Narcotic-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

One of the cardinal teachings of Jagat Guru Rampal Ji is renunciation of intoxicants which some other gurus also profess. The biggest difference however is that when one takes "naam" (initiation) from Jagat Guru Rampal Ji, they get the grace of Satguru Rampal Ji and the power of the true naam to adhere to it and thus get deaddicted straightaway.

क्या पाण्डव सदा स्वर्ग में ही रहेंगे?

धर्मदास जी ने कबीर परमेश्वर जी के चरण पकड़ कर अति विनम्र होकर आधीन भाव से प्रश्न किया। प्रश्नः- हे बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर जी! क्या पाण्डव अब सदा स्वर्ग में ही रहेगें? कबीर परमेश्वर जी का उत्तरः- नहीं धर्मदास! जो पुण्य युधिष्ठर ने उनको प्रदान किए हैं। उन पुण्यों का तथा स्वयं किए यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य जब स्वर्ग में समाप्त हो जाएगा तब [...] Read more

दास की परिभाषा

एक समय सुल्तान एक संत के आश्रम में गया। वहाँ कुछ दिन संत जी के विशेष आग्रह से रूका । संत का नाम हुकम दास था। बारह शिष्य उनके साथ आश्रम में रहते थे। सबके नाम के पीछे दास लगा था। फकीर दास, आनन्द दास, कर्म दास, धर्मदास। उनका व्यवहार दास वाला नहीं था। उनके गुरू एक को सेवा के लिए कहते तो वह कहता कि धर्मदास की बारी है, उसको कहो, धर्मदास कहता कि आनन्द [...] Read more

राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ

नल तथा नील को शरण में लेना त्रोतायुग में स्वयंभु कविर्देव(कबीर परमेश्वर) रूपान्तर करके मुनिन्द्र ऋषि के नाम से आए हुए थे। एक दिन अनल अर्थात् नल तथा अनील अर्थात् नील ने मुनिन्द्र साहेब का सत्संग सुना। दोनों भक्त आपस में मौसी के पुत्रा थे। माता-पिता का देहान्त हो चुका था। नल तथा नील दोनों शारीरिक व मानसिक रोग से अत्यधिक पीड़ित थे। सर्व ऋषियों व [...] Read more

सांसारिक चीं-चूं में ही भक्ति करनी पड़ेगी

एक थानेदार घोड़ी पर सवार होकर अपने क्षेत्रा में किसी कार्यवश जा रहा था। ज्येष्ठ (श्रनदम) का महीना, दिन के एक बजे की गर्मी। हरियाणा प्रान्त। एक किसान रहट से फसल की सिंचाई कर रहा था। बैलों द्वारा कोल्हू की तरह रहट को चलाया जाता था। बाल्टियों की लड़ी (ब्ींपद) जो पूली (चक्री) के ऊपर चलतीथी जिससे कूंए से पानी निकलकर खेत में जाने वाली नाली में गिरता था। [...] Read more

तम्बाकू से गधे-घोड़े भी घृणा करते हैं

एक दिन संत गरीबदास जी (गाँव-छुड़ानी, जिला-झज्जर वाले) किसी कार्यवश घोड़े पर सवार होकर जींद जिले में किसी गाँव में जा रहे थे। मार्ग में गाँव मालखेड़ी (जिला जींद) के खेत थे। उन खेतों में से घोड़े पर बैठकर जा रहे थे। गेहूँ की फसल खेतों में खड़ी थी। घोड़ा रास्ता छोड़कर गेहूँ की फसल के बीचों-बीच चलने लगा। खेतों में फसल के रखवाले थे। वे लाठी-डण्डे लेकर दौड़े और [...] Read more

Rig Ved - God is in Form

Rig Ved Mandal 1, Sukt 31, Mantra 17 परमात्मा साकार है और बह राजा के समान दर्शनीय है ! और उसका नाम कविर्देव है! वेदों में परमात्मा साकार है मनुष्य सदृश्य है और सतलोक में तेजोमय शरीर में विद्यमान है।

भक्ति मार्ग पर यात्रा

जब तक आध्यात्मिक ज्ञान नहीं, तब तक तो जीव माया के नशे में अपना उद्देश्य भूल चुका था और जैसा ऊपर बताया है कि शराबी नशे में ज्येष्ठ महीने की गर्मी में दिन के दोपहर के समय धूप में पड़ा-पड़ा पसीने व रेत में सना भी कह रहा होता है कि मौज हो रही है। परंतु नशा उतरने के पश्चात् उसे पता चलता है कि तू तो जंगल में पड़ा है, घर तो अभी दूर है। कबीर जी ने कहा है [...] Read more

केदारनाथ मंदिर भारत में तथा पशुपति मंदिर नेपाल में कैसे बना?

(केदार का अर्थ दलदल है) महाभारत में कथा है कि पाँचों पाण्डव (युद्धिष्ठर, अर्जुन, भीम, नकुल व सहदेव) जीवन के अंतिम समय में हिमालय पर्वत पर तप कर रहे थे। एक दिन सदाशिव यानि काल ब्रह्म ने दुधारू भैंस का रूप बनाया और उस क्षेत्रा में घूमने लगा। भीम दूध प्राप्ति के उद्देश्य से उसे पकड़ने के लिए दौड़ा तो भैंस पृथ्वी में समाने लगी। भीम ने भैंस का पिछला भाग [...] Read more

गुरू बिन मोक्ष नही

प्रश्न:- क्या गुरू के बिना भक्ति नहीं कर सकते? उत्तर:- भक्ति कर सकते हैं, परन्तु व्यर्थ प्रयत्न रहेगा। प्रश्न:- कारण बताऐं? उत्तर:- परमात्मा का विधान है जो सूक्ष्मवेद में कहा है कबीर, गुरू बिन माला फेरते, गुरू बिन देते दान। गुरू बिन दोंनो निष्फल है, पूछो वेद पुराण।। कबीर, राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हों भी गुरू कीन्ह। तीन लोक के वे धनी, गुरू आगे [...] Read more