परमेश्वर कबीर जी के दिव्य चमत्कार (2डी एनिमेशन)


परमेश्वर कबीर जी के दिव्य चमत्कार (2डी एनिमेशन)

 

कैसे धर्मदास को परमेश्वर कबीर जी ने समझाया सतज्ञान?

इस 2D एनिमेशन में धर्मदास की कथा को दर्शाया गया हैं, धर्मदास जी जो एक निष्ठावान हिन्दू थे जो कि वैष्णव सम्प्रदाय और बनिया जाति से संबंधित थे। वह राम, कृष्ण, विष्णु और शंकर की पूजा करते थे और अपने गुरु, रूपदास के मार्गदर्शन का पालन करते थे। एक दिन, वह तीर्थयात्रा के लिए मथुरा जा रहे थे, जहां उन्हें जिंदा महात्मा के रूप में कबीर साहेब जी मिले। उन्होंने धर्मदास जी की धार्मिक धारणाओं को गलत ठहराते हुए, शास्त्रानुकूल भक्तिमार्ग की प्रेरणा दी। धर्मदास जी ने पहले उनका विरोध किया और जिंदा महात्मा के साथ कुतर्क किया, लेकिन धीरे-धीरे वे उनके ज्ञान की तरफ आकर्षित हो गए। अंततः उन्होंने जिंदा महात्मा से नाम दीक्षा ली और परम् अक्षर ब्रह्म यानी कबीर परमात्मा की भक्ति को स्वीकार किया। फिर जिंदा महात्मा ने धर्मदास को शाश्वत स्थान सत्यलोक के दर्शन कराए, जहां धर्मदास ने परम् अक्षर ब्रह्म की वास्तविक महिमा और छवि को देखा। वहां उन्हें ज्ञात हुआ कि जिंदा महात्मा कोई और नहीं बल्कि स्वयं कबीर परमात्मा थे, जो उन्हें तत्त्वज्ञान देने के लिए पृथ्वी पर आए थे। वह परमात्मा की कृपा और दया के लिए उनके प्रति कृतज्ञता और ख़ुद को सौभाग्यपूर्ण महसूस करते हैं।

धर्मदास जी ने कबीर जी से अपने पुत्र नारायण दास का भी मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। हालाँकि, कबीर परमात्मा ने धर्मदास को बताया कि नारायण दास ने को काल भगवान ने भेजा है जो उनका ज्ञान स्वीकार नहीं करेगा, जिससे धर्मदास जी को अपने वंश के बारे में चिंता हुई। तब कबीर जी ने धर्मदास जी को 42 पीढ़ियों का आशीर्वाद दिया। कबीर परमेश्वर ने यह भी बताया कि जब कलियुग के 5505 वर्ष बीत जायेंगे तब मैं अपना अंश अवतार भेजूंगा और सभी प्रचलित संप्रदायों को नष्ट करके 13वां यथार्थ कबीर पंथ चलाऊंगा।


कबीर परमेश्वर ने कैसे युद्ध की स्थिति को टाला और मगहर से सशरीर सतलोक चले गये

इस एनिमेटेड वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे पुजारियों ने धार्मिक लोगों को गुमराह किया कि यदि कोई व्यक्ति मगहर स्थान पर मरता है तो वह नरक में जाएगा या गधा बनेगा तथा यदि वे काशी शहर में मरते हैं तो वे स्वर्ग में जाएंगे। इस मिथक को दूर करने के लिए कबीर साहेब काशी से मगहर आए, ताकि यह साबित हो सके कि एक सच्चा उपासक कहीं भी मर सकता है, उसे भगवान की प्राप्ति होगी। तब मुस्लिम शासक बिजली खान पठान, हिंदू राजा वीर सिंह बाघेल और सभी धार्मिक शिष्य अंतिम संस्कार करने के लिए एकत्र हुए। लेकिन भगवान कबीर जी ने उन्हें सख्ती से कहा कि वे उनके शरीर के लिए न लड़ें, बल्कि शांति से रहें। फिर जमीन पर एक चादर बिछाई गई जिस पर कबीर साहेब लेट गए और खुद को दूसरी चादर से ढक लिया। कुछ समय बाद, कबीर परमेश्वर ने आकाशवाणी की और कहा कि "मैं सतलोक जा रहा हूँ", जहाँ से वे सशरीर इस पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। जब चादर उठाकर देखी गई तो चादर के नीचे कबीर जी का शव नहीं मिला, केवल सुगंधित फूल मिले। साथ ही, कबीर साहेब ने हिंदुओं और मुसलमानों को लड़ाई-झगड़ा न करने और मिल-जुलकर रहने का आदेश दिया।


2) शीर्षक - स्वामी रामानन्द जी को भगवान कबीर साहेब जी का गुरु मानने के पीछे का रहस्य

विवरण - इस एनिमेटेड वीडियो में दर्शाया गया है कि सर्वशक्तिमान कबीर प्रभु कभी भी माँ के गर्भ से पैदा नहीं होते हैं। 600 वर्ष पहले जब कबीर जी काशी में सशरीर प्रकट हुए तो निःसंतान दंपत्ति नीरू और नीमा लहरतारा तालाब से परमात्मा कबीर को अपने घर ले आये और बालक रूप में उनकी सेवा की। जब कबीर जी पाँच वर्ष के हुए तो गुरु धारण करने की परंपरा को कायम रखने के लिए उन्होंने स्वामी रामानन्द जी के साथ दिव्य कृत्य किया और बाद में कबीर साहेब जी ने उन्हें सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान दिया, दीक्षा दी और श्री रामानंद जी को शाश्वत स्थान अर्थात सतलोक में अपने वास्तविक सतपुरुष रूप के दर्शन कराये।


3) शीर्षक- संत गरीबदास जी महाराज की कथा का अनावरण

विवरण - इस एनिमेटेड वीडियो में दर्शाया गया है कि संत गरीबदास जी महाराज का जन्म वर्ष 1717 ई. में ग्राम छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में धनखड़ जाटों के परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री बलराम जी और माता श्रीमती रानी थीं। वह अपने माता-पिता के साथ ननिहाल में रहते थे। जब गरीबदास जी 10 वर्ष के हुए तो उन्हें परमेश्वर कबीर साहेब जी जिंदा महात्मा के रूप में मिले। तब कबीर साहेब जी ने गरीबदास जी को सतलोक के बारे में बताया और सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान दिया। इस पर गरीबदास जी ने कबीर परमेश्वर से अपना सतलोक दिखाने की प्रार्थना की। परमेश्वर कबीर जी ने गरीबदास जी को दीक्षा दी तथा उनकी आत्मा को शरीर से निकालकर सतलोक दिखाया।


4) शीर्षक - काशी में भव्य भण्डारे के आयोजन के पीछे का असली रहस्य खुला

विवरण: यह एनिमेटेड वीडियो 18 लाख साधु संतों के लिए कबीर साहेब (बुनकर की भूमिका निभाते हुए) की ओर से काशी में भव्य भण्डारे के आयोजन में केशो बंजारा की भूमिका को दर्शाता है जोकि स्वयं कबीर साहेब ही दूसरे रूप में थे। इसमें दिखाया गया है कि कैसे शेखतकी (एक मुस्लिम धार्मिक पीर) ने लोगों को गुमराह करने के लिए सभी को एक झूठा निमंत्रण दिया जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि कबीर जी 3 दिन का मुफ्त सामुदायिक भण्डारा कर रहे हैं, जिसमें प्रत्येक भोजन के बाद एक कंबल और एक सोने का सिक्का दिया जाएगा। ताकि कबीर साहेब को काशी स्थान छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सके। लेकिन इसके विपरीत, परमेश्वर कबीर जी द्वारा भण्डारे का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया था, जहां उन्होंने केशो बंजारा के साथ बातचीत करते हुए, वहां मौजूद सभी लोगों को सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान दिया।


5) शीर्षक - खूनी हाथी द्वारा कबीर जी को मारने का निरर्थक प्रयास

विवरण - इस एनिमेटेड वीडियो में दिखाया गया है कि कबीर साहेब जी मानव को सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान से परिचित कराने और उन्हें पूर्ण मोक्ष दिलाने के उद्देश्य से काशी में अवतरित हुए। इस दौरान कबीर साहेब ने कई चमत्कार किये और लोगों को कई लाभ दिये, जिससे वे कबीर जी के शिष्य बन गये और अन्य ब्राह्मण, मुल्ला और काजी ईर्ष्यावश परमेश्वर कबीर जी का विरोध करने लगे। तब उन्होंने योजना बनाकर परमेश्वर कबीर जी को मारने के लिए उन पर 52 अत्याचार किए, जिसे बावन कसनी के नाम से जाना जाता है। उनमें से एक परमेश्वर कबीर जी को खूनी हाथी से मरवाने का प्रयास भी था। लेकिन इसके विपरीत, शेखतकी (एक मुस्लिम धार्मिक पीर) का प्रयास विफल रहा और सिकंदर लोधी (दिल्ली के राजा) ने गलती के लिए माफी मांगी।