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संत रामपाल जी बताते हैं कि व्रत रखना गलत भक्ति की विधि है और शास्त्रों के निर्देशों के विपरीत है। पवित्र श्रीमद भागवद गीता भी अध्याय 6:16 में व्रत रखने के खिलाफ सलाह देती है।