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जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराजद्वारा दिया गया तत्वज्ञान

 

ज्ञान गंगा

सर्व ग्रंथ जैसे की वेद, गीता, बाइबल, क़ुरान से तत्वज्ञान

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नाम कौन से राम का जपना है ?
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गीता अध्याय 15 का श्लोक 16, 17 - इस संसारमें दो प्रकारके भगवान हैं नाशवान और अविनाशी और ये सम्पूर्ण भूतप्राणियोंके शरीर तो नाशवान और जीवात्मा अविनाशी कहा जाता है। उत्तम भगवान तो अन्य ही है जो तीनों लोकोंमें प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है एवं अविनाशी परमेश्वर परमात्मा इस प्रकार कहा गया है।

पूर्ण संत की पहचान - वह संत सभी धर्म ग्रंथों का पूर्ण जानकार होता है। वह तीन प्रकार के मंत्रों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा

 

जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज

जीव हमारी जाती है, मानव धर्म हमारा। हिन्दू मुस्लिम सीख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा

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संत रामपाल जी महाराज का संक्षिप्त परिचय
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जीव हमारी जाती है, मानव धर्म हमारा। हिन्दू मुस्लिम सीख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा ॥

संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत रहे। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया।

 

पूर्णब्रह्म कबीर परमेश्वर

Kabir Vani - ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक ह्नै दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

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साहेब कबीर व गोरख नाथ की गोष्ठी
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अवधु अविगत से चल आया, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया।।टेक।।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक ह्नै दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।
माता-पिता मेरे कछु नहीं, ना मेरे घर दासी।
जुलहा को सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।।
पांच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानूं ज्ञान अपारा।
सत्य स्वरूपी नाम साहिब का, सो है नाम हमारा।।
अधर दीप (सतलोक) गगन गुफा में, तहां निज वस्तु सारा।
ज्योति स्वरूपी अलख निरंजन (ब्रह्म) भी, धरता ध्यान हमारा।।
हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।।

 

पवि़त्र ग्रंथ

एक मालिक/प्रभु कबीर साहेब है

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परमात्मा कबीर (कविर देव) है
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सभी धार्मिक ग्रन्थों व शास्त्रों में उस एक प्रभु/मालिक/रब/खुदा/अल्लाह/ राम/साहेब/गोड/परमेश्वर की प्रत्यक्ष नाम लिख कर महिमा गाई है। वह एक मालिक/प्रभु कबीर साहेब है जो सतलोक में मानव सदृश स्वरूप में आकार में रहता है।

वेद, गीता, कुरान और गुरु ग्रन्थ साहेब ये सब लगभग मिलते जुलते ही हैं। यजुर्वेद के अ. 5 के श्लोक नं. 32 में, सामवेद के संख्या नं. 1400, 822 में, अथर्ववेद के काण्ड नं. 4 के अनुवाक 1 के श्लोक नं. 7, ऋग्वेद के म. 1 अ. 1 के सुक्त 11 के श्लोक नं. 4 में कबीर नाम लिख कर बताया है कि पूर्ण ब्रह्म कबीर है जो सतलोक में आकार में रहता है।

 

संत गरीबदास जी महाराज

हम सुल्तानी नानक तारे, दादू को उपदेश दिया, जाति जुलाहा भेद ना पाया, काशी माहे कबीर हुआ ।

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संत गरीब दास (1717 - 1778)
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गरीब, अनंत कोटि ब्रह्माण्ड का, एक रति नहीं भार।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं, कुल के सृजनहार॥

आदरणीय गरीबदास साहेब जी का आर्विभाव सन् 1717 में हुआ तथा साहेब कबीर जी के दर्शन दस वर्ष की आयु में सन् 1727 में नला नामक खेत में हुए तथा सत्लोक वास सन् 1778 में हुआ। आदरणीय गरीबदास साहेब जी को भी परमात्मा कबीर साहेब जी सशरीर जिंदा रूप में मिले। आदरणीय गरीबदास साहेब जी अपने नला नामक खेतों में अन्य साथी ग्वालों के साथ गाय चरा रहे थे।

 

गुरु नानक देव जी

श्री गुरु ग्रंथ साहिब पृष्ठ 721 - ਹਕਾ ਕਬੀਰ ਕਰੀਮ ਤੂ ਬੇਐਬ ਪਰਵਦਗਾਰ
हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार

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राग तिलंग महला 1 - गुरु ग्रन्थ साहेब पृष्ठ नं. 721
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Rag Tilang Mehla Pehla

 

श्रीमद भगवद गीता

अध्याय 4 श्लोक 5 - गीता ज्ञान दाता जन्म-मृत्यु में है।

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श्रीमद्भगवत गीता
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गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5 - गीता ज्ञान दाता कह रहा है - मैं तो जन्म-मृत्यु में अर्थात् नाशवान हूँ।

अध्याय 7, श्लोक 15 - श्लोक 15 में कहा है कि त्रिगुण माया के द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है एैसे असुर स्वभाव को धारण किए हुए नीच व्यक्ति दुष्कर्म करने वाले मूर्ख मुझे नहीं भजते।

अध्याय 15, श्लोक 17 - उत्तम पुरुष कोई अन्य है जो सब का धारण पोषण करता है।

गीता अध्याय 18 श्लोक 62, 64, 66 - में कहा है कि उस परमेश्वर की शरण में जा तथा मेरा पूज्य देव भी वही है।

 

श्री देवी महापुराण

ब्रह्मा जी, विष्णु जी, तथा शिव जी नाशवान हैं

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ज्ञान गंगा

  • सर्व प्रभुओं की आयु

    ब्रह्मा विष्णु तथा शिव भगवान की आयु गीता अध्याय 8 का श्लोक 17 सहस्त्रायुगपर्यन्तम्, अहः,यत्,ब्रह्मणः, विदुः,रात्रिम्, युगसहस्त्रान्ताम्, ते, अहोरात्राविदः, जनाः।।17।।...
  • पूर्ण संत की पहचान

    पवित्र सद्ग्रन्थों से पूर्ण संत की पहचान वेदों, गीता जी आदि पवित्र सद्ग्रंथों में प्रमाण मिलता है कि जब-जब धर्म...
  • कौन तथा कैसा है कुल का मालिक

    जिन-जिन पुण्यात्माओं ने परमात्मा को प्राप्त किया उन्होंने बताया कि कुल का मालिक एक है। वह मानव सदृश तेजोमय शरीर...
  • पवित्र शास्त्र भी कविर्देव (कबीर परमेश्वर) के साक्षी

    इसी प्रकार कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने मुस्लमानों को बुरा नहीं कहा है, न ही पवित्र कुरान शरीफ को गलत कहा...

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सृष्टि रचना

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श्रीमद भगवद गीता

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वेद

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