्रधानमंत्री का पद समाप्त हो जाएगा।
2032 से 2034 के बीच गणतांत्रिक और चुनावी व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके बाद कोई मतदान प्रणाली नहीं होगी; स्वयं भगवान (कल्कि) ही विश्व संचालन की जिम्मेदारी जिसे उचित समझेंगे, उसे सौंपेंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में उन्होंने कहा कि भगवान की इच्छा सर्वोपरि होगी। जैसे श्रीकृष्ण ने अर्जुन के स्थान पर युधिष्ठिर को चक्रवर्ती राजा बनाया, उसी प्रकार कल्कि अवतार स्वयं तय करेंगे कि शासन किसे सौंपना है।
पंडित मिश्र ने आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था और बहुमूल्य धातुओं के मूल्य में होने वाले बड़े परिवर्तनों पर प्रकाश डाला।
सोने की मांग में गिरावट: 2025 के बाद सोने के दाम गिरने लगेंगे। 2028 के बाद स्थिति ऐसी हो जाएगी कि कोई सोना खरीदना भी नहीं चाहेगा।
सतयुग का ‘स्वर्ण युग’: 2034 तक सोना इतना सुलभ हो जाएगा कि लोग स्टील की जगह सोने के बर्तनों में भोजन करेंगे। वर्तमान में स्टील की जो कीमत है, भविष्य में वही सोने की होगी, क्योंकि सतयुग में भौतिक वस्तुओं के प्रति मोह समाप्त हो जाएगा और आध्यात्मिक संपत्ति का महत्व बढ़ेगा।
भारत का विश्व गुरु बनना: आने वाले समय में संपूर्ण विश्व का संचालन भारत भूमि से होगा और सभी देश भारत के आध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण करेंगे।
ओडिशा के नीला सरस्वती आश्रम के संत जय जगदीश लाला ने कल्कि अवतार की शक्ति की तुलना द्वापर युग के अवतारों से करते हुए कई गहरे रहस्य बताए।
श्रीकृष्ण बनाम कल्कि अवतार: उन्होंने बताया कि द्वापर युग में कृष्ण जी केवल 16 महाकलाओं में से एक अंश के साथ प्रकट हुए थे, जबकि वर्तमान कल्कि अवतार पूर्ण 16 महाकलाओं से युक्त होंगे, जिनकी शक्ति और ज्ञान अनंत होगा।
साधारण रूप में अवतार: भगवान एक साधारण भक्त के रूप में आएंगे। वे इतने सामान्य दिखेंगे कि अज्ञानी लोग उन्हें पहचान नहीं पाएंगे और उनके वैष्णव आचरण का उपहास करेंगे। वे महलों में नहीं, बल्कि साधारण वातावरण में रहेंगे।
मूर्तिपूजा और धार्मिक स्थलों का अंत: जब स्वयं सृष्टिकर्ता मानव रूप में पृथ्वी पर होंगे, तो मंदिरों की मूर्तिपूजा स्वतः समाप्त हो जाएगी। मस्जिद, चर्च और मंदिरों का महत्व समाप्त हो जाएगा क्योंकि प्रत्यक्ष भगवान की उपस्थिति में बाहरी आडंबर की आवश्यकता नहीं रहेगी।
संत जगदीश लाला ने ‘परकाया प्रवेश’ और ‘कलमीकरण’ जैसी दिव्य प्रक्रियाओं का वर्णन किया।
कलमीकरण का विज्ञान: जैसे एक पेड़ की टहनी को दूसरे पेड़ में जोड़ा जाता है, उसी प्रकार त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश — अपने भक्तों के शरीरों में प्रवेश कर चुके हैं और कल्कि अवतार की लीलाओं में सहयोग करेंगे।
त्रिदेवों से भी अज्ञात अवतार: इस महाअवतार की कार्यप्रणाली वेदों और शास्त्रों के लिए भी अज्ञात रहेगी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी यह पूर्णतः नहीं जान पाएंगे कि भगवान किस प्रकार सनातन धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे।
स्वतंत्र भविष्यवक्ता और आध्यात्मिक विश्लेषक भाई दीपक यादव ने कल्कि अवतार की शक्ति का विश्लेषण किया।
परमाणु शक्ति बनाम सत्य की शक्ति: आज की महाशक्तियों के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन कल्कि अवतार के पास केवल ‘सत्य की शक्ति’ होगी, जिसके सामने विश्व के बड़े-बड़े शासक भी नतमस्तक हो जाएंगे।
एक परमात्मा का सिद्धांत: कल्कि अवतार युद्ध से नहीं, बल्कि प्रेम और ज्ञान से विश्व को जीतेंगे। वे कुरान, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब और वेदों का वास्तविक अर्थ समझाकर सिद्ध करेंगे कि “सबका मालिक एक” है, जिससे विश्व युद्ध के खतरे समाप्त होंगे।
दासों का दास और विनम्रता: कल्कि अवतार की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरलता होगी। वे स्वयं को “दासों का दास” कहेंगे और दूब घास की तरह विनम्र रहेंगे, जिसे कोई भी आंधी उखाड़ नहीं सकती।
ज्योतिषी रूपेश आर. शाह जी ने राजस्थान के बेणेश्वर धाम के संत मावजी महाराज की 200 वर्ष पुरानी पोथी के आधार पर वर्तमान घटनाओं का विश्लेषण किया।
जेल से युग परिवर्तन: “अज्ञानी लोग स्वयं भगवान पर भी झूठे आरोप लगाएंगे और उन्हें जेल में बंद करेंगे, जिससे मानवता पाप की भागी बनेगी।” इस भविष्यवाणी के अनुसार, वह महापुरुष जेल में रहते हुए भी मानवता की ज्योति जलाए रखेगा और वहीं से विश्व परिवर्तन की शुरुआत करेगा।
नास्त्रेदमस का महापुरुष और विश्व रक्षा: रूपेश जी के अनुसार, वही महान पुरुष नास्त्रेदमस द्वारा वर्णित तत्वदर्शी संत (Chyren) है, जो विश्व को परमाणु विनाश से बचाएगा और उसे नई वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दिशा देगा।
इतिहास के पन्नों में फ्रांस के प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। उनकी कई भविष्यवाणियां समय के साथ सच साबित हुई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने एक ऐसे 'महापुरुष' के बारे में विस्तार से बताया था, जो दुनिया में एक नई आध्यात्मिक क्रांति लाएगा?
आइए जानते हैं उन खास भविष्यवाणियों के बारे में जो संत रामपाल जी के जीवन से हुबहू मेल खाती हैं:
नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में उल्लेख किया था कि उस महापुरुष की भौंहों के बीच मस्तक पर आधे चंद्रमा (अर्ध-चंद्र) जैसा निशान होगा। आज अगर हम संत रामपाल जी महाराज को देखें, तो उनके चेहरे पर यह प्राकृतिक निशान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो उनकी दिव्यता का प्रमाण माना जाता है।
भविष्यवाणी के अनुसार, वह महापुरुष बहुत ही साधारण वेशभूषा धारण करेगा और 'बिना चमड़े की जूतियां' पहनेगा। संत रामपाल जी महाराज का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण है और वे पूरी दुनिया में शाकाहार और अहिंसा का संदेश दे रहे हैं। उनके अनुयायी भी इसी सादगी और संयम का पालन करते हैं।
भविष्यवाणी में कहा गया था कि वह महापुरुष दुनिया को एक ऐसा ज्ञान बताएगा जो पहले कभी नहीं सुना गया होगा। संत रामपाल जी ने हमारे पवित्र सद्ग्रंथों (जैसे- वेद, गीता, कुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब) के आधार पर 'सत्य ज्ञान' का प्रचार किया है। उन्होंने बताया कि हम सभी 'काल' की कैद में हैं और कबीर परमेश्वर की भक्ति के जरिए ही मोक्ष (सतलोक) प्राप्त किया जा सकता है।
वीडियो में यह भी बताया गया है कि साल 2032 तक दुनिया में एक बड़ा परिवर्तन आएगा और 'सतयुग' जैसी शांति और खुशहाली की शुरुआत होगी। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों के अनुसार, यह महापुरुष पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरोएगा और मानवता का उद्धार करेगा।
ये भविष्यवाणियां केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि उन लोगों के लिए एक गहरी आस्था का विषय हैं जो आज के तनावपूर्ण युग में शांति की तलाश कर रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज के माध्यम से लाखों लोग बुराइयों को छोड़कर एक शुद्ध और भक्तिमय जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।
"जब पूरी दुनिया अंधकार में होगी, तब पूर्व से एक प्रकाश उदय होगा जो पूरी मानवता को नई राह दिखाएगा, वह कोई और नहीं बल्कि संत रामपाल जी महाराज जी है।"
अवतार के बारे में कई भविष्यवाणियां की गई हैं। उन सभी भविष्यवाणियों में यह कहा गया है कि 20 वीं सदी के अंत में एक अवतार का जन्म होगा। उसके बाद वह अवतार पूरी दुनिया में शांति स्थापित करेगा और ज्ञान की क्रांति लाएगा। इतना ही नहीं वह अवतार लोगों को सच्चा ज्ञान प्रदान करेगा। फिर लोगों को सर्वशक्तिमान ईश्वर की पूजा करने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा। वर्तमान में यह सभी भविष्यवाणियां केवल संत रामपाल जी महाराज जी पर ही सही बैठती हैं।
प्रसिद्ध फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस, इंग्लैंड के ज्योतिषी चीरो, अमेरिका की महिला ज्योतिषी जीन डिक्सन, अमेरिका के श्री एंडरसन, हॉलैंड के श्री जेरार्ड क्रेस ,अमेरिका के श्री चार्ल्स क्लार्क, हंगरी की महिला ज्योतिषी बोरिस्का, फ्रांस के डॉ. जूलवोरन, इज़राइल के प्रोफेसर हरारे, नॉर्वे के श्री आनंदाचार्य, अमेरिकी महिला ज्योतिषी फ्लोरेंस, सिख धर्म के संस्थापक श्री नानक देव जी और जयगुरुदेव संप्रदाय मथुरा, भारत के श्री तुलसी साहेब जी ने भी उस अवतार के बारे में भविष्यवाणी की थी। वह अवतार कोई और नहीं बल्कि संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं।
भारत के मथुरा के जयगुरुदेव संप्रदाय के श्री तुलसी साहेब जी ने 7 सितंबर 1971 को प्रकाशित शाकाहारी पत्रिका में भी उस अवतार का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि भारत में जन्मा वह अवतार पूरे 20 वर्ष का हो चुका है। यह बात, भारत में जन्मे, हरियाणा के संत रामपाल जी महाराज जी की जन्म तिथि के साथ मेल खाता है।
तारणहार संत रामपाल जी महाराज जी के बारे में भविष्यवाणियां हैं:- 1) 20वीं सदी के अंत तक वह अवतार एक स्वर्ण युग की शुरुआत करेगा। 2) वह अवतार सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान की क्रांति की शुरुआत करेंगे। 3) वह एक ग्रामीण परिवार में जन्मा भारतीय व्यक्ति होगा। 4) उस अवतार की जन्मतिथि 7 सितंबर 1951 होगी। 5) वह अवतार अपने सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान और सच्ची पूजा की शक्ति से पूरे विश्व पर विजय प्राप्त करेगा।
इस दुनिया में अवतार बहुत महत्वपूर्ण है। मानवता का स्तर दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। भविष्य में मानवता का स्तर बनाए रखना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। इसलिए ही लोगों का ईश्वर और अध्यात्म पर भरोसा बनाए रखने के लिए इस दुनिया को एक अवतार की जरूरत है जो इस संसार का उद्धार करेगा।
सभी भविष्यवाणियां उस एक अवतार के बारे में हैं जो भारत के हरियाणा के संत रामपाल जी महाराज जी के रुप में 7 सितंबर 1951 को जन्मे हैं।
केवल संत रामपाल जी महाराज जी ही सभी भविष्यवाणियों के नायक हैं। उनका जन्म हरियाणा, भारत में हुआ था।
इस ब्रह्माण्ड में कबीर परमेश्वर के अलावा कोई सर्वोच्च शक्ति नहीं है। कबीर साहेब जी सभी ब्रह्मांडों के निर्माता हैं। केवल ईश्वर ही ब्रह्म काल के जाल से मानव को मुक्त कराने के लिए अवतरित होता है। इसलिए वह उद्धारकर्ता कहलाता है।
एक उद्धारकर्ता वह अवतार है जो मानवता के गिरते स्तर को फिर से ऊपर उठाएगा। वह अवतार नास्तिकता को पूरी तरह से नष्ट कर देगा। इतना ही नहीं वह अवतार स्वर्ण युग लाएगा और विश्व में शांति और भाईचारा स्थापित करेगा। फिर सारा विश्व एक होकर कबीर परमेश्वर जी की सच्ची भक्ति करेगा। वह अवतार इस समय भारत में जन्म ले चुका है और वह अवतार संत रामपाल जी महाराज जी हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब पूरा विश्व संत रामपाल जी को पहचानेगा और सभी संत रामपाल जी महाराज जी की बताई सतभक्ति करेंगे।
केवल भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के प्राणियों को ब्रह्म काल के मृत्यु लोक से केवल वह अवतार ही बचा सकता है क्योंकि यही भक्ति करने और मोक्ष प्राप्त करने का स्वर्ण युग है। वह अवतार यानि कि संत रामपाल जी महाराज जी प्रत्येक मानव का उद्धार कर सकते हैं।
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Hiralal Verma
संत रामपाल जी महाराज जी अन्य संतों से अलग कैसे हैं?
Satlok Ashram
संत रामपाल जी महाराज जी हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भक्ति विधि बताते हैं। फिर वह वही अवतार हैं जिनके बारे में कई विश्व प्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणियां की हैं। उनके बारे में कहा गया है कि वह पूरी दुनिया को मानवता भी सिखाएंगे। इसके अलावा वह अवतार अपने आध्यात्मिक ज्ञान की शक्ति से सभी सामाजिक बुराइयों को मिटा देंगे। जबकि अन्य संत मनमानी पूजा करवा कर मानव समाज को 84 लाख योनियों के कोल्हू में झोंक रहे हैं।