हरियाणा और कई राज्यों में 2025 का मानसून किसानों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा। लगातार हुई भारी बारिश, बाढ़ और जलभराव से हिसार, रोहतक, भिवानी, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद, रेवाड़ी, झज्जर समेत कई जिलों में बड़ी मात्रा में फसलें खराब हुईं। The Tribune और The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, 6 सितंबर 2025 तक 2,897 गांवों के करीब 1.69 लाख किसानों ने लगभग 9.96 लाख एकड़ फसल के नुकसान की जानकारी दर्ज कराई थी।
हिसार जिले में 276 गांव प्रभावित हुए। करीब 30,000 किसानों ने लगभग 2 लाख एकड़ फसल के नुकसान की जानकारी दी। कई जगह खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण अगली फसल की बुवाई पर भी असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया। हिसार के लितानी गांव में करीब 3,000 एकड़ जमीन पानी में डूब गई और लगभग 200 परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगह जाना पड़ा। सरकार ने किसानों के नुकसान का रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के जरिए प्रक्रिया शुरू की और बाद में प्रभावित गांवों की संख्या भी बढ़ाई।
कुल मिलाकर, 2025 की बाढ़ और जलभराव ने हरियाणा के किसानों के सामने फसल बचाने, परिवारों को सुरक्षित रखने और अगली फसल की तैयारी जैसी कई बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं। सरकार की ओर से मुआवजे और राहत की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन किसान के लिए उस समय सबसे बड़ी जरूरत तत्काल मदद थी।
क्योंकि खेत में पानी भरा हो तो किसान को केवल मुआवजे के लिए आवेदन नहीं करना होता। उसे सबसे पहले खेत से पानी निकालना होता है। इसके लिए मोटर चाहिए, पाइप चाहिए, डीजल चाहिए और बिजली न हो तो जनरेटर की जरूरत पड़ती है। और सबसे जरूरी बात यह है कि यह मदद समय पर मिले।
जब कई जगह किसानों और ग्रामीणों की प्रशासन से की गई गुहार के बाद भी उनकी तत्काल समस्या का समाधान नहीं हो पाया, तब अनेक ग्रामीण क्षेत्रों के किसान और गांवों के प्रतिनिधि संत रामपाल जी महाराज से मदद की उम्मीद लेकर आगे आए। यहीं से राहत और सहायता का एक ऐसा अभियान सामने आया, जिसमें प्रभावित किसानों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनकी मदद करने का प्रयास किया गया।
भारत की धरती पर समय-समय पर कई संत और महात्मा हुए हैं, जिन्होंने अपना जीवन समाज की सेवा और आध्यात्मिक ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने में लगाया। इसी परंपरा में एक नाम संत रामपाल जी महाराज का भी है।
संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव में हुआ था। सन् 1994 में उनके पूज्य गुरुदेव स्वामी रामदेवानंद जी ने संत रामपाल जी को अपना उत्तराधिकारी बनाया। स्वामी रामदेवानंद जी गरीब दास पंथ से जुड़े एक संत थे। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज अपनी जे.ई (Junior Engineer) की नौकरी त्यागकर जनकल्याण के कार्यों में जुट गए। इसके बाद वर्ष 1999 में रोहतक के करौंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना की गई।
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संत रामपाल जी महाराज एक आध्यात्मिक गुरु के साथ-साथ समाजसेवी संत भी हैं। वर्ष 2025 और 2026 में किसानों की मदद तथा बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए किए गए राहत कार्यों में संत रामपाल जी महाराज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के खेतों में जमा पानी निकालने के लिए पाइप, मोटर, केबल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। हरियाणा में हिसार, जींद, भिवानी, रोहतक और फतेहाबाद सहित विभिन्न जिलों के अनेक गांवों में जलभराव से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं। ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी ने राहत अभियान चलाकर खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था की, जिससे किसानों ने अपनी कृषि भूमि बचाई और उसको अगली फसल के लिए तैयार किया।
हिसार जिले के खेदड़ गांव में संत रामपाल जी ने 44,000 फीट पाइप, पांच 15-एचपी मोटर और आवश्यक विद्युत सामग्री उपलब्ध कराई। पंघाल गांव में लगभग 20 लाख रुपये की राहत सामग्री दी गई, जबकि जेवरा गांव में भी जल निकासी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए।
इसी प्रकार ढँढेरी गांव में 6,500 फीट पाइप और तीन 15-एचपी मोटर तथा फ़रमाना खास गांव में 33,000 फीट पाइप और मोटर उपलब्ध कराई गईं। बनभौरी, भीखेवाला, सरसौद, दनौदा कलां, शिकारपुर सहित कई अन्य गांवों में भी बाढ़ प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की सहायता की गई। कुल मिलाकर संत रामपाल जी महाराज ने 400 से भी अधिक गांवों को बाढ़ से मुक्त किया।
इन राहत कार्यों का उद्देश्य केवल बाढ़ के दौरान तत्काल सहायता पहुंचाना ही नहीं था, बल्कि खेतों में लंबे समय से जमा पानी को निकालकर किसानों की जमीन को खेती योग्य बनाना और उनकी आजीविका को फिर से पटरी पर लाने में मदद करना भी था। वर्ष 2026 में भी संत रामपाल जी महाराज ने किसानों और बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए समाजसेवा के कार्य जारी रखे।
संत रामपाल जी महाराज के इन सभी सम्मानों की मूल आधारशिला उनकी अन्नपूर्णा मुहिम है। 20 मार्च 2025 को शुरू की गई इस मुहिम के तहत समाज के जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े, शिक्षा, चिकित्सा सहायता और पक्के घर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की मदद करना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतों से वंचित न रहे।
इस मुहिम के तहत संत रामपाल जी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में राहत सामग्री पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई। इसमें पाइप, मोटर, केबल और खेती के लिए आवश्यक अन्य उपकरण शामिल थे। इनकी मदद से किसान अपने खेतों से पानी निकालकर अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार कर सके।
यह राहत अभियान हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, जम्मू, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली तक पहुंचा। संत जी ने अपने अनुयायियों को निर्देश दिया कि किसी भी किसान का खेत पानी में डूबा नहीं रहना चाहिए और जब तक खेत अगली फसल के लिए तैयार न हो जाएं, तब तक सेवा जारी रखी जाए।
इस राहत अभियान के माध्यम से हजारों किसान परिवारों को मुश्किल समय में सहायता मिली और उन्हें अपनी खेती दोबारा शुरू करने में मदद मिली। विशेष रूप से वर्ष 2025 और 2026 में उनके द्वारा की गई किसान सेवा और बाढ़ राहत कार्यों ने हरियाणा के सैकड़ों गांवों में एक नई उम्मीद जगाई।
31 अक्टूबर 2025 को महम चौबीसी खाप पंचायत ने संत रामपाल जी को उनके व्यापक मानवीय और बाढ़-राहत प्रयासों के लिए "मानवता रक्षक" (Protector of Humanity) की उपाधि से विभूषित किया। महम चौबीसी खाप हरियाणा की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक खाप पंचायतों में से एक है। इस खाप द्वारा दिया गया यह सम्मान संत रामपाल जी की सेवाओं की सामाजिक और नैतिक स्वीकृति का प्रतीक था।
Watch : संत रामपाल जी महाराज का मानवता रक्षक सम्मान: महम चौबीसी खाप (अक्टूबर 2025)
8 नवंबर 2025 को धनाना गांव में एक भव्य समारोह के दौरान संत रामपाल जी को "धनाना रत्न" सम्मान से सम्मानित किया गया, जो समाज में उनके अतुलनीय योगदान की एक भावभीनी स्वीकृति थी। धनाना की 36 बिरादरी द्वारा यह सम्मान दिया जाना विशेष रूप से भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि यह उनकी अपनी जन्मभूमि का प्रेम-प्रदर्शन था।
Watch : गांव धनाना, सोनीपत से संत रामपाल जी महाराज के सम्मान समारोह का LIVE TELECAST
9 नवंबर 2025 को गुराना गांव में नौगामा बूरा खाप, पुनिया खाप, भ्याण खाप एवं सरपंच एसोसिएशन बरवाला ने किसानों और आपदा-प्रभावित कृषि क्षेत्रों को व्यापक समर्थन देने के लिए संत रामपाल जी महाराज को "किसान रक्षक सम्मान" प्रदान किया। यह सम्मान इस बात का प्रमाण था कि हिसार जिले के किसानों ने संत जी की सेवाओं को अपने दिल की गहराइयों से स्वीकार किया।
Watch : संत रामपाल जी महाराज का "किसान रक्षक सम्मान समारोह" का गुराना (हिसार) से सीधा प्रसारण | SA NEWS
16 नवंबर 2025 को गुजरात के बनासकांठा में कुंडालियां ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी को किसान रक्षक सम्मान से सम्मानित किया। यह आयोजन इस दृष्टि से विशेष था कि यह हरियाणा की सीमाओं से बाहर गुजरात की धरती पर हुआ, जो यह सिद्ध करता है कि संत जी की सेवाओं का प्रभाव राज्य की सीमाओं से परे जाकर राष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया गया।
Watch : संत रामपाल जी महाराज को मिला किसान रक्षक सम्मान | कुंडालियां, बनासकांठा, गुजरात
24 नवंबर 2025 को हिसार के जाट धर्मशाला में चौधरी सर छोटूराम जयंती आयोजन समिति ने संत रामपाल जी को शॉल एवं स्मृति-चिह्न से सम्मानित किया, जो ग्रामीण और कृषि समुदायों के प्रति उनकी सेवाओं की पहचान थी। सर छोटूराम, जो किसानों और गरीबों के मसीहा माने जाते थे, उनकी जयंती पर संत रामपाल जी को सम्मानित किया जाना एक गहरे प्रतीकात्मक महत्व का क्षण था।
Watch : हिसार जाट धर्मशाला द्वारा सर छोटूराम जयंती पर संत रामपाल जी महाराज को किया गया सम्मानित
7 दिसंबर 2025 को 85 गांवों के प्रतिनिधियों और 12 खाप पंचायतों ने संत रामपाल जी महाराज को "किसान मसीहा सम्मान" (Messiah of Farmers Honour) से नवाजा, जो किसानों और बाढ़-पीड़ित परिवारों के लिए उनके असाधारण कार्यों की पहचान थी। इतनी बड़ी संख्या में खाप पंचायतों और गांवों का एक साथ एकत्रित होकर किसी एक व्यक्ति को सम्मान देना हरियाणा की सामाजिक व्यवस्था में एक अत्यंत दुर्लभ घटना है।
Watch : किसान मसीहा सम्मान समारोह | धीरणवास हिसार-किसानों की नई उम्मीद बने संत रामपाल जी महाराज।
9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के IICC में कालीरमन फाउंडेशन ने संत रामपाल जी को "भारत गौरव अवॉर्ड" प्रदान किया (जो आश्रम के प्रतिनिधियों द्वारा उनकी ओर से ग्रहण किया गया)। यह सम्मान कई राज्यों में भयंकर बाढ़ के दौरान उनके व्यापक मानवीय प्रयासों की पहचान में दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी स्तर पर यह सम्मान इस बात का संकेत था कि संत जी की सेवाएं केवल राज्य-स्तरीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की हैं।
Watch : किसान मसीहा संत रामपाल जी महाराज को मिला भारत गौरव अवॉर्ड
किसान रत्न सम्मान: डाया गांव, हिसार (दिसंबर 2025)
21 दिसंबर 2025 को हिसार जिले के डाया गांव में भारत किसान यूनियन (A) ने संत रामपाल जी को "किसान रत्न सम्मान" दिया। यह सम्मान उत्तर भारत में आई बाढ़ के दौरान किसानों के लिए उनके "मसीहा" जैसे कार्यों की विशेष स्वीकृति था। भारत किसान यूनियन जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्था द्वारा यह सम्मान दिया जाना संत जी की सेवाओं की व्यापकता और प्रभाव को दर्शाता है।
Watch : संत रामपाल जी महाराज का किसान रत्न सम्मान समारोह का डाया (हिसार) से LIVE Telecast
28 दिसंबर 2025 को जींद जिले के जुलाना ब्लॉक के शादीपुर स्टेडियम में जुलाना बारहा खाप एवं सरपंच एसोसिएशन ने संत रामपाल जी महाराज को "किसान जीवन रक्षक सम्मान" प्रदान किया। यह सम्मान मुख्य रूप से अन्नपूर्णा मुहिम के तहत की गई उन मानवीय सेवाओं के कारण था, जिनमें हरियाणा के 400 से अधिक गांवों के खेतों से बाढ़ का पानी निकालने के लिए हजारों फीट औद्योगिक पाइप और भारी-भरकम मोटरें प्रदान की गईं।
Watch : हजारों किसान बोले: ये है हमारा भगवान | किसान जीवन रक्षक सम्मान, जुलाना (जींद)
1 जनवरी 2026 को हरियाणा के हांसी में पार्क एवेन्यू, सेक्टर-1 में सरपंच एसोसिएशन (हांसी ब्लॉक-1) और टीम नरेश ने संत रामपाल जी महाराज को "जन सेवक रत्न सम्मान" प्रदान किया। यह सम्मान उनके मानवीय प्रयासों, विशेषकर किसान कल्याण और समाज कल्याण के प्रति उनकी समर्पण-भावना को मान्यता देने के लिए दिया गया। नए वर्ष के पहले ही दिन यह सम्मान मिलना अपने आप में एक प्रेरणादायक संदेश था।
Watch : संत रामपाल जी महाराज का जन सेवक रत्न सम्मान समारोह, हांसी, हरियाणा | Live
4 जनवरी 2026 को बालंद सतगामा चबूतरे (SVM नर्सिंग कॉलेज के निकट), रोहतक में "किसान गौरव सम्मान" (Farmer Pride Award) प्रदान किया गया। यह आयोजन 105 गांवों, बालंद सतगामा खाप और रोहतक, कलानौर तथा सांपला की पंचायत एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया। 105 गांवों का एकजुट होकर संत रामपाल जी को सम्मान देना यह स्पष्ट करता है कि उनकी सेवाओं का प्रभाव पूरे रोहतक क्षेत्र में किसानों के दिलों में उतर गया।
Watch : संत रामपाल जी महाराज का "किसान गौरव सम्मान" समारोह बालंद, रोहतक (हरियाणा) से LIVE Telecast
इस सम्मान श्रृंखला का सबसे भव्य और ऐतिहासिक समारोह था: किसान संत गरीबदास गरिमा सम्मान। 11 जनवरी 2026 को झज्जर जिले के गिरावड़ गांव में 240 गांवों और ग्राम पंचायतों के संयुक्त तत्वावधान में यह भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। यह पुरस्कार उनके मानवीय प्रयासों और किसान कल्याण के प्रति उनके अटूट समर्पण की पहचान थी। यह सम्मान विशेष इसलिए भी था क्योंकि इसका नाम महान संत गरीबदास जी महाराज के नाम पर रखा गया था, जिनका जन्म झज्जर जिले के छुड़ानी गांव में एक धनखड़ जाट परिवार में हुआ था। संत रामपाल जी को उसी महान परंपरा के नाम पर उसी धरती पर सम्मानित किया जाना एक गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश का प्रतीक था।
| क्रम | तारीख | सम्मान | सम्मान देने वाली संस्था / समूह | स्थान |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 12 अक्टूबर 2025 | मानवता रक्षक सम्मान | महम चौबीसी खाप पंचायत | महम, रोहतक, हरियाणा |
| 2 | 8 नवंबर 2025 | धनाना रत्न सम्मान | धनाना की 36 बिरादरी | धनाना, सोनीपत, हरियाणा |
| 3 | 9 नवंबर 2025 | किसान रक्षक सम्मान | नौगामा बूरा खाप, पुनिया खाप, भ्याण खाप एवं सरपंच एसोसिएशन बरवाला | गुराना, हिसार, हरियाणा |
| 4 | 16 नवंबर 2025 | किसान रक्षक सम्मान | कुंडालियां ग्राम पंचायत | बनासकांठा, गुजरात |
| 5 | 24 नवंबर 2025 | शॉल एवं स्मृति-चिह्न से सम्मान | चौधरी सर छोटूराम जयंती आयोजन समिति | हिसार, हरियाणा |
| 6 | 7 दिसंबर 2025 | किसान मसीहा सम्मान | सरपंच एसोसिएशन हिसार, 85 गांव एवं 12 खाप | धीरणवास, हिसार, हरियाणा |
| 7 | 9 दिसंबर 2025 | भारत गौरव अवॉर्ड | कालीरमन फाउंडेशन | IICC, नई दिल्ली |
| 8 | 21 दिसंबर 2025 | किसान रत्न सम्मान | भारतीय किसान यूनियन एवं किसान संगठन | डाया, हिसार, हरियाणा |
| 9 | 28 दिसंबर 2025 | किसान जीवन रक्षक सम्मान | जुलाना बारहा खाप एवं सरपंच एसोसिएशन | शादीपुर, जींद, हरियाणा |
| 10 | 1 जनवरी 2026 | जन सेवक रत्न सम्मान | सरपंच एसोसिएशन हांसी ब्लॉक-1 एवं टीम नरेश | हांसी, हरियाणा |
| 11 | 4 जनवरी 2026 | किसान गौरव सम्मान | 105 गांवों एवं सरपंच एसोसिएशन के प्रतिनिधि | बालंद, रोहतक, हरियाणा |
| 12 | 11 जनवरी 2026 | किसान संत गरीबदास गरिमा सम्मान | झज्जर जिला सरपंच एसोसिएशन, खाप पंचायतें, किसान संगठन एवं ग्राम पंचायत | गिरावड़, झज्जर, हरियाणा |
इन सभी सम्मानों की नींव में वह जमीनी सेवा थी जो संत रामपाल जी महाराज ने वर्ष 2025 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान की। कई जिलों के कई गांवों में किसानों के खेत एक महीने से अधिक समय तक बाढ़ के पानी में डूबे रहे, फसलें नष्ट हो गईं और सरकारी सहायता नाकाफी साबित हुई। संत रामपाल जी ने देश के 400 से अधिक गांवों में भारी औद्योगिक पाइप और हेवी-ड्यूटी मोटरें प्रदान कीं, ताकि खेतों से बाढ़ का पानी निकाला जा सके।
कई किसान प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक के कर्ज में डूबे हुए थे। ऐसे में संत जी की सेवाओं ने इन परिवारों को निराशा की खाई से बाहर निकाला। संत रामपाल जी महाराज समाज में लैंगिक, जातीय या धार्मिक भेदभाव को समाप्त करने के साथ-साथ दहेज, नशाखोरी जैसी हानिकारक प्रथाओं को त्यागने के लिए भी समाज का मार्गदर्शन करते हैं।
संत रामपाल जी नियमित रूप से परमेश्वर कबीर देव के सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते रहते हैं। धीरे-धीरे उनके द्वारा प्रचारित आध्यात्मिक ज्ञान की ख्याति देश और विदेश में फैलने लगी। भारत, नेपाल, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, बेल्जियम, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, मलेशिया, फिजी और अनेक देशों में उनके अनुयायी निवास करते हैं।
अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को मुफ्त भोजन, वस्त्र, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आश्रय प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे गरिमामय जीवन जी सकें। यहां तक कि जो लोग कभी उनके आलोचक थे, वे भी अब उनकी इस अतुलनीय सेवा को मानते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
संत रामपाल जी महाराज को अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मिले ये सभी 12 प्रमुख सम्मान: मानवता रक्षक सम्मान, धनाना रत्न सम्मान, किसान रक्षक सम्मान (हिसार), किसान रक्षक सम्मान (गुजरात), शॉल एवं स्मृति-चिह्न (छोटूराम जयंती), किसान मसीहा सम्मान, भारत गौरव अवॉर्ड, किसान रत्न सम्मान, किसान जीवन रक्षक सम्मान, जन सेवक रत्न सम्मान, किसान गौरव सम्मान और किसान संत गरीबदास गरिमा सम्मान – ये केवल पुरस्कार नहीं हैं। ये हरियाणा और भारत की जनता की ओर से दी गई एक सामूहिक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।
जब सरकारी तंत्र और संस्थाएं बाढ़ पीड़ित किसानों की सहायता में अपर्याप्त साबित हुईं, तब एक संत ने आगे आकर अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से न केवल तात्कालिक राहत दी, बल्कि दीर्घकालिक समाधान भी प्रदान किए। यही कारण है कि आज भारत की धरती पर, गांव-गांव में संत रामपाल जी महाराज का नाम किसानों की जुबान पर है: एक सच्चे जनसेवक, मानवता के रक्षक और किसानों के मसीहा के रूप में।