मलार महला १ ॥ (Page 1257, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी) - गुरु नानक देव जी की बानी
बागे कापड़ बोलै बैण ॥
लमा नकु काले तेरे नैण ॥
कबहूं साहिबु देखिआ भैण ॥१॥
ऊडां ऊडि चड़ां असमानि ॥
साहिब सम्रिथ तेरै ताणि ॥
जलि थलि डूंगरि देखां तीर ॥
थान थनंतरि साहिबु बीर ॥२॥
जिनि तनु साजि दीए नालि ख्मभ ॥
अति त्रिसना उडणै की डंझ ॥
नदरि करे तां बंधां धीर ॥
जिउ वेखाले तिउ वेखां बीर ॥३॥
न इहु तनु जाइगा न जाहिगे ख्मभ ॥
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