सांसारिक चीं-चूं में ही भक्ति करनी पड़ेगी

एक थानेदार घोड़ी पर सवार होकर अपने क्षेत्रा में किसी कार्यवश जा रहा था। ज्येष्ठ (श्रनदम) का महीना, दिन के एक बजे की गर्मी। हरियाणा प्रान्त। एक किसान रहट से फसल की सिंचाई कर रहा था। बैलों द्वारा कोल्हू की तरह रहट को चलाया जाता था। बाल्टियों की लड़ी (ब्ींपद) जो पूली (चक्री) के ऊपर चलतीथी जिससे कूंए से पानी निकलकर खेत में जाने वाली नाली में गिरता था। [...] Read more

तम्बाकू से गधे-घोड़े भी घृणा करते हैं

एक दिन संत गरीबदास जी (गाँव-छुड़ानी, जिला-झज्जर वाले) किसी कार्यवश घोड़े पर सवार होकर जींद जिले में किसी गाँव में जा रहे थे। मार्ग में गाँव मालखेड़ी (जिला जींद) के खेत थे। उन खेतों में से घोड़े पर बैठकर जा रहे थे। गेहूँ की फसल खेतों में खड़ी थी। घोड़ा रास्ता छोड़कर गेहूँ की फसल के बीचों-बीच चलने लगा। खेतों में फसल के रखवाले थे। वे लाठी-डण्डे लेकर दौड़े और [...] Read more