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Way of Worship Opposed to Scriptures Leads to Hell

In Gita Adhyay 16 Shlok 23, 24, it is stated that those who abandoning the ordinances of scriptures follow way of worship according to their whimsical desires {worship of the three gunas, Rajgun-Brahma, Satgun-Vishnu, Tamgun-Shiv, and other gods-goddesses, idol-worship, Pitra-worship, ghost-worship – to carry out shraadhs – offer pinds, worship of [...] Read more

शरीर के कमलों की यथार्थ जानकारी

कबीर सागर में अध्याय ‘‘कबीर बानी‘‘ पृष्ठ 111 पर शरीर के कमलों की यथार्थ जानकारी है जो इस प्रकार हैः- 1) प्रथम मूल कमल है, देव गणेश है। चार पंखुड़ी का कमल है। 2) दूसरा स्वाद कमल है, देवता ब्रह्मा-सावित्राी हैं। छः पंखुड़ी का कमल है। 3) तीसरा नाभि कमल है, लक्ष्मी-विष्णु देवता हैं। आठ पंखुड़ी का कमल है। 4) चैथा हृदय कमल है, पार्वती-शिव देवता हैं। 12 [...] Read more

कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है

कर नैनों दीदार महलमें प्यारा है।।टेक।। काम क्रोध मद लोभ बिसारो, शील सँतोष क्षमा सत धारो। मद मांस मिथ्या तजि डारो, हो ज्ञान घोडै असवार, भरम से न्यारा है।1। धोती नेती बस्ती पाओ, आसन पदम जुगतसे लाओ। कुम्भक कर रेचक करवाओ, पहिले मूल सुधार कारज हो सारा है।2। मूल कँवल दल चतूर बखानो, किलियम जाप लाल रंग मानो। देव गनेश तहँ रोपा थानो, रिद्धि सिद्धि चँवर [...] Read more

चार युगों का वर्णन

चार युग हैं। 1) सत्ययुग 2) त्रेतायुग 3) द्वापर युग 4) कलयुग। 1) सत्ययुग का वर्णन:- सत्ययुग की अवधि 17 लाख 28 हजार वर्ष है। मनुष्य की आयु प्रारम्भ में दस लाख वर्ष होती है। अन्त में एक लाख वर्ष होती है। मनुष्य की ऊँचाई 21 हाथ यानि लगभग 100 से 150 फुट होती है। {उस समय मनुष्य के हाथ (कोहनी से बड़ी ऊंगली के अंत तक) की लंबाई लगभग 5 फुट होती है।} मेरा नाम [...] Read more

Narcotic-Free India Campaign by Jagat Guru Rampal Ji

One of the cardinal teachings of Jagat Guru Rampal Ji is renunciation of intoxicants which some other gurus also profess. The biggest difference however is that when one takes "naam" (initiation) from Jagat Guru Rampal Ji, they get the grace of Satguru Rampal Ji and the power of the true naam to adhere to it and thus get deaddicted straightaway.

क्या पाण्डव सदा स्वर्ग में ही रहेंगे?

धर्मदास जी ने कबीर परमेश्वर जी के चरण पकड़ कर अति विनम्र होकर आधीन भाव से प्रश्न किया। प्रश्नः- हे बन्दी छोड़ कबीर परमेश्वर जी! क्या पाण्डव अब सदा स्वर्ग में ही रहेगें? कबीर परमेश्वर जी का उत्तरः- नहीं धर्मदास! जो पुण्य युधिष्ठर ने उनको प्रदान किए हैं। उन पुण्यों का तथा स्वयं किए यज्ञ आदि धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्य जब स्वर्ग में समाप्त हो जाएगा तब [...] Read more

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