कबीर परमेश्वर कबीर दास नाम से प्रसिद्ध हैं जो की जुलाहे का काम करते थे और बनारस में रहते थे। आश्चर्य की बात ये है की परमात्मा स्वयम इस पृथ्वी पर अवतरित हुए और परमेश्वर होते हुए भी एक दास कहलाए। परमेश्वर कबीर ने अपने भेद को इस तरह गुप्त रखा की कोई भी उनको पहचान नहीं सका। कुछ पर उन्होने अपनी कृपा की जिस के कारण वो उनका भेद पा सके। उनमे से कुछ के नाम हैं धरमदास जी, गुरु नानक देव जी। वेद भी परमात्मा के इस गुण की गवाही देते हैं। ऋग वेद मण्डल 10, सुक्त 4, मंत्र 6 

में परमात्मा को तस्कर कहा है। कहा है की परमात्मा तस्कर की तरह आता है और अपना भेद किसी को नहीं लगने देता। गुरु नानक देव जी ने भी अपनी वाणी में कबीर परमेश्वर को एक ठग कहा है. (श्री गुरु ग्रंथ साहिब राग सिरी महला पहला, पृष्ठ 24)