सत्संग का अर्थ

सत्संग का अर्थ है यथार्थ अध्यात्म ज्ञान का प्रचार जिसमे केवल सत्य हो, असत्य ना हो। ऐसा दिया जाने वाला अध्यात्म ज्ञान सत्संग कहलाता है।

जिसके विस्तार मे किसी भी प्रकार की शंका जीव को ना रहे वो ही सत्संग है और उसे स्वयं संत या सतगुरु ही करते है। सत्संग का वर्णन करते हुए पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब कहते है,

" माँ मुंडो उस संत की, जिससे संशय ना जाए ।
काल खाए थोड़े, इस संशय ने सब जग खाए ।। "

जैसा ये वाणी स्पस्ट करती है कि जीव के अंदर संशय रह जाना उसे काल आहार बना देता है।

अर्थात

सत्संग उस परमेश्वर का यथार्थ ज्ञान देना है जिसकी भक्ति करके जीव इस भवसागर से पार होकर 84 लाख योनियो मे जन्म मरण के चक्र से छूट जाता है ।

जिसे मुक्ति, मोक्ष प्राप्त हो जाना कहते हैं।

निश्चित ही अब आप ये समझ सकते है कि सतगुरु सत्संग का कितना मह्त्व है इस मानव जीवन में  ।

सत्संग क्यो ज़रूरी

जन्म से ही प्रारंभ हो जाने वाली प्राणी के जीवन की यात्रा जहां उसकी मंजिल भी निर्धारित है कि उसे मोक्ष मार्ग की खोजकर उसी अनुसार जीवन की यात्रा तय करनी है । ऐसी स्थिति में सत्संग ही वो माध्यम है जहां यह पता चलता है की हम मनुष्य जन्म पाकर क्या कर रहे हैं और हमें क्या करने के लिए यह मनुष्य जन्म दिया गया ।

सत्संग की महिमा का बखान करते हुए  परम पूज्य परमेश्वर स्वरूप सदगुरुदेव तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज बताते हैं।

संत समागम, हरि कथा, तुलसी दुर्लभ दोय।
सूत दारा और लक्ष्मी यह तो पापी घर भी होए।।

भावार्थ है, धन-धान्य , सुख-समृद्धि, सुन्दर नारी तो जन साधरण, चोर, बदमाश, हत्यारे और कुकर्मी के घर भी जरूर मिल जाते हैं। जहां संतों की वाणी कोसों दूर भी सुनायी नहीं देती। लेकिन संत का समागम जहां परमेश्वर की यथार्थ जानकारी मिले उनका नाम जपने का मौका मिले ऐसा कोई विरला ही घर होता है।

स्पस्ट है कि एक मौके के स्वरूप में प्राप्त हुआ यह मानव जीवन परमात्मा की शास्त्रविधि अनुसार साधना करके मोक्ष प्राप्त करने के लिये ही मिलता है ।

लेकिन यह बेहद दुखद है कि सत्संग के अभाव में  हम एसे  महत्वपूर्ण जीवन को 4 दिन की जिंदगी है  मौज मस्ती करके सुखी होने को जीवन का आधार मानकर जीते हैं । जिससे अंततः दुख भरे भयानक परिणामों को अनगिनत बिमारियो या अन्य कष्ट के रूप मे झेलना पड़ता है।

मानव शरीर प्राप्त प्राणी को सत्संग के माध्यम से ही पूर्ण संत की शरण मिलती है। पूर्ण संत ही परमेश्वर  का संविधान बताता है जिसमें उसे सत्संग के माध्यम  से यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाता है 'कि यदि पूर्ण संत से नाम दीक्षा लेकर भक्ति, पुण्य, दान, धर्म,  शुभ कर्म नहीं किए। तो पूर्व जन्म के पुण्य मानव जीवन में (खा) खर्च कर खाली होकर परमात्मा के दरबार में जाओगे और फिर पशु आदि के जीवन ही भोगने पड़ेंगे ।

वर्तमान में शुभ कर्म अर्थात भक्ति नहीं की तो भविष्य का जीवन नर्क होना निश्चित है और मानव जीवन का ये बेहद जरूरी आध्यात्मिक ज्ञान केवल और केवल पूर्ण संत के सत्संग के माध्यम से ही संभव है ।

पूर्ण संत का सत्संग है ~ ` सुख का सागर

असल में सत्संग का मिलना बहुत कठिन है क्योंकि वर्तमान मे जो संत सत्संग कर रहे है वह किसी भी धार्मिक ग्रंथ के आधार पर पूर्ण परमेश्वर की प्रमाणित जानकारी नही देते। बल्कि कहीं सुनी कथाओं को लेकर ही सत्संग कर रहे हैं ।

  1. जिससे मोक्ष मार्ग दूर तक सम्भव नहीं हो पाता।
  2. शंका समाधान नहीं हो पाता ।
  3. मन की अशांति खतम नहीं हो पाती।
  4. दु:ख दूर नहीं हो पाते।

इसके विपरित यदि पूर्ण संत द्वारा दिया गया तत्वज्ञान सत्संग जो आत्मा की खुराक होता है। उसे सुना जाए तो मानव सभी बुराईयों को त्याग कर सुखदाई जीवन जीने लगता है।

अब बात ये आ जाती है कि अनगिनत धर्मगुरुओं की  मौजूदगी में वह पूर्ण गुरु कौन है वह तत्वदर्शी संत कौन है जिसका सत्संग सुनने मात्र से बुराइयां खत्म हो जाए??

जाहिर है, इस प्रश्न का उत्तर जनना आपके लिये बेहद जरूरी है लेकिन उससे कहीं ज्यादा जरूरी है इस उत्तर को प्रमाण के साथ आपके सामने प्रस्तुत करना। तो प्रमाण स्वरूप हम पहले पवित्र श्रीमदभगवदगीता गीता के अध्याय 15 के मंत्र नंबर 1 से 4 का श्लोक आपके सामने रखते है। जिसमे सच्चे संत का वर्णन स्पष्ट रूप से किया गया है।

उर्ध मूलम्ं अध: शाखाम् अश्वथामम् अव्यवम् ।
छंदासि यस्य पर्णामि यह तम वेद सहवेदविद् । ।

गीता अनुसार वह पूर्ण संत उपर को जङ वाला नीचे को शाखा वाला अविनाशी विस्तृत संसार रूपी उल्टे लटके हुए पीपल के वृक्ष की संपूर्ण जानकारी सहवेद वित इसी प्रकार जड़ से तनों तक भगत समाज को प्रदान करेगा वह पूर्ण ज्ञानी अर्थात तत्वदर्शी संत होगा।

वेदो मे भी सच्चे संत का प्रमाण मिलता है। जिसमे यजुर्वेद अध्याय 19 के मंत्र 25 में बताया है कि वह

तत्वदर्शी संत सभी धर्मों के पवित्र सदग्रंथों के गूढ़ रहस्यों को भगत समाज के समक्ष प्रमाण सहित बताएगा।

अर्द्ध ऋचैः उक्थानाम् रूपम् पदैः आप्नोति निविदः ।
प्रणवैःशस्त्राणाम् रूपम् पयसा सोमः आप्यते । ।

अर्थात जो संत महापुरूष वेदों के अधूरे वाक्यों और संकेतात्मक रहस्यों की जानकारी प्रमाण सहित करेगा और शास्त्रों के आधार से प्रमाण सहित ज्ञान भगत समाज तक प्रस्तुत करेगा, वही तत्वदर्शी संत होगा।

तत्वादर्शी संत के इन प्रमाणित पहचान के आधार पर विश्व मे आयी धर्मगुरुओ की बाढ़ मे केवल जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी ही एकमात्रजगतगुरु तत्त्वदर्शी संत आज धरती पर मौजूद है ।

केवल संत रामपाल जी महाराज का सत्संग है सुखदाई

 संत रामपाल जी महाराज का सत्संग जो वर्तमान मे 12 घन्टे अलग अलग टीवी चैनलो पर प्रसारित किया जा रहा है उसे सुनने से ये ज्ञान होता है की मानव जीवन का मूल कर्तव्य पूर्ण परमात्मा की भक्ति है यह तत्व ज्ञान सत्संग सुनने से जनसाधारण अपने मूल कर्तव्य की तरफ अग्रसर होते हुए सभी विकारों को दूर करते हुए (जागने की तरफ) कदम बढ़ाना शुरू करता है जिससे उसे अनेको लाभ मिलने शुरु हो जाते है जैसे   -

  1. यदि यह सत्संग जो साधना Tv पर शाम 7.30 से  8.30 बजे तक प्रसारित होता है उसे घर में चलाया जाए तो गृह क्लेश खत्म हो जाती है ।
  2. इस सत्संग को सुनने से नशा करने वाला व्यक्ति नशा त्याग देता है।
  3. इस सत्संग को सुनने से मनुष्य विकारों को त्यागना शुरू कर देता है।
  4. इस सत्संग को सुनने से जनसाधारण उस अहंकार को त्याग देता है जिसमें उसकी यह विचारधारा होती है कि आज मैं लाखों रुपए कमा कर अमीर बन गया। उसे यह विचार आने शुरू हो जाते हैं कि, यदि भक्ति नहीं की तो कल कुत्ता बनूंगा तब क्या होगा इन रुपयों का और वह अहंकार त्याग कर, परमात्मा प्राप्ति की तरफ अग्रसर होता है।
  5. भक्ति करने का इच्छुक व्यक्ति यदि इस सत्संग को सुनकर नाम दीक्षा ग्रहण करता है तो उसके भयानक से भयानक रोग का विनाश भी पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई भक्ति से हो जाता है।

ऐसे अनगिनत लाभ होते है परम पूज्य गुरुदेव जगत्गुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का सत्संग सुनने और उनसे  प्राप्त प्रमाणित भक्ति को करने से। मगर ये संभव नहीं कि उन सभी का वर्णन यहा किया जा सके।

निष्कर्ष

असल मे सतगुरु संत रामपाल जी महाराज जी का सत्संग जीवन ही बदल देता है।

अब ये जानकारी हो जाने के बाद कि, कष्ट भरे इस जीवन में सुख का माध्यम पूर्ण गुरु का सत्संग भी जब मुमकिन है। तो एक बार विचार करते हुए, इस बात को याद रखते हुए, कि केवल और केवल मानव जीवन में ही, मानव देह में ही, हमें तत्वदर्शी संत की शरण मिलती है, वो आध्यात्मिक गुरु मिलता है जिससे जीवात्मा जो 84 लाख योनियो के जन्म मरण के भयानक और दुखदायी जीवन चक्र में है, उससे मुक्ति पा सकती है तो संत रामपाल जी महाराज का सत्संग जरूर सुने।

प्रार्थना है समय रहते इस बहुमूल्य मनुष्य जीवन के महत्तव को जाने। सत्संग देखें निश्चित तौर पर आपको हानि तो कोसों दूर तक नहीं होगी। बल्कि मानव जीवन का निर्धारित उद्देश्य प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा।