कुरान शरीफ (इस्लाम) में सर्वशक्तिमान अविनाशी भगवान (अल्लाह कबीर)

प्रत्येक मनुष्य में यह जानने की जिज्ञासा है, कि वह परमात्मा कौन है जिसने सर्व सृष्टि की रचना की। अपने धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोग सर्वोच्च शक्ति को God/ अल्लाह/ खुदा/ रब/ भगवान/ परमात्मा क्यों कहते हैं। हिंदू धर्म के अनुयायी मानते हैं कि उनका हिंदू धर्म अच्छा है और उनके भगवान (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) सर्वोच्च शक्तियां और इस सृष्टि के निर्माता हैं। ईसाई (Christians) दावा करते हैं कि ईसाई धर्म सबसे अच्छा धर्म है और सिक्ख धर्म का पालन करने वाले भक्त कहते हैं कि सिक्ख धर्म सबसे अच्छा है।

इसी तरह इस्लाम की मान्यता यह है कि उनका इस्लाम धर्म महान है, उनके अनुयायी मानते हैं कि यह सबसे अच्छा धर्म है और अल्लाह/खुदा सर्वव्यापी है और वह एकमात्र देवता है जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड का निर्माता है।

जब लोगों के पास सही आध्यात्मिक ज्ञान होगा तब उन्हें पता चलेगा कि हम सभी एक ईश्वर की संतान हैं। हम अलग नहीं हैं। जब हम पूरी तरह से परमात्मा के आध्यात्मिक ज्ञान से परिचित हो जाएंगे, तब हम किसी को गैर नहीं समझेंगे, हर कोई अपना प्रतीत होगा। जब तक हमें वह सच्चा ज्ञान नहीं प्राप्त होगा तब तक हम अपने-अपने धर्मों को श्रेष्ठ मानते रहेंगे और दूसरे धर्मों को निम्न दृष्टि से देखेंगे। यह तो हमारी आध्यात्मिक अज्ञानता है कि हम किसी भी धर्म को छोटा या बड़ा कहते हैं।

किसी भी धर्म को समझने के लिए, हमें उनके अनुयायियों को समझने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि आमतौर पर अनुयायी स्वयं नहीं जानते कि उनका धर्म और विश्वास किन विषयों पर बात करता है। किसी भी धर्म के बारे में जानने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम उनकी धार्मिक पुस्तकों को समझें। इसलिए, यदि हम इस्लाम धर्म के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमें मुसलमानों को समझने की जगह इस्लामिक धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।

आइए हम मिलकर इस्लाम धर्म और उनकी मान्यताओं पर एक नजर डालते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि इस्लाम के अनुसार अल्लाह/ईश्वर कौन है?

इस्लाम में भगवान | पवित्र पुस्तक कुरान शरीफ में अल्लाहु अकबर (कबीर)

'The Encyclopaedia Britannica 2007' और 'Encyclopedia of the Modern Middle East and North Africa'(विश्वकोश) के अनुसार, अल्लाह एकमात्र खुदा/God है और इस ब्रह्मांड को रचने वाला है। मुसलमान 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का उच्चारण करते हुए अल्लाह का स्मरण करते हैं, जिसका अर्थ है 'एक अल्लाह के सिवा और कोई देवता नहीं'। वे यह भी कहते हैं कि 'अल्लाहु अकबर' का अर्थ है 'ईश्वर बड़ा है'। मुस्लिम भाइयों ने कुरान शरीफ को ठीक से समझे बिना, उसके आयतों को समझे बिना ही यह निष्कर्ष निकल लिया कि कुरान शरीफ का ज्ञान देने वाला अल्लाह है। जबकि, कुरान शरीफ में स्पष्ट है कि कुरान शरीफ का ज्ञान दाता अपने स्तर का ज्ञान प्रदान करता है और अंत में अल्लाहु अकबर के बारे में 'बाख़बर/इल्मवाला’ से जानकारी पूछने का विकल्प छोड़ देता है। बाख़बर से अर्थ है, एक तत्वदर्शी संत(असली ज्ञान से युक्त संत)। हम सबका रचनहार और हमारी पूजा का एकमात्र असली अधिकारी वह सर्वशक्तिमान अल्लाहु अकबर है। आइए हम मुस्लिम धर्म की पाक पुस्तकों से सबूतों की जाँच करें।

पवित्र कुरान शरीफ में अल्लाह कबीर, सूरत फुरकानी 25, आयत 52-59

संदर्भ

क़ुरान शरीफ़ ,मुतर्ज़म बरहाशियः(सानुवाद सटिप्पण), शास्त्रीय अरबी पद्धति द्वारा नागरी लिपि में, अनुवादक- नंद कुमार अवस्थी (शेरवानी संस्करण)-में स्पष्ट उल्लिखित है कि अल्लाह का नाम कबीर है, जिसका अर्थ 'महान परमात्मा' है।

आयत 25:52

“फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन”

यहां स्पष्ट रूप से ‘कबीरन’ लिखा है। हम इसे 'कबीर', 'कबीरा' या 'कबीरन' या 'खबीरा' या 'खबीरन' कह सकते हैं। स्पष्ट है कि यहां कबीर लिखा गया है। कुरान शरीफ के ज्ञानदाता का कहना है कि तुम काफिरों का कहा ना मानना क्योंकि वे कबीर को अल्लाह नहीं मानते हैं। इस कुरान शरीफ की दलीलों की सहायता से उस कबीर के लिए संघर्ष(जिहाद) करना (हिंसा करने को नहीं कहा गया है) और मेरे द्वारा दिये गए निर्देश पर कायम रहना।

आयत 25:58

वा तवक्कल 'अलल'- हरुलिजी ला यमुतु वा सब्बिह' बिहमदिहि वा कफा बिहि बिजुनूबी इबादिहि खबीरा (कबीरा)”

कुरान शरीफ का ज्ञान दाता किसी अन्य अल्लाहताला के बारे में जानकारी दे रहा है; पूर्ण परमात्मा कबीर परमेश्वर (अल्लाह अकबर) का वर्णन कर रहा है। वह कहता है कि "ओ पैग़म्बर उस 'जिंदा' पर भरोसा करो जो तुम्हे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले। वह अविनाशी है, उसकी इबादत करो।" इसका अर्थ यह हुआ कि परमात्मा क़ुरान शरीफ के ज्ञानदाता से भिन्न है, जिसकी वह इबादत करने को कह रहा। वह परमात्मा अपने भक्तों के पापकर्म को भी काट देता है।

वह अल्लाहु अकबर सूक्ष्मवेद(कबीर परमात्मा द्वारा दिए गए अमृत रूपी ज्ञान) में स्वयं कह रहा है कि 'मैं मोहम्मद को वहां(अपने लोक) लेकर गया'

"इच्छा रूपी वहां नहीं रह्यो,

उल्ट मोहम्मद महल पठाया, गुज़ बिरज एक कलमा ले आया।

रोज़ा बंग नमाज़ दई रे, बिस्मिल की नहीं बात कही रे।।"

उन्होंने हज़रत मोहम्मद को अपना ज्ञान समझाने की कोशिश की। लेकिन उनके पास पृथ्वी पर तब तक बहुत सारे अनुयायी थे और महिमा हो गयी थी, इसलिए वह सहमत नहीं हुए। उन्होंने हज़रत मोहम्मद को वापस उनके शरीर में छोड़ा। कलमा, रोज़ा और नमाज़ बेशक हज़रत मोहम्मद ने दिए लेकिन उन्होंने कभी भी बिस्मिल(बलि देने) की बात नहीं की।

आयत 25:59

"अल्ल्जी खलकस्समावाति वल्अर्ज व मा बैनहुमा फी सित्तति अय्यामिन् सुम्मस्तवा अलल्अर्शि अर्रह्मानु फस्अल् बिही खबीरन्(कबीरन्)।।59।।"

हजरत मुहम्मद को कुर्आन शरीफ बोलने वाला प्रभु (अल्लाह) कह रहा है कि वह कबीर प्रभु वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन अपने सत्यलोक(अविनाशी लोक) के सिंहासन पर विराजमान हो(बैठ) गया।

उस पूर्ण परमात्मा(कबीर) को प्राप्त करने की विधि तथा वास्तविक ज्ञान तो किसी तत्वदर्शी संत(बाखबर) से पूछो, मैं (कुर्रान का ज्ञानदाता) नहीं जानता।

पवित्र फ़ज़ल-ए-अमल में अल्लाह कबीर

फज़ाइल-ए-ज़िक्र, आयत 1 में लिखित है कि अल्लाह कबीर है। वह पूर्ण परमात्मा/सर्वशक्तिमान कबीर ही हैं।

'वल्लत कबीर बुल्लाह आला माह दकूबवला अल्लाह कुमदर गुरु'

हिंदी- तुम कबीर अल्लाह की बढ़ाई बयां करो l इस बात पर तुम को हिदायत फरमाए ताकि अल्लाह ताला का शुक्र कर सको l वह कबीर अल्लाह तमाम पोशीदा और जाहिर चीजों को जानने वाला है l वह कबीर आलीशान रुतबे वाला है l कबीर गुनाहों से बचाने वाला है l

ऊपर की तमाम आयतों से यह जाहिर होता है कि कबीर ही अल्लाह है। यह सिद्ध करता है कि कुरान शरीफ का बोलने वाला अल्लाहताला(पूर्ण परमात्मा) नहीं है। जबकि पूरा मुस्लिम समाज उसी को अल्लाहताला जानकर उसकी(कुर्आन ज्ञान दाता की) इबादत कर रहा है।

क़ुरान शरीफ़ की तालीम किसने दी?

संदर्भ

हजरत मोहम्मद की जीवनी, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, लेखक: इनायतुल्लाह सुब्हानी, अनुवादक: नसीम गाज़ी फलाही, प्रकाशक: मर्कजी मक्तबा, इस्लामी पब्लिशर्स, डी -307, दावत नगर, अब्दुल फ़ज़ल एन्क्लेव, जामिया नगर, नई दिल्ली मुद्रक: एच.एस. ऑफसेट प्रिंट, नई दिल्ली -2

विस्तृत विवरण पृष्ठ संख्या 59 पर उल्लिखित है।

ब्रह्म, इन इक्कीस ब्रह्मांड (जहां सभी आत्माएं फंसी हैं) के स्वामी/मालिक को 'क्षरपुरुष/काल' भी कहा जाता है। इस काल ने ही चारों वेदों, गीता, कुरान शरीफ और बाइबिल का ज्ञान (न चाहते हुए भी) दिया है।

इस ‘काल ब्रह्म’ ने कुरान शरीफ/कुरान मजीद का ज्ञान जिब्रील नामक फरिश्ते के माध्यम से हजरत मोहम्मद को दिया। मुस्लिम समाज का मानना ​​है कि कुरान शरीफ के ज्ञान (जिसे वे अपने अल्लाह के रूप में मानते हैं) को उन्होंने एक फरिश्ते के रूप में हजरत मोहम्मद के जरिये बिना किसी गलती के दिया। नतीजतन, पूरे मुस्लिम समुदाय का मानना ​​है कि कुरान शरीफ का सूत्रधार अल्लाहु अकबर है और अज्ञानतावश सभी मुस्लिम उसकी(काल की) इबादत करते हैं।

पवित्र बाइबिल- तौरात, इंजिल और ज़बूर का ज्ञान भी इस 'काल' ने ही दिया। दाऊद पर पवित्र पुस्तक ज़बूर का अवतरण हुआ, मुसा जी पर पवित्र पुस्तक तौरात का अवतरण हुआ और ईसा जी पर पवित्र पुस्तक इंजील का अवतरण इस काल ब्रह्म द्वारा किया गया।

पवित्र गीता जी का ज्ञान भी काल ने श्री कृष्णजी के शरीर में प्रवेश करके दिया था। गीता अध्याय ११, श्लोक ३२ में वह स्वयं को 'काल' कहता है। जब अर्जुन उसकी बातों से सहमत नहीं था तब उसने अर्जुन को अपना विकराल रूप दिखाया। इतना भयंकर रूप देखकर अर्जुन जैसा योद्धा भी कांपने लगा, और काल ने जो भी कहा, उससे सहमत हो गया।

बाखबर/इल्मवाला/तत्त्वदर्शी संत कौन हैं?

कुरान शरीफ के ज्ञान का दाता एक बाखबर/ इल्मवाला/ तत्त्वदर्शी संत से पूर्ण परमेश्वर/अल्लाह की जानकारी पूछने का विकल्प छोड़ देता है। वह सर्वोच्च ईश्वर की जानकारी नहीं रखता है। वह किसी 'बाखबर' अर्थात 'तत्त्वदर्शी संत' से अल्लाह की जानकारी प्राप्त करने का निर्देश दे रहा है।

कुरान शरीफ- सूरत अल फुरकान 25:59

कबीर प्रभु वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन अपने सत्यलोक(अविनाशी लोक) के सिंहासन पर विराजमान हो(बैठ) गया। उसके बारे में किसी बाख़बर से पूछो।

बाख़बर अल्लाह से परिचित महात्मा हैं जिन्हें सभी पवित्र ग्रंथों का पूरा ज्ञान है। उन्हें तत्त्वदर्शी संत/धीरानाम कहा जाता है। वह इस सृष्टि की रचना का जानने वाला है, इसका मतलब है कि वह इस ब्रह्मांड के निर्माण के बारे में पूरी तरह से जानता है।

अल्लाहु अकबर (कबीर) की सच्ची परिभाषा और अर्थ क्या है?

'अल्लाहु अकबर' का अर्थ है 'ईश्वर सबसे महत्वपूर्ण है या अल्लाह/ईश्वर सबसे महान है’। यह इस्लाम में एक प्रचलित उद्गार है। इसका उपयोग किसी भी स्थिति में अल्लाह के ऊपर विश्वास की घोषणा के तौर पर किया जाता है।

आगे अदान/अजान के कुछ भाग दिए गए है। इसमें 'अल्ला' का अर्थ है सबका मालिक/सर्वशक्तिमान।

"अल्लाहु अकबर, आशादू अल्ला इलाहा इल्लल्लाह"

भावार्थ: भगवान की शान सभी से अधिक होती है, मैं इस बात का गवाह हूं कि उस अल्लाह के सिवा कोई भगवान नहीं है।

अज़ान/अदान (पूजा करने का आह्वान) एक प्रार्थना समारोह है जो इस्लाम में काफी प्रचलित है। इसमें 'अल्लाहु अकबर' से बार-बार एक छोटी प्रार्थना छंद के जरिये फरियाद जाता है। सूक्ष्मवेद में इस तरह की पूजा के बारे में उल्लेख है।

"इच्छा रूपी वहां नहीं रह्यो,

उल्ट मोहम्मद महल पठाया, गुज़ बिरज एक कलमा ले आया।

रोज़ा बंग नमाज़ दई रे, बिस्मिल की नहीं बात कही रे।।"

पूर्ण परमात्मा कबीर ने बताया है, कि मैं मोहम्मद को वहाँ शाश्वत स्थान (सतलोक) में लेकर गया और जब हज़रत मोहम्मद जी वापस आए, तो उन्होंने तीन बातें बताईं- रोजा रखना, बंग देना और नमाज करना। पर उन्होंने बिस्मिल की बात बिल्कुल भी नहीं कही

इस्लाम में अल्लाह का क्या अर्थ है?

अल्लाह शब्द इस्लाम में सर्वोच्च/सर्वशक्तिमान ईश्वर का पर्याय है जो दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। क़ुरान शरीफ़- सूरत फुरकान 25, आयत-52 इस बात का प्रमाण देता है कि अल्लाह ही वह 'एक' ईश्वर है।

“फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन”

यहां स्पष्ट रूप से 'कबीरन' शब्द वर्णित है। हम इसे 'कबीर/ कबीरा/ कबीरन/ खबीरा/ खबीरन' कह सकते हैं। इस आयत से यह स्पष्ट है कि ब्रह्मांड का निर्माता, सर्वशक्तिमान अल्लाह कबीर है।

इस्लाम में अल्लाहु अकबर या भगवान कौन है?

सातवीं शताब्दी ईसवी में अरब में पैगंबर मुहम्मद द्वारा फैलाया गया इस्लाम, अल्लाह को एकमात्र ईश्वर के रूप में देखता है और वे मानते हैं कि वह दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। वे कुरान शरीफ/मज़ीद को सबसे पवित्र ग्रंथ मानते हैं जो अल्लाह ने अपने पैगंबर मुहम्मद को दिया था। इस्लाम में पैगम्बर की प्रथा को समझने के लिए आदम, नूह, अब्राहम, मूसा और सुलेमान का उल्लेख करना अनिवार्य है। हज़रत मुहम्मद इस श्रृंखला में अंतिम स्थान पर आते हैं।

कुरान शरीफ - सूरत फुरकान 25:53 - और वही है जिसने दो दरियाओं को मिलाया (मिला कर चलाया) यह (इस तरफ का पानी) खुशगवार शीरीं है और यह (दूसरा) तल्ख़ बदमज़ा है, और उसने उन दोनों के दरमियान(एक गैर महसूस पर्दा और मजबूत आड़ बनाई।

कुरान शरीफ के ज्ञान दाता कहते हैं, कि महान परमात्मा कबीर वह है जिसने छह दिनों में पूरी सृष्टि का निर्माण किया और सातवें दिन तख़्त पर जा विराजा। उसने ही पृथ्वी और आकाश के बीच की सारी चीज़ें बनायीं। वह अल्लाह कबीर ही है, जिसने दो प्रकार की दरियाओं को बना दिया, एक का पानी मीठा है, प्यास बुझाने के लिए, तो दूसरा नमकीन और कड़वा है, दोनों के बीच एक विभाजन भी सुनिश्चित कर दिया।

कुरान शरीफ - सूरत फुरकान 25:54 - और यह वही है जिसने पानी के बशर हमें पैदा किया। फिर बनाये हमारे नसब (नसबी रिश्ते) और ससुराल। तेरा रब क़ुदरत की ताक़त वाला है।

ये (अल्लाह) वह है जिसने मनुष्य को पानी की एक बूंद के साथ बनाया और उसे किसी का बेटा या बेटी, बहु या दामाद बना दिया, और आपका भगवान अत्यंत सक्षम है।

कुरान शरीफ- सूरत फुरकान 25:55 - लेकिन वे अल्लाह के अलावा किसी और की बन्दगी करते हैं। जो ना तो उनका नफ़ा कर सकता है और ना ही नुकसान। और काफिर अपने रब के खिलाफ पुश्त पनाही करने वाला है।

ऐसा कहा जाता है कि काफिर अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा करते हैं, जो न तो उन्हें कोई लाभ प्रदान कर सकता है और न ही उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। और काफिर हम सबके मालिक से दूर हो गए हैं, अर्थात अल्लाह के विमुख हो चुके हैं।

कुरान शरीफ - सूरत फुरकान 25:56 - और (ऐ मुहम्मद!) आपको और काम नहीं दिया, सिवाय अच्छी ख़बर देने और एक आगाह करने वाले के।

भावार्थ- क़ुरान शरीफ का ज्ञान दाता कहरहा है कि ओ-पैगंबर मैंने आपको अच्छी खबरें और उन्हें कर्मफल की चेतावनी देने के लिए भेजा है।

कुरान शरीफ - सूरत फुरकान 25:57 - उन्हें कहो कि "इसके लिए मैं तुमसे कोई अजर नहीं मांगता, मगर जो शख्स चाहे अपने रब तक रास्ता इख़्तियार कर ले।"

भावार्थ- उन्हें बताओ कि मैं उस अल्लाह के आदेश के लिए कोई शुल्क नहीं मांगता, लेकिन, जिसे भी अल्लाह चाहिए उन्हें एक रास्ता तो अपनाना ही पड़ेगा।

इससे स्पष्ट हो गया है कि इस्लाम में अल्लाहु अकबर (ईश्वर) कबीर है।

संदर्भ:

पुस्तक- हजरत मोहम्मद की जीवनी, सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, लेखक: इनायतुल्लाह सुब्हानी, अनुवादक: नसीम गाज़ी फलाही, प्रकाशक: मर्कजी मक्तबा, इस्लामी पब्लिशर्स, डी -307, दावत नगर, अब्दुल फ़ज़ल एन्क्लेव, जामिया नगर, नई दिल्ली मुद्रक: एच.एस. ऑफसेट प्रिंट, नई दिल्ली -2

पुस्तक- जीवनी हजरत मोहम्मद(s.a.w.) हिंदी, इस्लामिक साहित्य ट्रस्ट, प्रकाशन सं. 81, सर्वाधिकार प्रकाशक धिन्नाम, मूल पुस्तक मोहम्मद (अरबी-उर्दू) का हिंदी में अनुवाद।

कौन थे बाबा आदम?

संदर्भ:

पुस्तक- 'आओ जैन धर्म को जानें', लेखक- प्रवीण चंद्र जैन, एम.ए. शास्त्री, जम्मू द्वीप शास्त्री, प्रकाशक- श्रीमती सुनीता जैन, जम्मुद्वीप, हस्तिनापुर, मेरठ, उत्तर प्रदेश

जब इन पवित्र वेदों, पवित्र गीता की उत्पत्ति हुई, तो कोई धर्म नहीं था और उसे आज हम सनातन धर्म कहते हैं। ईश्वर सभी चार युगों में सशरीर आता है, वह हमें 'आदि सनातन धर्म' के बारे में अवगत कराता है। आदि सनातन धर्म से ही सारे धर्म निकले, सबसे पहले बौद्ध फिर हिन्दू, मुसलमान इत्यादि। बाद में, सनातन धर्म से खुद बाबा आदम निकले, उनके बाद मुशायले-सलाम, हज़रत मूसाजी, हज़रत दाऊद जी, हज़रत अब्राहिम जी, हज़रत इसा जी, हज़रत मोहम्मद जी। बाबा आदम ने ही अपने पूर्वजन्म में श्री ऋषभदेव जी के रूप में जैन धर्म की शुरुआत की। मृत्यु के बाद वे बाबा आदम के रूप में प्रकट हुए।

अल्लाह का जन्म कैसे हुआ?

संदर्भ:

कबीर सागर सम्पूर्ण 11 भाग, कबीरपंथी भारत पथिक, स्वामी युगलानंद (बिहारी) द्वारा परिष्कृत, मुद्रक और प्रकाशक खेमराज श्री कृष्ण दास प्रकाशन, मुंबई। अध्यक्ष: श्री वेंकटेश्वर प्रेस, खेमराज श्रीकृष्ण दास मार्ग, मुंबई। अध्याय कबीर वाणी, बोधसागर पृष्ठ संख्या १३६-१३

सृष्टि रचना के विस्तृत विवरण से पता चलता है कि सर्वोच्च पिता, सर्वशक्तिमान, पूरे ब्रह्मांड का निर्माता, हम सभी जीवों का स्वामी 'कविर्देव’ है। कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा हैं, अल्लाहु अकबर, 'परम अक्षर ब्रह्म' है। वह अविनाशी भगवान माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता है। वह मानव के आकार में है। उनका शरीर बहुत ही भव्य(प्रकाशमय) है।

क्या अल्लाह ही जगत का निर्माता है?

अल्लाहु अकबर, पूर्ण ब्रह्म, ने छह दिनों में ब्रह्मांड का निर्माण किया और सातवें दिन सिंहासन पर जा बैठे, कुरान शरीफ यह स्पष्ट करता है। कुरान शरीफ के ज्ञान दाता कहते हैं की वह अल्लाहु अकबर ही है जिसने छह दिनों में संसार को बनाया था और सातवें दिन सिंहासन पर जा बैठे; उसकी सम्पूर्ण जानकारी एक तत्त्वदर्शी संत से पूछो। मुझे पूरी जानकारी नहीं है।

सृष्टि रचना का कार्य पूर्ण करने के बाद सातवें दिन परमपिता परमेश्वर चले गए। तब काल ने इस पृथ्वी को अपने नियंत्रण में लिया और अपने तीनों पुत्रों - ब्रह्मा, विष्णु और शिव को पृथ्वी के संचालन का कार्यभार सौंप दिया। इसलिए बाद में उन्होंने ही नियंत्रण संभाला। जब ईश्वर ने आदम(एडम) और हव्वा(ईव) बनाया, मुसलमानों का मत ​​है कि आदम को उन्होंने अपनी शब्द शक्ति से और हव्वा को आदम की हड्डी से बनाया, तब ईश्वर ने उन्हें स्वतंत्र छोड़ दिया। तब इस काल (कुरान शरीफ के ज्ञान के दाता) ने नियंत्रण ले लिया। सूक्ष्मवेद में कहा गया है कि ‘वही मुहम्मद, वही महादेव है और वही आदम, वही ब्रह्मा’। यह साबित करता है कि अल्लाह कबीर ही सर्व सृष्टि का जनक है।

इस्लाम में कितने भगवान हैं?

संदर्भ: पुस्तक- सम्पूर्ण जीवन अध्ययन 'बाइबिल'

इस्लाम का सबसे विश्वसनीय धार्मिक ग्रंथ पवित्र कुरान शरीफ/मजीद है और मुसलमानों का मानना ​​है कि अल्लाह केवल वह ईश्वर/खुदा है, जिसने कुरान शरीफ का ज्ञान दिया है। लेकिन सबूत साबित करते हैं कि कुरान शरीफ का ज्ञानदाता अल्लाहताला नहीं है। वह किसी अन्य भगवान के बारे में उल्लेख कर रहे हैं जिसकी जानकारी कोई बाखबर/इलमवाला/तत्त्वदर्शी संत प्रदान करेंगे।

इस्लामी पवित्र पुस्तकों एवं कुरान शरीफ के अनुसार अल्लाहु अकबर (भगवान) कौन है?

संदर्भ:

स्वर्गीय पुस्तक 'तौरात' से विश्व का निर्माण। आसमानी किताबें, तौरात, जबूर, इंजिल उर्दू लिपि में। कॉपीराइट नोटिस, बीएसआई द्वारा प्रकाशित, 206 महात्मा गांधी रोड, बैंगलोर, ब्रिलिएंट प्रिंटर प्रा. लिमिटेड, बैंगलोर 94।

मुसलमानों का मत है कि बाबा आदम पहले पैदा किये गए, और उनकी हड्डी से उसकी पत्नी हव्वा बनाई गई थी, और फिर सभी मनुष्यों का जन्म उनके द्वारा किया गया। मुस्लिम समाज बाबा आदम को अपना पहला आदमी मानते हैं, और वे यह भी मानते हैं कि जिसने कुरान शरीफ का ज्ञान दिया था, वह खुद कुरान शरीफ में कहता है कि, उसने पहले पवित्र पुस्तकें दी थीं। वे मानते हैं कि ये चार पवित्र पुस्तकें हैं - पवित्र तौरात, पवित्र इंजिल, पवित्र जबूर, पवित्र कुरान शरीफ या इसे कुरान मजीद भी कहा जाता है।

मुस्लिम भाइयों का यह भी कहना है कि कुरान शरीफ केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि इस दुनिया के सभी इंसानों के लिए है। इसका मतलब है कि यह हमसे पहले के और भविष्य में सभी के लिए लागू है। पवित्र कुरान शरीफ, सूरत फुरकानी 25, आयत 52-59 साबित करता है कि अल्लाहु अकबर कबीर है।

जन्म/ पुनर्जन्म/ पुन: निर्माण/ क़यामत का दिन के संबंध में मुस्लिमों की धारणाएं

संदर्भ

1.कुरान शरीफ, सानुवाद सटिप्पण, शास्त्रीय अरबी पद्धति में नागरी लिपि, अनुवादक : नंद कुमार अवस्थी, शेरवानी संस्करन, प्रकाशक : लखनऊ पुस्तक घर, मौसमबाग, सितापुर रोड, लखनऊ, 17 वां संस्करण, गॉस्पेल प्रिंटर।

2.मुख्तसर तफ़सीर अहसानुल बयान तज़ुर्मा, मौलाना मोहम्मद जूनागढ़ी तफ़सीर: हाफ़िज़ सलाहुद्दीन यूसुफ़, हिंदी तज़ुर्मा: तर्तेब मोहम्मद ताहिर 'हनीफ', दरूसलम प्रकाशक और वितरक।

3.तज़ुर्मा, मौलाना मोहम्मद। फतेह खान साहब, मौलाना अब्दुल मजीद सरवर साहब, प्रकाशक फरीद बुक डिपो (प्रा.) लिमिटेड, दरियागंज, नई दिल्ली।

मुस्लिम पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हैं। वे मानते हैं कि पुनर्जन्म नहीं होता। वे कहते हैं कि एक बार जब आप पैदा होते हैं, तो जिस तरह से आपकी मृत्यु का निर्णय ईश्वर द्वारा किया जाता है, वैसा ही होता है, आपको कब्रों में दफन कर दिया जाएगा और कयामत के दिन, जब पूरी दुनिया का विनाश होगा कोई पृथ्वी नहीं होगी, जब सभी चीजों का विघटन होगा, कोई आकाश नहीं होगा, तो आप सभी को उन कब्रों से निकाल लिया जाएगा और आपको जीवित कर दिया जाएगा। कुरान शरीफ के ज्ञान का पालन करने वाले और उनके निर्देशों के अनुसार पूजा करते रहने वाले सभी लोग स्वर्ग जाएंगे, लेकिन जो लोग उनका पालन नहीं करते, वे अलग-थलग रहते, उपद्रव करते हैं, उन्हें नरक भेजा जाएगा। वे स्वर्ग को 'बहिश्त' और नरक को, 'दोजख’ कहते हैं। उनका मानना है कि फिर वे कभी जन्म नहीं लेंगे।

इसमें अनुयायियों की गलती नहीं है, बल्कि मुस्लिम धर्म के उन काजियों की गलती है जो इन पवित्र ग्रंथों के रहस्य को समझ नहीं पाए। वे कुरान शरीफ का अर्थ नहीं समझ सके और सभी मुसलमानों को भी गुमराह कर दिया। उन्होंने यही निष्कर्ष निकाला कि आप पैदा हुए हैं और जब आप मरेंगे तब आपको कब्रों में दफन किया जाएगा, जब पूरी दुनिया का विनाश होगा, आखिरात, अल्लाह अपनी शब्द शक्ति के साथ आप सभी को जीवित कर देगा। तब सभी स्वर्ग या नरक में चले जायेंगे। इसको वे अंत मानते है, मुसलमानों की मजबूत धारणा है की फिर उनके साथ और कुछ नहीं होगा।

कुरान शरीफ - सूरह अल अनबिया 21: 104 - जिस दिन हम आसमान लपेट देंगे, जैसे तहरीर के कागज़ का तुमार लपेटा जाता है। जैसे मैंने पहली बार पैदाइश की थी में उसे फिर लौटा दूंगा। यह वादा हमपर (हमारे जिम्मे) है, और बेशक हम पूरा करने वाले हैं!

भावार्थ- कुरान शरीफ के ज्ञान दाता कहते हैं जिस तरह मैंने निर्माण किया था, मैं इसे समेट लूंगा, और फिर मैं निश्चित रूप से फिर से बनाऊंगा। कुरान शरीफ पुष्टि करता है कि भगवान इसे फिर से बनाएंगे। जैसा उन्होंने शुरूआत में किया था, फिर से वही करेंगे।

कुरान शरीफ, सूरह मुल्लकी 67, आयत 1 और 2 - 'वह जिसने पैदा किया मौत और जिंदगी को', इसका अर्थ पुनर्जन्म हुआ करता है।

भावार्थ- सच्चाई यही है कि पुनर्जन्म होता है। अब प्रश्न उठता है कि यह कयामत का दिन कब आता है? सद्ग्रन्थ प्रमाणित करते हैं कि जब ब्रह्मा जी का एक दिन खत्म हो जाएगा(Link Page) तब पृथ्वी पर भयंकर विनाश होगा, इन तीनों क्षेत्रों स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में। इस दिन इस धरती पर मौजूद सभी जीव नष्ट हो जाएंगे, चारों तरफ पानी होगा। इसे कयामत का दिन कहा जाता है।

क्या अल्लाह मानव के आकार में है

अल्लाहु अकबर सबसे ऊपर उस परम निवास स्थान पर रहता है... "अर्श कुर्स पर अल्लह तख्त है"। वह इंसानों की तरह दिखाई देता है। वह मनुष्य सदृश है। वह मनुष्य रूप में सशरीर वहाँ से उतरता है। वह आकर अपनी पुण्य आत्माओं को अपना सही ज्ञान बताता है। वो अल्लाहु अकबर, वह महान भगवान, वह सर्वशक्तिमान ईश्वर स्वयं अपने संसार की रचना के बारे में बताता है। संतों की भाषा मे प्रचलित शब्द 'सतलोक' का अर्थ है अविनाशी लोक। ईश्वर 'सतलोक' में अपने सिंघासन पर विराजमान है। उपरोक्त सभी बातें यह साबित करती हैं कि वह ईश्वर सशरीर एवं नर-आकार(मानव सदृश) है।

चारों युग में मेरे संत पुकारे, कूक कहा हम हेल रे,

हीरे माणिक मोती बरसें, ये जग चुगता ढेल रे।।

भगवान सभी चार युगों में आते हैं, अच्छी आत्माओं से मिलते हैं। उन्होंने बांधवगढ़ के आदरणीय धर्मदास जी, आदरणीय मलूकदास साहेब जी, आदरणीय नानक साहेब जी, आदरणीय दादू साहेब जी, आदरणीय गरीब दास साहेब जी गाँव-छुड़ानी जिला-झज्जर(हरियाणा) और आदरणीय घीसादास साहेब जी गाँव-खेखड़ा जिला-मेरठ(उत्तरप्रदेश) से मुलाकात की। आदरणीय रामानंद जी, जो काशी में एक प्रसिद्ध ब्राम्हण थे, परमेश्वर ने उनसे मुलाकात की। इन महापुरुषों ने ईश्वर के शाश्वत स्थान को देखा। उन महापुरुषों ने ईश्वर की स्थिति के बारे में बताया। भगवान कैसा है? वह क्षेत्र कैसा है? वह स्थान कैसा है? जैसा उन्होंने देखा उन लोगों ने सब कुछ बताया और अपने अमर वाणी में लिखा।

भगवान कबीर, 600 साल पहले काशी-उत्तरप्रदेश(लिंक पेज-कबीर सागर) भारत में आए और एक बुनकर(धानक/ जुलाहा) की भूमिका की, एक कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए। वह अविनाशी परमात्मा माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता है, वह सशरीर आता है और सशरीर जाता है। यह साबित करता है कि भगवान/अल्लाह मानव स्वरूप में है।

हम अल्लाहु अकबर (कबीर) को कैसे देख सकते हैं?

मुस्लिम ही नहीं इस संसार के सभी लोग मानते हैं कि भगवान/अल्लाह निराकार है क्योंकि उनके पास सही आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है। मुसलमानों का मानना ​​है कि ईश्वर शरीरविहीन(बिना शरीर वाला) है। मुसलमानों का मानना ​​है कि 'खान-ए-काबा' अल्लाह का घर है और अल्लाह वहां बैठा है, इसके बावजूद वे कहते हैं कि अल्लाह बेचून है और उसका ज्ञान हर जगह है। उसकी शक्ति सर्वत्र है। उसका अधिकार हर जगह है। वह सर्वव्यापी है। मृत्यु के बाद जब वे स्वर्ग जाएंगे तो इंशाल्लाह (ईश्वर ने चाहा तो) वे अल्लाहु अकबर का चेहरा देखेंगे। उनका मानना ​​है कि विभिन्न हदीसों में से एक में इसका उल्लेख है।

वास्तविकता यह है कि ईश्वर मानव रूप में है। उसने इंसानों को अपने जैसा बनाया। सभी पवित्र ग्रंथ पर्याप्त प्रमाण प्रदान करते हैं। अल्लाह कबीर ने जिन महापुरुषों को 'सचखंड' का गवाह बनाया, उन्होंने ईश्वर को इंसानों जैसा दिखने वाला बताया। अल्लाह भी एक इंसान की तरह है। अतः हम अल्लाहु अकबर का चेहरा जरूर देख सकते हैं।

संदर्भ: चार वेद, गीता जी, गुरुग्रंथ साहेब, बाइबल और कुरान शरीफ

कुरान शरीफ में सर्वोच्च ईश्वर/अल्लाहु अकबर (कबीर) के गुण

'सुरह-अल-इखलास' धार्मिकता का पैमाना है। मुसलमान मानते हैं कि जो भी भगवान की पूजा करता है, अगर वह जानना चाहता है कि क्या वह सही अल्लाह/खुदा/भगवान है, तो मापदंड 'सूरह-अल-इखलास' होना चाहिए। ये एक मापने का पैमाना है कि वह सक्षम भगवान('कादिर' अल्लाह) सर्वशक्तिमान है या नहीं। सर्वशक्तिमान ईश्वर के बिना मुक्ति प्राप्त नहीं की जा सकता।

कुरान में सुरह-अल-इखलास के छंद 1-4 में ईश्वर की अवधारणा पूरी तरह से अल्लाह कबीर(अल्लाह कबीर) पर लागू होती हैं।

कुरान शरीफ - सूरह अल इखलास 112: 1 - 4

112: 1 - कह दीजिये, "वह अल्लाह एक है,

112: 2 - अल्लाह बेनियाज़ है,

112: 3 - ना उसने किसी को जना, और ना किसी और ने उसको जना,

112: 4 - और उसका कोई हमसर नहीं "

निष्कर्ष

कुरान शरीफ का ज्ञान देने वाला पूर्ण परमात्मा नहीं है। वह दयावान नहीं है। वह किसी की भी नियति नहीं बदल सकता। यदि किसी ने अच्छे कर्म किए हैं, तो उसे यहां खुशी मिलेगी और अगर किसी ने पाप कर्म किये हैं, तो उसका फल भी वह निश्चित रूप से प्राप्त करेगा। वह इसे बदल नहीं सकता। केवल पूर्ण परमात्मा(अल्लाह कबीर) ही इसे बदल सकता है, जिसे अल्लाहताला, सर्वव्यापी ईश्वर, शक्तिशाली भगवान कहा जाता है। संतों की भाषा में उन्हें 'सतपुरुष’ कहा जाता है, कुरान शरीफ की भाषा में उन्हें अल्लाहु अकबर/अल्लाहताला कहा जाता है। उसका नाम कबीर है। वह हमारे शुभचिंतक हैं। वह बहुत दयालु है। वह अल्लाह हमारे दुखों को नष्ट कर सकता है। केवल कबीर परमेश्वर ही हमारे पापकर्मों को काट सकता है।

Dr Zakir Naik vs Sant Rampal Ji