गुरु नानक देव जी अपने गुरु कबीर साहिब की महिमा गाते हुए - कबीर सागर < Jagat Guru Rampal Ji

Jagat Guru Rampal Ji Maharaj

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गुरु नानक देव जी अपने गुरु कबीर साहिब की महिमा गाते हुए - कबीर सागर

अमृतवाणी कबीर सागर (अगम निगम बोध, बोध सागर से) पृष्ठ नं. 44

।।नानक वचन।।

।।शब्द।।
वाह वाह कबीर गुरु पूरा है।
पूरे गुरु की मैं बलि जावाँ जाका सकल जहूरा है।।
अधर दुलिच परे है गुरुनके शिव ब्रह्मा जह शूरा है।।
श्वेत ध्वजा फहरात गुरुनकी बाजत अनहद तूरा है।।
पूर्ण कबीर सकल घट दरशै हरदम हाल हजूरा है।।
नाम कबीर जपै बड़भागी नानक चरण को धूरा है।।

विशेष विवेचन:- बाबा नानक जी ने उस कबीर जुलाहे (धाणक) काशी वाले को सत्यलोक (सच्चखण्ड) में आँखों देखा तथा फिर काशी में धाणक (जुलाहे) का कार्य करते हुए तथा बताया कि वही धाणक रूप (जुलाहा) सत्यलोक में सत्यपुरुष रूप में भी रहता है तथा यहाँ भी वही है।