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“डरो मत, लड़ो मत, आगे बढ़ो” - संत रामपाल जी महाराज

(विशेष सत्संग, 11 अप्रैल 2026)

बंदी छोड़ सतगुरु देव की जय!

परमपिता परमात्मा कबीर जी की प्यारी संगत और विश्व के समस्त लोगों को इस दास का आशीर्वाद है। परमात्मा आपको मोक्ष प्रदान करें, आपको सुखी रखें और काल के कष्टों से आपकी रक्षा करें।

परमपिता पर अटूट विश्वास ही साधना का आधार

बच्चों! कबीर साहिब कहते हैं:

कहे कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विश्वास में।

आपको अपने परमपिता पर पूर्ण विश्वास रखना होगा। परमात्मा ने दूसरी बात यह कही है:

ज्यों राखो त्यों ही रहूँ, मेरा क्या चारा। 

खाणे जाद (खानजाद) खरीद हूँ, गुलाम तुम्हारा।।

राजिक रमता राम की, रज़ा धरे जो शीश। 

दास गरीब दर्श-परश, तिस बैठे जगदीश।।

हमें उसी अवस्था में रहना है जिसमें हमारा परमपिता हमें रखता है। बच्चों! एक कहावत है कि ‘सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं’। असत्य का कोई अस्तित्व नहीं होता।

यह दास आपसे बार-बार कहता है कि आप कोई साधारण आत्माएं नहीं हैं। परमात्मा ही जानता है कि कितने युगों से उसने आपको संभाला है और आज आपको इस मोड़ पर लाकर खड़ा किया है। गरीब दास जी कहते हैं:

यह कहण-सुणण की करते बातां, 

कोई ना देख्या अमृत खाता।

लोग कहते हैं कि मोक्ष प्राप्त हो गया, फलां मुक्त हो गया। लेकिन वास्तव में कोई मुक्त नहीं है।

सुर-नर मुनिजन 33 करोड़ी, 

ये बंधे सभी काल की डोरी।।

पहले हम यह विश्वास नहीं करते थे कि ये ऋषि-महर्षि मुक्त नहीं हुए होंगे, क्योंकि तब हमारी बुद्धि बालक के समान थी। लेकिन महापुरुषों द्वारा कहे गए जो भी वचन थे, वे आज सत्य सिद्ध हुए हैं और अब यह आपके सामने और भी स्पष्ट हो जाएगा।

संघर्ष, उजाड़ और परमात्मा की सामर्थ्य

बच्चों, आपने परमात्मा की सामर्थ्य देखी होगी। 2006 में हम पूरी तरह उजाड़ दिए गए थे। मैं वहां से केवल एक चादर लेकर निकला था; मुझे अपने कपड़े तक लाने की अनुमति नहीं दी गई थी। उसके बाद, परमपिता ने बरवाला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। वह आश्रम 4 एकड़ का था, जो बढ़कर 12 एकड़ का हो गया। इस दास को 6.5 साल का समय दिया गया और उन 6.5 वर्षों में ऐसा अद्भुत ज्ञान प्रदान किया गया कि सब पराजित हो गए।

अब यह दास 11 साल और 4 महीने बाद लौटा है। उसी ज्ञान के आधार पर आज सबकी बोलती बंद है। 2014 में हमें फिर से उजाड़ा गया। वहां से भी मैं केवल अपने कंधों पर एक चादर लपेटकर निकला था, बस वही कपड़े थे जो पहने हुए थे। सब कुछ नष्ट कर दिया गया, सब बर्बाद हो गया। मेरे 900-1000 बच्चे जेल भेज दिए गए। उन्होंने सोचा था कि हम खत्म हो गए। लेकिन भक्ति का मार्ग उजड़ने के बाद ही बसता है।

जैसे खेतों में गेहूं बोया जाता है; वह मिटने के बाद ही उगता है और फिर कई गुना होकर फलता है। आज अपने परमात्मा की सामर्थ्य देखो। जब परमात्मा (कबीर जी) आए थे, तब नकली पत्र बांटे गए थे कि कबीर तीन दिनों का भंडारा करेंगे—दोहर, मोहर और सभी प्रकार के व्यंजन, मिठाइयां परोसी जाएंगी। सबको निमंत्रण दिया गया। जबकि वह (कबीर साहिब) एक झोपड़ी में रह रहे थे; जहाँ सुबह की रोटी का ठिकाना था तो शाम का नहीं। वह उस समर्थ की शक्ति थी कि 18 लाख लोग आए, जो सब अनाथ और अभावग्रस्त थे। सबको तीन दिनों तक स्वादिष्ट भोजन कराया गया और वे दुष्ट लोग खड़े होकर देखते रह गए।

तो बच्चों, आज तक यह समझ नहीं आया था। लोग कहते थे कि यह झूठ है, यह एक मनगढ़ंत कहानी है। वह उस समय भी झूठी कहानी नहीं थी। आज 18 लाख नहीं बल्कि 50 लाख लोग हर तीन महीने में तीन दिनों तक भोजन करते हैं। हम वही स्वादिष्ट भोजन परोसते हैं।

बच्चों! 2014 में केवल एक आश्रम था और आज 13, 14, 15 आश्रम हैं और अब पूरी पृथ्वी ही आश्रम बन जाएगी। विश्वास बनाए रखें।

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

परमेश्वर के खेल और अटल विश्वास

ये सब खेल हमारे किए। 

हमसे मिले सो निश्चय जिए।

ये सभी खेल परमेश्वर द्वारा किए गए हैं। जिस दिन यह दास छोटी जेल में गया था, उसी दिन से हम 1.5, 2-3 महीने बाद मिलने लगे थे। मैंने उस दिन कहा था कि मैं जेल में बैठकर खेल खेलूँगा। देखो क्या होता है और आज मैंने वह आपके सामने कर दिखाया है।

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

इस दास ने परमात्मा को करीब से जाना है और उनके हर फॉर्मूले (नियम) को समझा है। शक्ति नहीं, फॉर्मूला काम करता है। एक छोटा सा जैक होता है; वह 200 क्विंटल के ट्रक को देखते ही देखते उठा देता है। तो यह वैसा ही एक सूत्र है। मर्यादा में रहकर नियम पालन करना ही हमारा सिद्धांत है। पूरी दुनिया हिल गई है। पूरी दुनिया हमारी हो गई है। मैंने एक ही वार में पूरी दुनिया को हमारा बना लिया। भारत लगभग बन चुका है और अगले वार में पूरी दुनिया आपके साथ होगी।

बंदी छोड़ की जय!

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

काल मेरे अगले वार का सामना नहीं कर पाएगा।

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

सिर समर्पण की भक्ति ही सच्चा मार्ग

तन-मन शीश ईश अपने पे, तन-मन शीश ईश अपने पे,

पहलम चोट चढ़ावे, जब कोई राम भगत गति पावे होजी।।

भाई सिर साटे की भक्ति है, और कछु नहीं बात।

सिर के साटे पाइयो, अविगत अलख अनाथ।।

सिर सौंप्या गुरुदेव को, सफल हुआ ये शीश।

नित्यानंद इस शीश पर, आप बसे जगदीश।।

जब यह शीश उन्हीं का है, तो हमें किस बात की चिंता? बच्चों, उस परमपिता के प्रति स्वयं को ऐसे ही समर्पित कर दो और फिर देखो।

मैंने तुम्हें सुखी किया और तुम्हारे दान से दुनिया को सुखी किया; और तुम्हें वह कई गुना होकर वापस मिलेगा। वह कोई बालक नहीं है, वह सर्व-समर्थ है। वह किसी का कर्ज नहीं रखता।

द्रुपद सुता कुं दीन्हे लीर, 

जाके अनंत बढ़ाये चीर।

उसने किसी का भी एहसान बाकी नहीं रखा। लोग कबीर साहिब से कहते थे, ‘तुम क्या कर सकते हो? तुम खुद एक झोपड़ी में रहते हो।’ उन्होंने कहा, ‘कर सकता हूँ या नहीं, मेरी शक्ति तुम्हारे शब्दों के अधीन नहीं है। फिर भी देखो, मैंने चार युगों में किसका कर्ज बाकी रखा है?’

Creation of Nature

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

आप कह रहे हैं ‘आप क्या कर सकते हैं?’ जब मैं समर्थ हूँ तो देखो इन चार युगों में मैंने किसका क्या बाकी रखा है?

द्रौपदी ने कपड़े का एक टुकड़ा दिया, मैंने साड़ियों का ढेर लगा दिया। भक्त धन्ना ने 5 किलो बीज दिए और मैंने उसके तुम्बे में अनगिनत अनाज भर दिया। भाई, यह परमात्मा ऐसे भरता है और साथ ही मोक्ष भी प्रदान करेगा। बच्चों! इस बात की गारंटी मुझसे लिखवा लो।

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

जीवन का एक सूत्र

एक ही सूत्र याद रखो - डरो मत, लड़ो मत, आगे बढ़ो।

बंदी छोड़ की जय!

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

आनंद, आश्रय और गुरु की उपस्थिति

आनंद का नहीं ठिकाना, मेरे हंस खड़े दरबार में।।

आनंद का नहीं ठिकाना, मेरे भक्त खड़े दरबार में।।

बंदी छोड़ की जय!

आपके गुरु जी आपके साथ हैं। वह पहले भी साथ थे। पहले ऐसा लगता था कि वह जेल में बैठे हैं। नहीं, यह बार-बार कहा गया था - यह गलती मत करना कि गुरु जी जेल में हैं।

बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय!

 

जेलधाम से आगमन के उपरांत विश्व को संत रामपाल जी महाराज का प्रथम संदेश | 10 अप्रैल 2026 →