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Rig Ved - God is in Form

Rig Ved Mandal 1, Sukt 31, Mantra 17 परमात्मा साकार है और बह राजा के समान दर्शनीय है ! और उसका नाम कविर्देव है! वेदों में परमात्मा साकार है मनुष्य सदृश्य है और सतलोक में तेजोमय शरीर में विद्यमान है।

भक्ति मार्ग पर यात्रा

जब तक आध्यात्मिक ज्ञान नहीं, तब तक तो जीव माया के नशे में अपना उद्देश्य भूल चुका था और जैसा ऊपर बताया है कि शराबी नशे में ज्येष्ठ महीने की गर्मी में दिन के दोपहर के समय धूप में पड़ा-पड़ा पसीने व रेत में सना भी कह रहा होता है कि मौज हो रही है। परंतु नशा उतरने के पश्चात् उसे पता चलता है कि तू तो जंगल में पड़ा है, घर तो अभी दूर है। कबीर जी ने कहा है [...] Read more

केदारनाथ मंदिर भारत में तथा पशुपति मंदिर नेपाल में कैसे बना?

(केदार का अर्थ दलदल है) महाभारत में कथा है कि पाँचों पाण्डव (युद्धिष्ठर, अर्जुन, भीम, नकुल व सहदेव) जीवन के अंतिम समय में हिमालय पर्वत पर तप कर रहे थे। एक दिन सदाशिव यानि काल ब्रह्म ने दुधारू भैंस का रूप बनाया और उस क्षेत्रा में घूमने लगा। भीम दूध प्राप्ति के उद्देश्य से उसे पकड़ने के लिए दौड़ा तो भैंस पृथ्वी में समाने लगी। भीम ने भैंस का पिछला भाग [...] Read more

Astrophysics From Vedas

Origin of Universe, formation of Stars, Planets & Galaxies from the Vedas The realm of astrophysics explores the origin of the univese by applying the principles of physics, and so far remains in its infancy and with their current abysmal knowledge base is unlikely to ever get an answer to the universal question on how the universe was [...] Read more

उत्तम (Uttam) & अनुत्तम (Anuttam)

The straightforward meaning of अनुत्तम (Anuttam) is the "opposite of उत्तम (Uttam)". उत्तम (Uttam) means GOOD and अनुत्तम (Anuttam) means BAD. Those unknowledgeable saints who do not have any knowledge of creation of nature and those who consider Shri Krishan Ji to be the Supreme God have caused a catastrophe by translating this word "अनुत्तम [...] Read more